शिक्षागौतमबुद्ध नगरग्रेटर नोएडा

Breaking News : फर्जी एडमिशन और फीस घोटाले का खुलासा, विश्वेश्वरैया ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स के मालिक समेत नौ पर केस दर्ज, छात्रों से लाखों रुपये ऐंठने का आरोप, दादरी में शिक्षा जगत में बड़ा झटका, छात्रों से ठगी के आरोप में विश्वेश्वरैया ग्रुप के खिलाफ FIR, पुलिस जांच में कई खुलासे, लंबे समय से चल रहा था विवाद,शिक्षा जगत में हड़कंप — “न्याय चाहिए छात्रों को”

दादरी, रफ़्तार टुडे। गौतमबुद्ध नगर जिले के दादरी क्षेत्र में स्थित विश्वेश्वरैया ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स (VGI) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला शिक्षा या उपलब्धि का नहीं, बल्कि फर्जी प्रवेश, फीस घोटाले और छात्रों से ठगी का है। दादरी पुलिस ने संस्थान के मालिक समेत नौ लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

छात्रों से ली लाखों की फीस, न कोर्स में दाखिला, न परीक्षा

शिकायत के अनुसार, संस्थान में बीफार्मा (B.Pharma) कोर्स में प्रवेश लेने वाले 120 छात्रों से एडमिशन और परीक्षा के नाम पर लाखों रुपये वसूले गए, लेकिन उन्हें कोर्स में विधिवत नामांकन नहीं दिया गया। छात्रों ने जब परीक्षा देने की कोशिश की तो उन्हें रोक दिया गया। इस पर कई अभ्यर्थियों ने दादरी थाने में शिकायत दर्ज कराई।

कॉलेज प्रबंधन पर लगे गंभीर आरोप

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन ने छात्रों से फीस वसूलने के बाद फर्जी प्रवेश फॉर्म भराए, जबकि तकनीकी विश्वविद्यालय (AKTU) में इन छात्रों का किसी प्रकार का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया था। इसके बावजूद संस्थान ने फीस के रसीदें दीं और छात्रों को यह विश्वास दिलाया कि उनका एडमिशन पक्का हो गया है। लेकिन परीक्षा के समय छात्रों को परीक्षा फॉर्म भरने से रोक दिया गया।

फीस ली, एडमिशन नहीं दिया” — एसपी सिटी बोले, जांच में दोषियों पर कार्रवाई होगी

दादरी पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध मिले हैं। पुलिस के अनुसार, “संस्थान ने छात्रों से कोर्स फीस ली लेकिन उन्हें परीक्षा में शामिल नहीं किया गया। इससे न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।” अब पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, और संबंधित दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं।

कॉलेज के भीतर के लोगों ने भी उजागर की गड़बड़ियां

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉलेज के ही एक वरिष्ठ कर्मचारी एके शाह ने बताया कि उन्होंने संस्थान की कई गतिविधियों पर सवाल उठाए थे। शाह ने कहा “मैं हेड-ट्रेनिंग, पीआर और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के पद पर कार्यरत था। जब मुझे इस तरह की गड़बड़ियों की जानकारी मिली, तो मैंने प्रबंधन को अवगत कराया। बाद में मुझे इस्तीफा देना पड़ा।”

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन छात्रों की शिकायतें सुनने की बजाय शिकायतकर्ताओं को धमकाने और दबाव बनाने का काम कर रहा था।

किन लोगों पर दर्ज हुआ केस

पुलिस ने इस मामले में संस्थान के मालिक रंजीत मोदी, निदेशक विक्रम सिंह, प्रबंधक मनोज पाटेक, सीबी सिंह, एके शाह, मीडिया प्रभारी एके शाही, सुप्रिया सिंह, सीईओ कौशिक सिंह और रजिस्ट्रार अमित शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन सभी पर धोखाधड़ी, विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज हुआ है।

पुलिस जुटी सबूतों की तलाश में, जब्त होंगे रिकॉर्ड

दादरी थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस ने छात्रों की फीस रसीदें, एडमिशन फॉर्म और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन डाटा की जांच शुरू कर दी है। “अगर यह साबित हो गया कि संस्थान ने फर्जी प्रवेश लिए, तो न केवल कॉलेज प्रबंधन पर कार्रवाई होगी बल्कि संस्थान की मान्यता भी रद्द करने की सिफारिश की जाएगी,” पुलिस अधिकारी ने कहा।

लंबे समय से चल रहा था विवाद

सूत्रों के अनुसार, संस्थान में एडमिशन प्रक्रिया को लेकर पिछले दो साल से शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन अब जाकर यह मामला पुलिस के स्तर तक पहुंचा है। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को उठाया था। छात्रों ने कहा कि उन्होंने 50,000 से 1 लाख रुपये तक फीस दी थी, लेकिन उन्हें परीक्षा से पहले ही रोक दिया गया।

शिक्षा जगत में हड़कंप — “न्याय चाहिए छात्रों को”

इस मामले के सामने आने के बाद दादरी और ग्रेटर नोएडा के शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि “दोषी संस्थान और उसके पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई अन्य संस्था छात्रों के साथ ऐसा छल न कर सके।”

छात्रों का कहना — “हमारा एक साल बर्बाद कर दिया गया”

एक पीड़ित छात्र ने बताया “हमने संस्थान पर भरोसा किया, फीस जमा की, कक्षाएं लीं, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले बताया गया कि हमारा नाम यूनिवर्सिटी लिस्ट में नहीं है। अब हम न किसी और कॉलेज में एडमिशन ले पा रहे हैं, न फीस वापस मिल रही है।”

पारदर्शिता पर सवाल और शिक्षा में सुधार की मांग

विश्वेश्वरैया ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स पर दर्ज यह मुकदमा शिक्षा क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिकता और छात्रों के साथ हो रही ठगी का एक गंभीर उदाहरण बन गया है।
यह घटना बताती है कि प्रशासन को शिक्षा संस्थानों की नियमित मॉनिटरिंग और अकादमिक ट्रांसपेरेंसी पर और सख्ती से ध्यान देना होगा, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके।

120 छात्रों से बीफार्मा कोर्स के नाम पर ली गई लाखों की फीस

एडमिशन और परीक्षा फॉर्म फर्जी पाए गए

मालिक व प्रबंधन के नौ लोगों पर मुकदमा दर्ज

पुलिस जांच में जुटी, रिकॉर्ड जब्त करने की तैयारी

छात्रों का एक साल हुआ बर्बाद, फीस वापसी की मांग

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Raftar Today
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