Greater Noida Authority news : “पानी नहीं, तो चैन नहीं!”, ग्रेटर नोएडा के सेक्टर म्यू-2 में फूटा गुस्सा, दो दिन से जल संकट!, नागरिकों ने दी आंदोलन की चेतावनी – ‘अब बच्चे वहीं नहाएंगे अथॉरिटी दफ्तर में!’, भ्रष्टाचार बनाम सुविधा, ‘जो ज्यादा कमीशन दे, उसी को मिलता ठेका!’, पिछली रात का अंधेरा और आज भी टंकी सूखी!

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
देश की राजधानी के बगल में बसे ग्रेटर नोएडा के सेक्टर म्यू-2 में इन दिनों पानी की एक-एक बूंद के लिए लोग परेशान हैं। दो दिन से जलापूर्ति ठप है और लोगों का सब्र अब जवाब देने लगा है। बच्चों को बिना नहलाए स्कूल भेजना, खाना न बना पाने की मजबूरी, और बुज़ुर्गों की परेशानी अब आंदोलन का रूप लेने को तैयार है।
स्थानीय निवासी और सेक्टर म्यू-2 वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठी ने चेतावनी दी है कि यदि रात तक पानी नहीं आता तो कल पूरा सेक्टर प्राधिकरण कार्यालय में धरना देगा – बच्चे वहीं नहाएंगे और खाना भी वहीं बनेगा।
सिस्टम फेल: पैनल और मोटर दोनों खराब!
पानी की सप्लाई ठप होने का कारण टेक्निकल फेल्योर बताया जा रहा है। धर्मेन्द्र राठी के अनुसार,
“कल पम्प हाउस का पैनल और मोटर जल गया था, आज UGR (अंडरग्राउंड रिज़र्वायर) का पैनल खराब हो गया। अब दो दिन से पूरा सेक्टर सूखा पड़ा है, सिर्फ बहाने मिल रहे हैं, समाधान कोई नहीं।”
पिछली रात का अंधेरा – और आज भी टंकी सूखी!
रातभर बिजली और मोटर के बीच ‘भाग्य और विभाग’ की लड़ाई चलती रही, लेकिन जल विभाग ने हाथ खड़े कर दिए। प्राधिकरण की ओर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, न ही कोई अधिकारी मौके पर आया।
धर्मेन्द्र राठी ने कहा –
“हमसे मेंटेनेंस चार्ज पूरा लिया जाता है, लेकिन जब सेवा की बात आती है तो सब गायब हो जाते हैं। ये जनता को मूर्ख समझने की आदत बन गई है।”
बच्चों को बिना नहाए स्कूल भेजना – अभिभावकों का दर्द
सेक्टर के सैकड़ों परिवार ऐसे हालात में जी रहे हैं जहां
- न नहाने का पानी
- न बर्तन धोने का
- न टॉयलेट फ्लश करने का
- और न ही खाना बनाने का
स्थानीय निवासी भावना शर्मा कहती हैं –
“बेटी को बिना नहलाए स्कूल भेजा, शर्मिंदगी महसूस हो रही है। इतनी गर्मी में साफ-सफाई तो न्यूनतम जरूरत है। लेकिन अथॉरिटी शायद केवल टेंडर पास करने में व्यस्त है।”
भ्रष्टाचार बनाम सुविधा: ‘जो ज्यादा कमीशन दे, उसी को मिलता ठेका!’
सेक्टर म्यू 2 महासचिव दीपक ठाकुरका कहना है कि प्राधिकरण के ठेका सिस्टम में घोर भ्रष्टाचार है।
“यहां तो सीधा गणित है – जो ठेकेदार ज्यादा कमीशन दे, उसे ठेका मिल जाता है। क्वालिटी या स्थायित्व से किसी को लेना-देना नहीं,” – यह आरोप केवल जनता का नहीं, कई पूर्व पार्षद और क्षेत्रीय सामाजिक संगठनों द्वारा भी लगातार लगाया जाता रहा है।
“अब होगा जन-आंदोलन!” – जल संकट को लेकर नागरिक एकजुट
धर्मेन्द्र राठी ने घोषणा की है कि यदि आज रात तक पानी की सप्लाई बहाल नहीं होती है, तो कल सुबह 10 बजे से सेक्टर के सभी परिवार अपने बच्चों को लेकर प्राधिकरण कार्यालय पहुंचेंगे। वहां:
- बच्चे वहीं नहाएंगे
- खाना वहीं बनेगा
- महिलाएं प्राधिकरण कार्यालय परिसर में विरोध जताएंगी
- अधिकारी जवाब नहीं देंगे तो ताला जड़ा जाएगा
प्राधिकरण का रवैया – “कॉल मत करो, हम देख रहे हैं”
लोगों का आरोप है कि जल विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करना “मिशन मून” से कम नहीं।
- कॉल उठते नहीं
- जवाब मिलता है: “काम हो रहा है, देख रहे हैं।”
- मौके पर अधिकारी नहीं आते
मेंटेनेंस चार्ज पूरा, सुविधा आधी भी नहीं!
लोगों ने सवाल उठाया है कि जब हर महीने मेंटेनेंस के नाम पर हज़ारों रुपए लिए जाते हैं, तो बेसिक फैसिलिटी – पानी – तक क्यों नहीं मिल रही?
“यह तो सीधा उपभोक्ता अधिकारों का हनन है,” – वरिष्ठ नागरिक राजेश मिश्रा कहते हैं।
ग्रेटर नोएडा: स्मार्ट सिटी या जल संकट सिटी?
एक ओर सरकार स्मार्ट सिटी, ग्रीन एनर्जी और इंटीग्रेटेड इन्फ्रास्ट्रक्चर की बात करती है, वहीं दूसरी ओर राजधानी से सटे सेक्टर में दो दिन पानी न आना सोचनीय है।
- स्मार्ट सिटी का सपना
- ग्रीन बेल्ट और रेन वाटर हार्वेस्टिंग का दावा
- लेकिन असल में लोग बकेट और बोतलों से पानी भरने को मजबूर!
🛑 रफ़्तार टुडे की अपील: जवाब दो प्राधिकरण!
हमारी टीम ने प्राधिकरण से भी इस विषय पर जवाब लेने की कोशिश की, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई अधिकारिक बयान नहीं मिला। नागरिकों की मांग है कि:
- पानी की आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए
- ठेकेदार की जवाबदेही तय हो
- जनता को ब्रीफिंग दी जाए कि कब से पानी नियमित होगा
- भ्रष्टाचार पर जांच कर सख्त कार्रवाई हो
💬 हर घर की एक ही आवाज – “पानी दो या प्रदर्शन देखो!”
सैकड़ों घरों में आज रोटियां नहीं बनीं, बच्चे बिना नहाए स्कूल गए, बुजुर्गों ने दिनभर पसीना बहाया और महिलाएं पंखा लेकर टंकी की ओर ताकती रहीं।
अब इस संकट का अंत नहीं किया गया तो
प्रदर्शन होगा, और जोरदार होगा।
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