Noida Authority News : “ठेला हटाओ, ट्रैफिक बचाओ!”, नोएडा में 18 इलाकों पर चला बुलडोज़र अभियान, सड़कें हुईं सांस लेने को आज़ाद, जाम की जड़ पर वार, प्रशासन का संदेश—सार्वजनिक स्थल, सबके लिए

नोएडा, 12 फरवरी 2026। जाम से जूझते नोएडा को राहत देने के लिए गुरुवार को नोएडा प्राधिकरण ने बड़ा अतिक्रमण-उन्मूलन अभियान चलाया। शहर की सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर अवैध रूप से जमे ठेले-पटरी, अस्थायी दुकानों और अन्य कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 18 प्रमुख स्थानों पर अतिक्रमण हटाया गया। उद्देश्य साफ था—नोएडा को जाम-मुक्त, सुव्यवस्थित और आम नागरिकों के लिए सुगम बनाना।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई वर्क सर्किल-1 से 10 के अंतर्गत की गई। सुबह से ही टीमों ने विभिन्न सेक्टरों और मार्गों पर पहुंचकर सड़क किनारे लगे अवैध ढांचे हटाने शुरू कर दिए। कई स्थानों पर यातायात बाधित हो रहा था, पैदल यात्रियों को चलने तक की जगह नहीं मिल रही थी। ऐसे में यह अभियान लोगों के लिए राहत लेकर आया।
इन 18 स्थानों पर हुई सख्त कार्रवाई
अभियान के तहत जिन क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाया गया, उनमें शामिल हैं—
सेक्टर-44, सेक्टर-45, सेक्टर-62, सेक्टर-66, सेक्टर-67, सेक्टर-68, सेक्टर-70, सेक्टर-121, एम.पी.-3 मार्ग, एफ.एन.जी. मार्ग, फेज-2, सेक्टर-80, सेक्टर-81, नगला चरणदास टी-प्वाइंट, केंट रोड सेक्टर-87, सेक्टर-108 का वाणिज्यिक भूखंड क्षेत्र, सेक्टर-135 और सेक्टर-150।
इन सभी जगहों पर सड़क किनारे खड़े अवैध ठेले, फेरी स्टॉल, टिन शेड और अस्थायी निर्माण हटाए गए। टीमों ने मौके पर मौजूद लोगों को समझाइश भी दी कि सार्वजनिक भूमि पर दोबारा कब्जा न करें, अन्यथा सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जाम की जड़ पर वार
नोएडा जैसे तेजी से विकसित होते शहर में सड़कें और सार्वजनिक स्थान पहले ही दबाव में हैं। ऐसे में जब फुटपाथों और सर्विस लेन पर अनधिकृत कब्जा हो जाता है, तो यातायात का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। विशेषकर सेक्टर-62, सेक्टर-135 और एफ.एन.जी. मार्ग जैसे व्यस्त इलाकों में लंबे समय से जाम की समस्या बनी हुई थी।
स्थानीय निवासियों और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई थी कि अनधिकृत वेन्डरों के कारण न केवल ट्रैफिक बाधित होता है, बल्कि सुरक्षा संबंधी खतरे भी उत्पन्न होते हैं। फोन कॉल, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और औद्योगिक संगठनों के माध्यम से मिली लगातार शिकायतों के बाद प्राधिकरण ने यह व्यापक अभियान चलाने का निर्णय लिया।
प्रशासन का संदेश—सार्वजनिक स्थल, सबके लिए
प्राधिकरण के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए नियमित रूप से अतिक्रमण-उन्मूलन अभियान चलाया जाएगा। यह एक बार की कार्रवाई नहीं, बल्कि निरंतर प्रक्रिया है।
अधिकारियों का कहना है कि “सार्वजनिक सड़कें और फुटपाथ आम नागरिकों की सुविधा के लिए होते हैं। यदि इन पर अवैध कब्जा हो जाता है, तो सबसे अधिक परेशानी आमजन को ही झेलनी पड़ती है। इसलिए शहर की व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती आवश्यक है।”
संतुलन की चुनौती
हालांकि, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर भावनात्मक दृश्य भी देखने को मिले। कुछ छोटे दुकानदारों और ठेला संचालकों ने अपनी आजीविका का हवाला दिया। प्रशासन ने उन्हें निर्धारित वेंडिंग ज़ोन में स्थानांतरित होने की सलाह दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में स्थायी समाधान के लिए संगठित वेंडिंग ज़ोन और बेहतर निगरानी तंत्र की आवश्यकता है, ताकि रोजगार और यातायात—दोनों के बीच संतुलन बना रहे।
नागरिकों से सहयोग की अपील
नोएडा प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण न करें और यदि कहीं अवैध कब्जा दिखाई दे तो उसकी सूचना संबंधित विभाग को दें। साथ ही, फुटपाथ और सर्विस लेन का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए करें।
प्राधिकरण का कहना है कि आने वाले दिनों में भी अलग-अलग सेक्टरों में इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। जिन स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां और अधिक सख्त कदम उठाए जा
जाम-मुक्त नोएडा की ओर एक कदम
12 फरवरी 2026 का यह अभियान नोएडा को व्यवस्थित और ट्रैफिक-फ्रेंडली शहर बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। सड़कों को “सांस लेने की आज़ादी” दिलाने की इस मुहिम से उम्मीद है कि शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और आम नागरिकों को राहत मिलेगी।
नोएडा, जो देश के प्रमुख औद्योगिक और आवासीय केंद्रों में शामिल है, वहां इस तरह की नियमित कार्रवाई ही स्थायी समाधान की राह खोल सकती है। फिलहाल, प्रशासन का संदेश साफ है—
“सड़कें सबकी हैं, कब्जा किसी का नहीं।”



