गौतमबुद्ध नगरTrading Newsताजातरीनशिक्षा

GBU University News : “क़ानून के आगे भी अड़ियल रवैया?”, हाईकोर्ट के आदेश के तीन दिन बाद भी गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार की एंट्री बंद, वीसी पर गंभीर सवाल, अदालत का आदेश, फिर भी बंद दरवाज़े

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। देश की न्याय व्यवस्था पर आम आदमी का भरोसा इसी सोच पर टिका है कि अदालत का आदेश सर्वोपरि होता है, लेकिन अगर वही आदेश किसी विश्वविद्यालय के शीर्ष पद पर बैठे अधिकारी को भी स्वीकार न हो, तो यह सिर्फ अवमानना नहीं बल्कि संवैधानिक व्यवस्था को खुली चुनौती बन जाता है।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) में इन दिनों कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह द्वारा रजिस्ट्रार को ज्वाइन नहीं कराया जा रहा।
हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी सौंपे जाने के तीन दिन बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि यह मामला अब कानूनी अवमानना और संभावित कागजी हेराफेरी तक पहुंचता दिख रहा है।


अदालत का आदेश, फिर भी बंद दरवाज़े
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा था कि रजिस्ट्रार विश्वास त्रिपाठी को तत्काल ज्वाइन कराया जाए और उन्हें किसी भी तरह से परेशान न किया जाए।
आदेश के अनुपालन में विश्वास त्रिपाठी विश्वविद्यालय पहुंचे, कुलपति से मुलाकात की, उन्हें कोर्ट का आदेश भी सौंपा, लेकिन इसके बावजूद— रजिस्ट्रार कार्यालय पर ताला लटका रहा
उन्हें कार्यभार संभालने नहीं दिया गया
तीन दिनों तक उन्हें लगातार इंतज़ार कराया गया
यह रवैया इस सवाल को जन्म देता है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन स्वयं को न्यायालय से ऊपर मान रहा है?

“काग़ज़ों में खेल हो रहा है?” – रजिस्ट्रार की गंभीर आशंका
रजिस्ट्रार विश्वास त्रिपाठी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बेहद गंभीर आशंका जताई है। उनका कहना है कि—
“जब हाईकोर्ट का आदेश आ चुका है, उसके बावजूद मुझे ज्वाइन नहीं कराया जा रहा। इस दौरान किसी अन्य व्यक्ति को रजिस्ट्रार की कुर्सी पर बैठाकर काग़ज़ों पर मनमाने हस्ताक्षर कराए जा सकते हैं।”
यह बयान केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि संस्थागत पारदर्शिता पर सीधा आरोप है। यदि इस अवधि में कोई प्रशासनिक या वित्तीय निर्णय लिए गए, तो उनकी वैधता भी सवालों के घेरे में आ सकती है।


क्या है पूरा मामला: भर्ती, फर्जीवाड़ा और लोकायुक्त की एंट्री
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय लंबे समय से विवादों में रहा है। मामला तब गंभीर हुआ जब— विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर भर्तियों में गड़बड़ी
फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए
इन शिकायतों पर लोकायुक्त ने संज्ञान लिया और जवाब तलब किया
इसी दौरान कुलपति प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह ने कार्रवाई करते हुए रजिस्ट्रार विश्वास त्रिपाठी को पद से हटा दिया।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, VC की कार्रवाई रद्द
कुलपति के इस आदेश को विश्वास त्रिपाठी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।
लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने—
VC की कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिया
रजिस्ट्रार को हटाने का आदेश निरस्त कर दिया
साफ निर्देश दिया कि विश्वास त्रिपाठी को तुरंत ज्वाइन कराया जाए
और उन्हें किसी भी प्रकार से प्रताड़ित न किया जाए
इसके बावजूद आदेश का पालन न होना अब मामले को और गंभीर बना रहा है।


संवैधानिक संस्थान बनाम व्यक्तिगत हठ?
यह सवाल अब विश्वविद्यालय की चारदीवारी से निकलकर शासन-प्रशासन तक पहुंचने लगा है कि—
क्या किसी कुलपति को अदालत के आदेश की अवहेलना का अधिकार है?
क्या यह रवैया विश्वविद्यालय की साख को नुकसान नहीं पहुंचा रहा?
अगर हाईकोर्ट के आदेश को भी ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है, तो आम कर्मचारी की सुरक्षा क्या है?
शिक्षाविदों और कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला सीधे-सीधे कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है।

फिर हाईकोर्ट जाने की तैयारी
रजिस्ट्रार विश्वास त्रिपाठी ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द ही उन्हें ज्वाइन नहीं कराया गया, तो वे— दोबारा इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे
VC के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल करेंगे
यह मामला अब केवल एक पद या व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून के शासन (Rule of Law) की कसौटी बन चुका है।


नज़रें शासन और न्यायपालिका पर
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में चल रहा यह टकराव यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या शैक्षणिक संस्थान अब सत्ता और हठधर्मिता के अखाड़े बनते जा रहे हैं?
अब देखना यह होगा कि शासन, उच्च शिक्षा विभाग और न्यायपालिका इस खुले अवमानना जैसे मामले पर कितनी सख्ती दिखाते हैं, या फिर कानून का आदेश काग़ज़ों तक ही सीमित रह जाएगा।
फिलहाल, विश्वविद्यालय में सन्नाटा है, लेकिन इस सन्नाटे के पीछे कानूनी तूफ़ान साफ़ महसूस किया जा सकता है।

Raftar Today
Raftar Today

Related Articles

Back to top button