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Breaking News : आर्बिटल ट्रेन की रफ्तार तेज, ड्रोन सर्वे पूरा, स्थलीय निरीक्षण शुरू, दादरी से पलवल तक कनेक्टिविटी की उम्मीद जगी, जनहित में पहले भी उठ चुकी है आर्बिटल ट्रेन की मांग, 135 किलोमीटर लंबा होगा रिंग रेल कॉरिडोर

दादरी, रफ़्तार टूडे। गौतम बुद्ध नगर सहित एनसीआर क्षेत्र के लिए बहुप्रतीक्षित आर्बिटल ट्रेन कॉरिडोर अब हकीकत की ओर तेज़ी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। आर्बिटल रेल परियोजना के तहत ड्रोन सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है, वहीं अब स्थलीय निरीक्षण (ग्राउंड सर्वे) की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। इस प्रगति के साथ ही क्षेत्रवासियों में बेहतर रेल कनेक्टिविटी को लेकर उम्मीदें और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।
यह महत्वाकांक्षी रेल कॉरिडोर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के बाहर समानांतर विकसित किया जा रहा है, जिससे एनसीआर के औद्योगिक, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना दिल्ली पर यातायात का दबाव कम करने के साथ-साथ वैकल्पिक और निर्बाध रेल नेटवर्क प्रदान करेगी।


जनहित में पहले भी उठ चुकी है आर्बिटल ट्रेन की मांग
गौरतलब है कि आर्बिटल ट्रेन की मांग जनहित में पहले भी की जा चुकी है। सामाजिक और वैचारिक संगठन आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा इस विषय को पूर्व में प्रमुखता से उठाया गया था।
आर्य प्रतिनिधि सभा में डॉ. आनंद आर्य द्वारा दादरी, ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने के लिए आर्बिटल ट्रेन परियोजना की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया गया था। उनका तर्क रहा है कि इस रेल कॉरिडोर के पूर्ण होने से संपूर्ण जनपद गौतम बुद्ध नगर को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से व्यापक लाभ मिलेगा।

हरियाणा मॉडल पर एनसीआर में आर्बिटल ट्रेन की मांग
हरियाणा में पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के समानांतर आर्बिटल ट्रेन योजना को लेकर सकारात्मक पहल के बाद, अब उसी तर्ज पर गौतम बुद्ध नगर में भी आर्बिटल ट्रेन परियोजना लागू करने की मांग तेज़ हो गई है।
इस क्रम में आर्य प्रतिनिधि सभा के जिला उपाध्यक्ष डॉ. आनंद आर्य ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र व सोशल मीडिया के माध्यम से आग्रह किया था कि कुंडली बॉर्डर से दादरी, ग्रेटर नोएडा होते हुए पलवल तक आर्बिटल ट्रेन परियोजना स्थापित की जाए।


135 किलोमीटर लंबा होगा रिंग रेल कॉरिडोर
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित आर्बिटल रेल कॉरिडोर को लगभग 135 किलोमीटर लंबे रिंग रूट के रूप में विकसित किया जाएगा। पूरे कॉरिडोर पर डबल ट्रैक प्रस्तावित है, जिससे मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों दोनों का सुचारु संचालन संभव हो सकेगा।
इससे औद्योगिक इकाइयों को तेज़ और किफायती परिवहन सुविधा मिलेगी, वहीं दैनिक यात्रियों को भी राहत मिलेगी।

उद्योग, रोजगार और आवागमन को मिलेगा बढ़ावा
आर्बिटल ट्रेन कॉरिडोर के पूरा होने से ग्रेटर नोएडा, दादरी, जेवर, यमुना सिटी और औद्योगिक क्षेत्रों को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
साथ ही सड़क यातायात पर निर्भरता कम होने से प्रदूषण में कमी और यातायात दबाव में राहत मिलने की संभावना है।


स्थानीय लोगों में बढ़ी उम्मीद
ड्रोन सर्वे पूरा होने और अब स्थलीय निरीक्षण शुरू होने की खबर के बाद स्थानीय नागरिकों, उद्योगपतियों और सामाजिक संगठनों में उत्साह है। लोगों का मानना है कि यदि यह परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो गौतम बुद्ध नगर एनसीआर का एक प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब बन सकता है।

कुल मिलाकर, आर्बिटल ट्रेन कॉरिडोर को लेकर हो रही प्रगति यह संकेत देती है कि आने वाले समय में एनसीआर को एक आधुनिक, वैकल्पिक और प्रभावी रेल नेटवर्क मिलने वाला है। जनहित में उठाई गई मांगें अब जमीन पर उतरती दिख रही हैं और यदि यह परियोजना पूर्ण होती है, तो यह गौतम बुद्ध नगर के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी। औद्योगिक, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना दिल्ली पर यातायात का दबाव कम करने के साथ-साथ वैकल्पिक और निर्बाध रेल नेटवर्क प्रदान करेगी।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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