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NPCL News : 1 करोड़ 76 लाख का बिजली बिल बना सिरदर्द!, इस सोसाइटी में एनपीसीएल ने काटा कनेक्शन, सोसाइटी में हाहाकार, बिल समय पर देने वाले रेजिडेंट्स बोले – ‘सज़ा क्यों भुगतें हम?’


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
सुपरटेक इकोविलेज-1 सोसाइटी में सोमवार को बिजली गुल हो गई। कोई ट्रिपिंग नहीं थी, कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि इस बार वजह थी 1 करोड़ 76 लाख रुपये का बकाया बिजली बिल, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज करता चला आ रहा था सोसाइटी का प्रबंधन। अंततः एनपीसीएल (Noida Power Company Limited) ने सख्ती दिखाते हुए सोसाइटी का बिजली कनेक्शन काट दिया। इसके बाद सोसाइटी में हजारों निवासी गर्मी में बेहाल हो गए, और गुस्से में अपना आक्रोश जताने लगे।


लाखों की बकाया राशि, लेकिन जिम्मेदार कौन?

एनपीसीएल के अनुसार, सुपरटेक इकोविलेज-1 पर ₹1,76,00,000 (एक करोड़ 76 लाख) से ज्यादा की बकाया राशि थी। बीते कई महीनों में कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन कोई भुगतान नहीं हुआ। आखिरकार, कंपनी ने आखिरी चेतावनी के बाद सोमवार को बिजली का कनेक्शन काट दिया।

रेजिडेंट्स का कहना है कि वे तो हर महीने नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करते हैं, लेकिन सोसाइटी प्रबंधन ने एनपीसीएल को पैसे ट्रांसफर नहीं किए। ऐसे में बिजली काटकर प्रशासन ने निर्दोष लोगों को सज़ा दी है।


बिजली गुल होते ही लोगों का सब्र टूटा – बच्चों, बुज़ुर्गों और मरीजों को हुआ भारी कष्ट

सोमवार की दोपहर बिजली कटने के बाद फ्लैट्स में लिफ्ट बंद हो गईं, इनवर्टर जवाब देने लगे, RO बंद हुए, फ्रिज ठप पड़ गए और सबसे ज़्यादा परेशानी हुई बच्चों, बुज़ुर्गों और मरीजों को।

एक निवासी नीलिमा भटनागर ने कहा, “हम हर महीने बिल भरते हैं, फिर भी इस अंधेरे की सज़ा हमें क्यों? हमारी बच्ची की तबीयत खराब है, उसे बार-बार भाप देनी पड़ती है, लेकिन बिजली ही नहीं है। हम क्या करें?”


रेजिडेंट्स बोले – प्रबंधन की लापरवाही की सज़ा हमें क्यों मिले?

सोसाइटी के कई निवासियों ने प्रबंधन के खिलाफ नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि यदि बिजली बिल जमा नहीं हुआ तो यह मैनेजमेंट की जिम्मेदारी है। जब रेजिडेंट्स समय पर भुगतान कर रहे हैं, तो सवाल उठता है – प्रबंधन ने पैसा कहां खर्च किया?

आशुतोष मिश्रा, सोसाइटी के निवासी ने बताया, “अगर आज बिजली का कनेक्शन कटा है, तो कल पानी की सप्लाई बंद हो सकती है। क्या हम बार-बार इस प्रबंधन की लापरवाही की कीमत चुकाते रहेंगे?”


किसी को नहीं दी गई अग्रिम सूचना, हड़बड़ी में काटा गया कनेक्शन

रेजिडेंट्स का आरोप है कि एनपीसीएल ने भी कोई अग्रिम सूचना नहीं दी, जिससे लोग वैकल्पिक तैयारी कर सकें। अचानक कनेक्शन काटे जाने से लोगों को न केवल परेशानी हुई, बल्कि भय और असुरक्षा की भावना भी उत्पन्न हो गई है।


📢 अगर बिजली जल्द नहीं आई तो करेंगे जोरदार प्रदर्शन – रेजिडेंट्स की चेतावनी

सोसाइटी के रेजिडेंट्स ने अब मेंटेनेंस ऑफिस पर प्रदर्शन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर 24 घंटे में बिजली कनेक्शन बहाल नहीं किया गया, तो वे प्रबंधन के खिलाफ सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे

रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के सदस्य ने बताया, “हमने इस मामले में जिला प्रशासन और एनपीसीएल को लिखित शिकायत भी दी है। प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”


क्या है सोसाइटी का बिजली बिल सिस्टम?

रेजिडेंट्स हर महीने मेंटेनेंस बिल के साथ बिजली का उपभोग शुल्क भी जमा करते हैं, लेकिन सोसाइटी का प्रबंधन इस राशि को एनपीसीएल को देने में टालमटोल करता है। यहीं से शुरू होती है बिल की बकाया राशि और आखिरकार, बनता है 1 करोड़ 76 लाख का पहाड़।

इस व्यवस्था में सीधे-सीधे पारदर्शिता की कमी दिखती है, जिस पर न तो अभी तक एनपीसीएल ने कोई कार्रवाई की, और न ही शासन-प्रशासन ने।


क्या हो सकती है इस संकट की अगली कड़ी?

अगर समय रहते रेजिडेंट्स एकजुट होकर आवाज़ नहीं उठाते, तो यह मामला कोर्ट-कचहरी की ओर जा सकता है। ऐसे में:

  • बिल समय पर भरने वाले भी कटे रहेंगे बिजली से
  • सोसाइटी की छवि खराब होगी
  • भविष्य में बिक्री और किराये की दरें गिरेंगी
  • बच्चों की पढ़ाई, बुज़ुर्गों की देखभाल पर असर पड़ेगा

सुपरटेक समूह की पुरानी पहचान: निर्माण में देरी, खराब मेंटेनेंस और बकाया बिल

यह पहला मामला नहीं है जब सुपरटेक ग्रुप की किसी सोसाइटी में इस तरह की वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाही सामने आई हो। पहले भी ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई परियोजनाओं में:

  • बिल्डर्स द्वारा फ्लैट्स की डिलीवरी में देरी
  • फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की कमी
  • बिल जमा करने के बावजूद बिजली/पानी कनेक्शन की समस्या
    जैसे गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं।

प्राधिकरण और प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

अब सवाल यह भी उठता है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कार्रवाई करेगा? क्या वो सोसाइटी रेजिडेंट्स को राहत दिलाएंगे, या फिर इस मुद्दे को एक और शिकायत की फाइल में बदल दिया जाएगा?


रेजिडेंट्स की अपील: बिल समय पर भरने वालों को संरक्षण मिले

सुपरटेक इकोविलेज-1 के लोग अब सरकार और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि:

  • रेजिडेंट्स की जमा राशि का ऑडिट करवाया जाए
  • बिजली बिल भुगतान के लिए सीधा एनपीसीएल से रेजिडेंट लिंक जोड़ा जाए
  • प्रबंधन पर कानूनी कार्यवाही की जाए
  • आरडब्ल्यूए को बिल भुगतान की निगरानी का अधिकार मिले

निष्कर्ष: पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही का अभाव बना सबसे बड़ी समस्या

यह घटना दर्शाती है कि सोसाइटीज में पारदर्शिता और जवाबदेही की कितनी कमी है। जब हजारों लोग बिजली का बिल समय पर भरने के बाद भी अंधेरे में रहने को मजबूर हो जाएं, तो ये सिर्फ सिस्टम फेलियर नहीं, बल्कि एक सामाजिक अन्याय है।


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