Breaking News : अब बीमारी नहीं बनेगी जेब पर बोझ!, निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी मिली कैशलेस इलाज की बड़ी सौगात, MLC श्रीचंद शर्मा ने बताया ‘शिक्षक हितों में ऐतिहासिक फैसला’, शिक्षकों के लिए ढाल बनेगी कैशलेस स्वास्थ्य, सरकार उठाएगी 400 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च

ग्रेटर नोएडा/लखनऊ, रफ़्तार टुडे। प्रदेश सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े लाखों लोगों के लिए एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। अब तक केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाते हुए सरकार ने निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा के अंतर्गत शामिल कर लिया है। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों शिक्षक, शिक्षामित्र और शिक्षा से जुड़े अन्य कार्मिकों को बड़ी राहत मिली है।
इस महत्वपूर्ण और जनहितकारी फैसले को लेकर एमएलसी शिक्षक श्रीचंद शर्मा ने एक पत्रकार वार्ता का आयोजन कर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न सिर्फ शिक्षकों के सम्मान को बढ़ाने वाला है, बल्कि उन्हें मानसिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाला भी है।
शिक्षकों के लिए ढाल बनेगी कैशलेस स्वास्थ्य योजनाएमएलसी श्रीचंद शर्मा ने कहा कि अब किसी शिक्षक को गंभीर बीमारी, दुर्घटना या आपात स्थिति में इलाज के लिए अपनी जमा-पूंजी बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।उन्होंने कहा—“शिक्षक समाज लंबे समय से इस सुविधा की मांग कर रहा था। आज सरकार ने उस मांग को पूरा कर यह साबित कर दिया है कि शिक्षा जगत सरकार की प्राथमिकता में है।”उनका कहना था कि यह योजना शिक्षकों को निश्चिंत होकर अपने दायित्व निभाने का अवसर देगी, जिससे शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
सरकारी ही नहीं, निजी शिक्षकों को भी बराबरी का अधिकार
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अब निजी स्कूलों (स्ववित्तपोषित/वित्तविहीन) में कार्यरत शिक्षक भी शामिल किए गए हैं।
एमएलसी चंद शर्मा ने जानकारी दी कि योजना के दायरे में—
बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक
माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक
अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय
मान्यता प्राप्त निजी स्कूल
शिक्षामित्र
विशेष शिक्षक (CWSN)
अनुदेशक
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की वार्डेन
पूर्णकालिक एवं अंशकालिक शिक्षक/शिक्षिकाएं
प्रधानमंत्री पोषण योजना की रसोईया
एवं इनके आश्रित परिवार के सदस्य
सभी को शामिल किया गया है।
सरकार उठाएगी 400 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च
एमएलसी श्रीचंद शर्मा ने बताया कि इस योजना के तहत प्रति कार्मिक लगभग 3000 रुपये वार्षिक प्रीमियम के आधार पर करीब 15 लाख लाभार्थियों को कवर किया जाएगा।
इस पर कुल मिलाकर लगभग 400 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय आएगा, जिसे पूरी तरह प्रदेश सरकार वहन करेगी।
उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि सरकार सिर्फ घोषणाएं नहीं कर रही, बल्कि ठोस आर्थिक प्रतिबद्धता के साथ योजनाओं को लागू कर रही है।
राजकीय ही नहीं, निजी अस्पतालों में भी मिलेगा कैशलेस इलाज
इस योजना का संचालन State Agency for Comprehensive Health and Integrated Services (SACHIS) के माध्यम से किया जाएगा।
योजना के तहत राजकीय अस्पताल,
साचीज से संबद्ध निजी अस्पताल,
दोनों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी।
इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप होंगी।
इससे शिक्षकों को इलाज के लिए सीमित विकल्पों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
भाजपा नेताओं और शिक्षक संगठनों ने जताया आभार
पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा और शिक्षक संगठनों की व्यापक मौजूदगी देखने को मिली।
मुख्य रूप से उपस्थित रहे।।भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, राहुल पंडित (जिला उपाध्यक्ष, भाजपा), कर्मवीर आर्य (जिला मीडिया प्रभारी), वीरेंद्र भाटी, धर्मेंद्र शर्मा, आर पी शर्मा, संदीप भाटी, विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी
दर्जनों शिक्षक एवं कार्यकर्ता सभी ने एक स्वर में मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापन दिया और इस निर्णय को शिक्षा जगत के लिए मील का पत्थर बताया।
शिक्षा जगत में खुशी की लहर
इस फैसले के बाद सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। वर्षों से निजी स्कूलों के शिक्षक खुद को सरकारी सुविधाओं से वंचित महसूस करते थे, लेकिन अब उन्हें भी समान अधिकार मिला है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह कदम शिक्षक सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक समानता की दिशा में बड़ा सुधार है।
‘यह सिर्फ योजना नहीं, सम्मान की गारंटी है’
पत्रकार वार्ता के समापन पर एमएलसी श्रीचंद शर्मा ने कहा—
“यह योजना सिर्फ एक स्वास्थ्य सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षक के सम्मान, आत्मसम्मान और सुरक्षा की गारंटी है। मुख्यमंत्री का यह निर्णय शिक्षा जगत को नई ऊर्जा देगा।”
उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगे भी शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से उठाया जाता रहेगा।



