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Breaking News : “सिग्नेचर विला का खेल या बड़ा घोटाला?, 35 बीघा में अवैध कॉलोनी के आरोप, ऑथोरिटी व प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!”, “सीएम से लेकर डीएम तक शिकायत, जांच की उठी, “न ले-आउट पास, न भूमि उपयोग परिवर्तन—फिर भी सैकड़ों रजिस्ट्रियां!”, “अवैध पुलिया से तैयार किया गया रास्ता?”, “प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल—क्या पहले से थी जानकारी?”, “अब क्या होगा? बुलडोज़र या फिर फाइलों में दब जाएगा मामला?”

“अब क्या होगा? बुलडोज़र या फिर फाइलों में दब जाएगा मामला?”

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां “सिग्नेचर विला” नाम से चल रहे एक प्रोजेक्ट पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और अवैध निर्माण के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि उन सैकड़ों लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है, जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई इस प्रोजेक्ट में लगा दी है।

“सीएम से लेकर डीएम तक शिकायत, जांच की उठी मांग”मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ और जिलाधिकारी को पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, फिर भी जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।अब बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या प्रशासन को इस पूरे मामले की पहले से जानकारी थी? अगर हां, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

“ग्राम चिपयाना बुजुर्ग में 35 बीघा पर ‘अवैध कॉलोनी’ का आरोप”

जानकारी के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के दादरी क्षेत्र के ग्राम चिपयाना बुजुर्ग में करीब 35 बीघा कृषि भूमि पर इस कथित कॉलोनी को विकसित किया जा रहा है।“Signature Villas, West SKS World School” के पास स्थित इस प्रोजेक्ट में बिना किसी वैध अनुमति के विला, प्लॉट और कमर्शियल यूनिट्स की बिक्री किए जाने का आरोप है।

“न ले-आउट पास, न भूमि उपयोग परिवर्तन—फिर भी सैकड़ों रजिस्ट्रियां!”
शिकायतकर्ता के दावों के अनुसार इस प्रोजेक्ट में कई बुनियादी नियमों की अनदेखी की गई है, जैसे:
ले-आउट प्लान की कोई स्वीकृति नहीं
कृषि भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन नहीं कराया गया
बुनियादी सुविधाओं (सड़क, पानी, सीवर, बिजली) की कोई ठोस व्यवस्था नहीं
इन सबके बावजूद यहां सैकड़ों रजिस्ट्रियां कराई जा चुकी हैं, जिससे आम लोगों की मेहनत की कमाई जोखिम में पड़ती नजर आ रही है।


“न अनुमति, न सुविधाएं—फिर भी धड़ल्ले से बिक्री!”
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बिना किसी वैधानिक अनुमति के इस प्रोजेक्ट में संपत्तियों की बिक्री लगातार जारी है। आरोप है कि लोगों को आकर्षक वादों और बेहतर रिटर्न का लालच देकर निवेश कराया जा रहा है।
यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में खरीदारों के लिए गंभीर कानूनी और आर्थिक संकट भी पैदा कर सकती है।

Signature Villa converted
सिग्नेचर विला का खेल या बड़ा घोटाला?, 35 बीघा में अवैध कॉलोनी के आरोप, ऑथोरिटी व प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!


“अवैध पुलिया से तैयार किया गया रास्ता?”
मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। आरोप है कि कॉलोनी तक पहुंचने के लिए शांति नाले पर बिना किसी अनुमति के पुलिया का निर्माण कर दिया गया है।
यदि प्रशासन इस अवैध निर्माण को हटाता है, तो पूरी कॉलोनी का संपर्क बाधित हो सकता है, जिससे वहां रह रहे या निवेश कर चुके लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

“प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल—क्या पहले से थी जानकारी?”
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि यह प्रोजेक्ट प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
क्या अधिकारियों को इस अवैध निर्माण की जानकारी पहले से थी? अगर हां, तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई? ये सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुके हैं।


“अब क्या होगा? बुलडोज़र या फिर फाइलों में दब जाएगा मामला?”
शिकायत दर्ज होने के बाद अब सबकी नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
क्या इस कथित अवैध कॉलोनी पर बुलडोज़र चलेगा?
या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?


सबसे बड़ा सवाल—क्या सुरक्षित है जनता का पैसा?”
“सिग्नेचर विला” विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रियल एस्टेट में निवेश करने वाले आम लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित है?
जब बिना अनुमति और नियमों के खिलाफ प्रोजेक्ट्स खुलेआम चल रहे हों, तो जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी हो जाता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करता है—क्योंकि यहां केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों का भविष्य दांव पर लगा है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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