Greater Noida Authority News : “अब जमीन पर नजर आसमान से!”, ग्रेटर नोएडा बना एआई-सैटेलाइट आधारित अतिक्रमण मॉनिटरिंग शुरू करने वाला देश का पहला प्राधिकरण, एआई और सैटेलाइट से होगी निगरानी, डेटा-ड्रिवन और प्रैक्टिव प्रवर्तन व्यवस्था, परियोजना का क्रियान्वयन मुख्य कार्यपालक अधिकारी NG Ravi Kumar के निर्देशन में किया जा रहा है
मुख्य कार्यपालक अधिकारी Sumit Yadav ने कहा कि एआई और उपग्रह आधारित मॉनिटरिंग से अतिक्रमण रोकथाम और कार्रवाई की क्षमता कई गुना बढ़ेगी।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA) ने Indian Space Research Organisation के अधीन कार्यरत National Remote Sensing Centre (NRSC) के साथ मिलकर एआई आधारित अतिक्रमण मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की पहल की है।
दिल्ली में बृहस्पतिवार को दोनों संस्थाओं के बीच औपचारिक रूप से एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल के साथ ग्रेटर नोएडा देश का पहला विकास प्राधिकरण बन गया है, जिसने अतिक्रमण की पहचान और नियंत्रण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उच्च-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी को एकीकृत करने का निर्णय लिया है।
एआई और सैटेलाइट से होगी निगरानी
यह प्रणाली उपग्रह चित्रों के माध्यम से भूमि की निगरानी करेगी और एआई मॉडल की सहायता से संभावित अतिक्रमण की पहचान, विश्लेषण और रिपोर्टिंग करेगी।
जीआईएस आधारित विज़ुअल एनालिसिस, रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम और डेटा-आधारित निर्णय लेने की सुविधा से प्राधिकरण को समयबद्ध और सटीक जानकारी मिल सकेगी।
एमओयू के तहत एनआरएससी एआई मॉडल, मॉनिटरिंग डैशबोर्ड और अलर्ट सिस्टम विकसित करेगा। साथ ही दीर्घकालिक कार्यान्वयन के लिए जीएनआईडीए को प्रशिक्षण और तकनीकी हस्तांतरण भी प्रदान किया जाएगा।
टेक-इनेबल्ड गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम
इस
उन्होंने कहा, “यह पहल टेक-इनेबल्ड गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसरो के सहयोग से भूमि संरक्षण और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता, सटीकता और जवाबदेही आएगी।”
डेटा-ड्रिवन और प्रैक्टिव प्रवर्तन व्यवस्था
परियोजना का नेतृत्व कर रहे अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी Sumit Yadav ने कहा कि एआई और उपग्रह आधारित मॉनिटरिंग से अतिक्रमण रोकथाम और कार्रवाई की क्षमता कई गुना बढ़ेगी।
उन्होंने इसे स्मार्ट, डेटा-ड्रिवन और प्रैक्टिव प्रवर्तन व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में अहम कदम बताया।
एमओयू साइनिंग के दौरान जीएम प्रोजेक्ट ए.के. सिंह और मैनेजर अभिषेक पाल भी उपस्थित रहे।
भूमि प्रबंधन में नई पारदर्शिता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भूमि प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाएगी। अक्सर अतिक्रमण की पहचान में समय लगता है, जिससे कानूनी और प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ती हैं।
अब एआई आधारित प्रणाली संभावित अतिक्रमण की शुरुआती अवस्था में ही पहचान कर अलर्ट जारी कर सकेगी, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
देश के लिए मॉडल बन सकता है ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा की यह पहल अन्य विकास प्राधिकरणों और शहरी निकायों के लिए एक मॉडल बन सकती है। यदि यह प्रणाली सफल रहती है, तो भविष्य में देश के अन्य शहरों में भी इसी प्रकार की टेक्नोलॉजी अपनाई जा सकती है।
टेक्नोलॉजी और प्रशासन के समन्वय का यह उदाहरण स्मार्ट सिटी और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में मजबूत कदम माना जा रहा है।



