Noida Sports City News : “स्पोर्ट्स सिटी बनी ‘साइलेंट सिटी’!, नोएडा प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई, सेक्टर-152 के एटीएस होम्स प्रोजेक्ट पर गिरी गाज, नियम उल्लंघन, अधूरे निर्माण, कोर्ट आदेशों के बीच कंपनी को थमाया नोटिस”, स्पोर्ट्स सिटी की ‘खेल’ परियोजना में हुआ नियमों का खेल!, उच्च न्यायालय के आदेशों की पृष्ठभूमि में चली कार्रवाई

नोएडा, रफ़्तार टुडे। नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-152 की बहुचर्चित स्पोर्ट्स सिटी परियोजना (भूखण्ड संख्या एससी-01) में बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। यह वही परियोजना है जिसे M/s ATS Homes Pvt. Ltd. (Consortium) को 16 जुलाई 2015 को आवंटित किया गया था, लेकिन अब यह प्रोजेक्ट “स्पोर्ट्स सिटी” से ज्यादा “साइलेंट सिटी” बन चुकी है।
प्राधिकरण के अधिकारियों ने निरीक्षण के बाद पाया कि परियोजना में पट्टा शर्तों का खुला उल्लंघन, निर्माण कार्य की अपूर्णता और बकाया देयों का भुगतान न होने जैसी गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
10 उप-भूखण्डों में बंटा था प्रोजेक्ट, पर अधूरा रह गया सपना
यह परियोजना 10 उप-भूखण्डों में विभाजित की गई थी, जिनमें से 4 उप-भूखण्डों पर आवासीय टावर और 4 पर वाणिज्यिक कॉम्प्लेक्स बनने थे। लेकिन 10 साल बीत जाने के बाद भी निर्माण अधूरा है।
पट्टा की शर्तों के अनुसार, कंपनी को 5 वर्षों के भीतर खेल सुविधाओं का निर्माण और 7 वर्षों (29 दिसंबर 2022 तक) के भीतर आवासीय/वाणिज्यिक निर्माण पूरा कर अधिभोग प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate) लेना था। लेकिन 2025 में भी जमीन पर हकीकत यह है कि न खेल सुविधाएं तैयार हैं, न टावर पूरे।
4 नवंबर को हुआ निरीक्षण, खुली बड़ी लापरवाही
नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल विभाग ने 4 नवंबर 2025 को जब मौके पर निरीक्षण किया, तो पाया कि न केवल निर्माण कार्य अधूरा है बल्कि कई जगहों पर मानचित्र के अनुरूप निर्माण हुआ ही नहीं।
ग्रीन एरिया, पार्किंग जोन और स्पोर्ट्स एरिया — ये सब केवल ब्लूप्रिंट पर बने सपने रह गए।
अधिकारियों ने यह भी पाया कि कंपनी ने बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद देय भुगतान नहीं किया और न ही परियोजना की प्रगति रिपोर्ट सौंपी।
उच्च न्यायालय के आदेशों की पृष्ठभूमि में चली कार्रवाई
यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि न्यायिक भी है।
प्राधिकरण ने बताया कि यह कार्रवाई मा. उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट ने पहले भी स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिन बिल्डरों ने पट्टा शर्तों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ATS Homes Pvt. Ltd. पर यह कार्रवाई इसी कानूनी आदेश की श्रृंखला में की गई है।
प्राधिकरण ने कहा — नियम तोड़ने वालों पर ‘नो मर्सी पॉलिसी’
नोएडा प्राधिकरण ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि “नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति” लागू है।
अधिकारियों ने कहा कि स्पोर्ट्स सिटी जैसी परियोजनाएं जनता की आस्था और निवेश से जुड़ी हैं, इसलिए यदि कोई डेवलपर अनुबंध शर्तों का पालन नहीं करता, तो उसे नोटिस देना और कानूनी कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो पट्टा निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
‘देयता भुगतान’ बना सबसे बड़ा सिरदर्द
प्राधिकरण के अनुसार, ATS समूह ने न केवल निर्माण में लापरवाही बरती, बल्कि वित्तीय देयों का भी भुगतान नहीं किया।
बार-बार रिमाइंडर और नोटिस भेजे गए, लेकिन कंपनी ने भुगतान नहीं किया। इस वजह से अब प्राधिकरण ने सख्ती बढ़ाते हुए राजस्व रिकवरी और कानूनी कार्यवाही शुरू करने के संकेत दिए हैं।

ग्रीन कवरेज पर भी सवाल — पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के तहत हर उप-भूखण्ड में एक निश्चित प्रतिशत क्षेत्र ग्रीन कवरेज के लिए आरक्षित था।
मगर निरीक्षण में पाया गया कि वहाँ हरित क्षेत्र की जगह अब तक खाली पड़ी ज़मीन है। इससे न केवल पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन हुआ, बल्कि स्पोर्ट्स सिटी की मूल अवधारणा — ‘खेल और हरियाली का संतुलन’ — भी धूमिल हो गई।
निवेशकों और खरीदारों में बढ़ी चिंता
इस कार्रवाई के बाद सेक्टर-152 और आसपास के रियल एस्टेट निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।
कई लोगों ने ATS के अधूरे प्रोजेक्ट्स में निवेश किया था, लेकिन अब उन्हें डर है कि अगर प्राधिकरण ने पट्टा निरस्त किया तो उनका पैसा और फ्लैट दोनों ही अधर में लटक सकते हैं।
कुछ खरीदारों ने यह मांग की है कि प्राधिकरण एक ‘रेस्क्यू प्लान’ बनाए ताकि निवेशकों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।
स्पोर्ट्स सिटी से ‘स्पोर्ट्स’ गायब — सवालों के घेरे में परियोजना
स्पोर्ट्स सिटी का सपना नोएडा की सबसे हाई-प्रोफाइल परियोजनाओं में से एक था।
यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं, क्रिकेट मैदान, जिम, और स्विमिंग कॉम्प्लेक्स बनने थे, ताकि नोएडा को एक नया स्पोर्ट्स हब बनाया जा सके।
मगर आज यह सपना अधूरा है। अधूरे निर्माण और ठप प्रोजेक्ट्स के कारण अब यह जगह “स्पोर्ट्स सिटी” नहीं बल्कि “स्पोर्ट्स साइट” बन गई है।
प्राधिकरण की सख्त चेतावनी — सुधार करो या बाहर निकलो
अंत में नोएडा प्राधिकरण ने यह स्पष्ट कहा है कि जो भी डेवलपर या कंसोर्टियम परियोजना की शर्तों का पालन नहीं करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
ATS Homes Pvt. Ltd. और उसके पार्टनर ग्रुप्स को नोटिस भेजकर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
अगर कंपनी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो प्राधिकरण पट्टा निरस्तीकरण, जप्ती और कानूनी कार्रवाई जैसे विकल्पों पर आगे बढ़ेगा।
जनता की उम्मीद — “अब किसी को कानून से बड़ा न समझा जाए”
नोएडा के स्थानीय निवासियों ने प्राधिकरण की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि वर्षों से ऐसी परियोजनाओं में लोगों का पैसा फंसा हुआ है। अगर अब सख्त कार्रवाई शुरू हुई है, तो यह खरीदारों के लिए उम्मीद की नई किरण है।



