Noida Lotus Builder News : नोएडा सेक्टर-150 की ‘स्पोर्ट्स सिटी’ बना लूट सिटी!, लोटस ग्रीन बिल्डर और प्राधिकरण अधिकारियों पर गिरेगी गाज, ₹450 करोड़ के कर्ज घोटाले में होगी बड़ी कार्रवाई, स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट, सपना जो कभी पूरा नहीं हुआ, सीबीआई जांच की रफ्तार और अदालत की नजर, कर्ज गया कहां? न एस्क्रो अकाउंट में पैसा, न प्रोजेक्ट पर काम!

नोएडा, रफ़्तार टुडे। उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित रियल एस्टेट घोटालों में से एक नोएडा सेक्टर-150 की स्पोर्ट्स सिटी लूटकथा अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) शासनकाल में किए गए कथित भूमि आवंटन घोटाले की गूंज एक बार फिर तेज हो गई है।
नोएडा प्राधिकरण अब लोटस ग्रीन बिल्डर और अपने ही भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इस घोटाले में ₹450 करोड़ का लोन, शेल कंपनियों के जरिये जमीन की हेराफेरी, और प्राधिकरण की आंखों के सामने हुए अनियमित सौदों ने पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन सौ एकड़ की स्पोर्ट्स सिटी, पर बना भ्रष्टाचार का अड्डा
कहानी 2014 की है, जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने उस वक्त लोटस ग्रीन बिल्डर को सेक्टर-150 में लगभग 301 एकड़ भूमि आवंटित की थी।
कागजों पर इस भूमि का उद्देश्य था — एक आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी का विकास, जिसमें स्टेडियम, रेजिडेंशियल एरिया और मनोरंजन सुविधाएं बनाई जानी थीं।
लेकिन बिल्डर का असली इरादा कुछ और ही था।
जमीन मिलने के बाद उसने प्राधिकरण से भूमि को गिरवी रखने की अनुमति ली और उस अनुमति का उपयोग करते हुए बाहरी वित्तीय संस्थाओं से ₹450 करोड़ का भारी-भरकम कर्ज ले लिया।
कर्ज गया कहां? न एस्क्रो अकाउंट में पैसा, न प्रोजेक्ट पर काम!
नियमों के मुताबिक, बिल्डर को यह धनराशि एक एस्क्रो अकाउंट में जमा करनी थी ताकि इससे प्राधिकरण का बकाया चुकाया जा सके और प्रोजेक्ट पर विकास कार्य किया जा सके।
लेकिन जांच में यह बात सामने आई कि वह पैसा कहीं भी ट्रैक नहीं किया जा सका।
मामले की गंभीरता इस कदर है कि सीबीआई (CBI) तक इसकी जांच कर रही है।
अधिकारियों के शब्दों में, “अब तो नासा और इसरो के सैटेलाइट भी खोज नहीं पा रहे कि वह ₹450 करोड़ आखिर गया कहां!”
शेल कंपनियों की फेहरिस्त से उजागर हुआ बड़ा खेल
लोटस ग्रीन बिल्डर ने इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए दर्जनों शेल कंपनियां (Fake Entities) बनाई।
इन कंपनियों के नाम पर भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया। इस तरह प्राधिकरण और निवेशकों दोनों को धोखा देकर, बिल्डर ने जमीन के खंड-खंड कर बेचने और लोन एप्रूवल के लिए फर्जी डॉक्यूमेंटेशन का जाल बिछा दिया।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने जांच के बाद लोटस ग्रीन को ‘फ्रॉडulent Entity’ करार दिया है।
फिर भी बिल्डर अपनी बनाई डमी कंपनियों के सहारे इस भूमि की कानूनी जटिलताओं से निकलने में कामयाब होता दिखा।
प्राधिकरण जागा नींद से — अब होगी कड़ी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, अब नोएडा प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाने का निर्णय लिया है।
अपर मुख्य सचिव एवं प्राधिकरण अध्यक्ष दीपक कुमार ने अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि
जिन अधिकारियों ने बिल्डर को बिना उसकी वित्तीय हैसियत जांचे भूमि आवंटित की,
जिन्होंने गिरवी रखने की अनुमति दी,
या जिन्होंने फाइलों में हेराफेरी कर प्रक्रिया को दरकिनार किया,
उन सभी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाए।
बिल्डर की अनुमति रद्द करने की तैयारी
नोएडा प्राधिकरण लोटस ग्रीन को दी गई भूमि गिरवी रखने की अनुमति को भी रद्द करने पर विचार कर रहा है।
प्राधिकरण की जांच रिपोर्ट के अनुसार, बिल्डर ने न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन किया बल्कि ‘लैंड यूज़ पॉलिसी’ की भी खुली अवहेलना की।
अब यह भूमि पुनः प्राधिकरण के नियंत्रण में लाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट — सपना जो कभी पूरा नहीं हुआ
नोएडा सेक्टर-150 की यह स्पोर्ट्स सिटी नोएडा की शान बनने वाली थी।
योजना थी कि यहां विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं, स्पोर्ट्स एकेडमी और हाई-राइज़ अपार्टमेंट बनाए जाएंगे। लेकिन 10 साल बाद भी यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है।
बिल्डर की वित्तीय धोखाधड़ी, ऋण संकट और कानूनी विवादों ने इसे नोएडा के सबसे विवादास्पद प्रोजेक्ट्स में शामिल कर दिया है।
अधिकारियों की मिलीभगत पर सवाल
इस पूरे प्रकरण में नोएडा प्राधिकरण के कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि
कुछ अधिकारियों ने बिल्डर की पात्रता रिपोर्ट फर्जी तरीके से पास की,
कई फाइलें जानबूझकर दबाई गईं,
और कर्ज की निगरानी से जुड़ी शर्तें नजरअंदाज की गईं।
अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि ऐसे सभी अधिकारी “जनहित के खिलाफ काम करने के दोषी” हैं और उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सीबीआई जांच की रफ्तार और अदालत की नजर
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पहले ही इस मामले में सीबीआई को जांच के आदेश दिए थे।
सीबीआई ने बिल्डर की शेल कंपनियों और बैंकों से लिए गए लोन के ट्रेल की जांच शुरू कर दी है। अदालत ने टिप्पणी की थी कि “नोएडा जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग कर निजी कंपनियों ने जनता के विश्वास से खिलवाड़ किया है।” अब कोर्ट की निगरानी में यह मामला तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
जनता के पैसे पर बना भ्रष्टाचार का किला ढहेगा
यह मामला सिर्फ एक बिल्डर या प्रोजेक्ट का नहीं, बल्कि व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्ट गठजोड़ का प्रतीक है। नोएडा जैसे शहर में जहां हर इंच भूमि करोड़ों की होती है, वहां इस तरह की धांधलियों से
सरकार को अरबों का नुकसान और जनता के विश्वास को गहरा आघात पहुंचा है।
अब जब अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं, तो उम्मीद की जा रही है कि यह मामला आने वाले दिनों में नोएडा प्राधिकरण की साफ-सुथरी प्रशासनिक छवि बहाल करने का Turning Point साबित होगा।
अब बचना मुश्किल, जवाबदेही तय होगी
नोएडा सेक्टर-150 की यह कहानी सिर्फ एक स्पोर्ट्स सिटी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की सिटी का उदाहरण है।
लोटस ग्रीन बिल्डर और उसके सहयोगी अधिकारियों के खिलाफ जब वास्तविक कार्रवाई होगी, तब जाकर यह संदेश जाएगा कि अब “रिश्तों से नहीं, नियमों से चलेगा नोएडा।”



