Greater Noida Authority News : “प्लास्टिक छोड़ो, प्रकृति जोड़ो”, बदलाव अभियान से ग्रेटर नोएडा में गूंजा स्वच्छता और हरित भविष्य का संदेश, 9 दिनों में एक लाख से ज्यादा लोग हुए जागरूक, प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश देकर कहा स्वास्थ्य विभाग की टीम पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी एनजीओ ‘नेचर बॉडीज’ के साथ मिलकर इस अभियान को जमीन पर उतारे

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। तेजी से शहरीकरण की दौड़ में जब प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, ऐसे समय में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने नागरिकों को जागरूक करने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल की। “बदलाव: हम प्लास्टिक का उत्पादन, उपभोग और निपटान कैसे करते हैं, इसे नए सिरे से सोचें” थीम पर आधारित यह नौ दिवसीय जन-जागरूकता अभियान 8 दिसंबर से 16 दिसंबर 2025 तक पूरे शहर में चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि नागरिकों की सोच और व्यवहार में वास्तविक बदलाव लाना रहा।
प्लास्टिक के खिलाफ जन-आंदोलन की शुरुआत
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी एनजीओ ‘नेचर बॉडीज’ के साथ मिलकर इस अभियान को जमीन पर उतारा। इस महाअभियान में सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन (CEE), एचडीएफसी बैंक और ब्लू प्लैनेट एनवायरनमेंटल सोल्यूशन का सहयोग रहा, जिसने इसे एक सार्वजनिक सहभागिता आधारित मॉडल बना दिया।
हर गली, हर बाजार, हर स्कूल तक पहुंचा संदेश
अभियान के दौरान ग्रेटर नोएडा के कोने-कोने में गतिविधियां आयोजित की गईं।
20 रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन (RWA)
50 बाजार और सार्वजनिक स्थल
4 स्कूल
2 अस्पताल
10 उद्योग
2 बल्क वेस्ट जनरेटर्स (BWG) / होटल
इन सभी स्थानों पर 250 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके जरिए 1 लाख से अधिक नागरिकों तक सीधा संवाद स्थापित किया गया। यह आंकड़ा अपने आप में इस अभियान की व्यापकता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
नुक्कड़ नाटक से लेकर रैलियों तक, संदेश बना रोचक
अभियान की खास बात यह रही कि इसमें पारंपरिक भाषणों की बजाय रचनात्मक और मनोरंजक माध्यमों का उपयोग किया गया।
नुक्कड़ नाटक
माइम शो
स्वच्छता रैलियां
रोड शो
थीम आधारित नृत्य प्रस्तुतियां
क्विज प्रतियोगिताएं
घर-घर संवाद
सामूहिक स्वच्छता अभियान
इन गतिविधियों ने बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और व्यापारियों—सभी वर्गों को अभियान से जोड़ दिया। लोग न सिर्फ सुन रहे थे, बल्कि सवाल पूछ रहे थे और समाधान अपनाने की बात भी कर रहे थे।
सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर सीधा प्रहार
अभियान का मुख्य फोकस रहा सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से दूरी बनाना। लोगों को बताया गया कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की थैलियां, कप, स्ट्रॉ और पैकेजिंग किस तरह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही हैं।
इसके विकल्प के तौर पर कपड़े के थैले, जूट बैग और पुन: उपयोग योग्य सामग्री को अपनाने का संदेश दिया गया।
‘हरा गीला, नीला सूखा’ बना स्वच्छता का मंत्र
कचरा प्रबंधन को आसान भाषा में समझाने के लिए अभियान में सरल संदेश दिए गए—
हरा = गीला कचरा
नीला = सूखा कचरा
“गीला कचरा, सूखा कचरा—कचरे के दो प्रकार” जैसे नारों ने लोगों को यह समझने में मदद की कि कचरा अलग-अलग करने से उसका निपटान कितना आसान और प्रभावी हो जाता है। कई सोसाइटियों में लोगों ने तुरंत अपने घरों में अलग-अलग डस्टबिन रखने की शुरुआत की।
व्यापारियों ने भी दिखाई जिम्मेदारी
स्थानीय बाजारों में दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को अभियान से जोड़ा गया।
दुकानों के सामने सफाई करवाई गई
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विकल्प अपनाने की अपील की गई
ग्राहकों को जागरूक किया गया
इस दौरान 500 से अधिक कपड़े के थैले वितरित किए गए, जिससे बाजारों में प्लास्टिक थैलियों का उपयोग कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया।
स्कूलों से उठा स्वच्छता का संदेश
चौधरी केशराम इंटर कॉलेज, इकोटेक-3 में विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया।
यहां 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने मिलकर लगभग 70 किलोग्राम कचरा एकत्र किया।
इस पहल ने बच्चों और युवाओं में यह संदेश मजबूत किया कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
प्राधिकरण के अधिकारी रहे मैदान में सक्रिय
इस अभियान में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कई वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मैदान में उतरे।
प्रधान महाप्रबंधक संदीप चंद्रा
वरिष्ठ प्रबंधक चेतराम सिंह
सहायक प्रबंधक कुलदीप शर्मा
सहायक प्रबंधक गौरव बघेल
इन सभी ने जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेकर टीम का मनोबल बढ़ाया।
एसीईओ लक्ष्मी वीएस का सख्त लेकिन सकारात्मक संदेश
प्राधिकरण की एसीईओ लक्ष्मी वीएस ने दुकानदारों और विक्रेताओं से स्पष्ट अपील की कि— हर दुकान पर डस्टबिन रखें
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का प्रयोग न करें
कचरा इधर-उधर न फेंकें
उन्होंने कहा, “ग्रेटर नोएडा को स्वच्छ और हरित बनाए रखना केवल प्राधिकरण की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी का सामूहिक कर्तव्य है।”
उन्होंने निवासियों से इस अभियान को एक आंदोलन की तरह आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
बदलाव की ओर बढ़ता ग्रेटर नोएडा
यह नौ दिवसीय अभियान यह साबित करता है कि यदि प्रशासन, एनजीओ, कॉर्पोरेट संस्थान और आम नागरिक मिलकर काम करें, तो प्लास्टिक प्रदूषण जैसी बड़ी समस्या से भी मुकाबला किया जा सकता है।
ग्रेटर नोएडा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण केवल नारे नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनने चाहिए।
“बदलाव” अभियान सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सोच में बदलाव की शुरुआत है।
अगर यही जागरूकता बनी रही, तो आने वाले वर्षों में ग्रेटर नोएडा न सिर्फ एक आधुनिक शहर होगा, बल्कि स्वच्छ, हरित और जिम्मेदार शहर के रूप में भी पहचान बनाएगा।



