Greater Noida Authority News : “अब ग्रेटर नोएडा की हर गली-कूचे में रहेगी सुरक्षा की चौकसी! 227 करोड़ की ‘ऑल-सी आइ’ योजना से शहर बनेगा हाई-टेक सुरक्षा किला”, 350 लोकेशन, 2700 कैमरे और सुपर मॉडर्न टेक्नोलॉजी — ग्रेटर नोएडा में सेफ सिटी का सपना अब हकीकत बनने को तैयार!
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा में पिछले कई वर्षों से जिस व्यापक सुरक्षा प्रोजेक्ट का इंतजार किया जा रहा था, वह अब आखिरकार जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है। शहर के हर कोने, हर बाजार, हर गोलचक्कर और हर मुख्य मार्ग पर सुरक्षा का जाल बिछाने का सपना अब हकीकत बनता दिख रहा है।
पुलिस और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा कई साल पहले बनाई गई यह “सिटी-वाइड CCTV निगरानी योजना” अब तेज़ी से आगे बढ़ रही है। योजना के तहत शहर के लगभग 350 महत्वपूर्ण स्थानों पर मॉडर्न और AI आधारित हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे लगाए जाएंगे, जो हर पल सुरक्षा का पहरा देंगे।
तीन बड़ी कंपनियां मैदान में — L&T ने दिया पहला डेमो, दो और जल्द पेश करेंगी तकनीक
सोमवार को प्राधिकरण कार्यालय में मौजूद अधिकारियों के सामने L&T टेक्नोलॉजी सर्विसेज ने अपने अत्याधुनिक कैमरा सिस्टम और कंट्रोल ऑपरेशन का लाइव डेमो प्रस्तुत किया। डेमो में दिखाई गई टेक्नोलॉजी ने यह उम्मीद जगा दी है कि शहर में हर गतिविधि—ट्रैफिक मूवमेंट,, संदिग्ध व्यक्ति की पहचान,,क्राइम मॉनिटरिंग, भीड़ प्रबंधन, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, सब कुछ एक क्लिक में कंट्रोल रूम के स्क्रीन पर दिखाई देगा।
अन्य दो दिग्गज कंपनियों, NEC और RailTel, द्वारा भी अगले कुछ दिनों में अपना डेमो दिया जाएगा। इसके बाद अधिकारियों की टीम सबसे बेहतर टेक्नोलॉजी वाली कंपनी का चयन कर अंतिम अनुबंध करेगी।
योजना क्यों है इतनी ज़रूरी? शहर में बढ़ती जनसंख्या और विस्तार ने बढ़ाई सुरक्षा की जरूरत
ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। नई सोसाइटियों का विस्तार, IT कंपनियों का आगमन, इंडस्ट्रियल गतिविधियाँ—सब मिलकर सुरक्षा की जरूरत को कई गुना बढ़ा चुके हैं।
अधिकारियों के अनुसार “एक आधुनिक शहर के लिए रियल-टाइम निगरानी, ट्रैफिक कंट्रोल और क्राइम प्रिवेंशन अब लक्ज़री नहीं, बल्कि ज़रूरत है।” इसी वजह से यह प्रोजेक्ट सेफ सिटी और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) दोनों का मिश्रण है।
2700 कैमरों का विशाल नेटवर्क — हर चौराहे पर होगी 24×7 निगरानी
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत कुल 2700 हाई-टेक कैमरों का जाल पूरे शहर में बिछाया जाएगा।
इनमें शामिल होंगे—
360° घूमने वाले PTZ कैमरे
नंबर प्लेट पहचानने वाले ANPR कैमरे
फेस रिकॉग्निशन कैमरे
नाइट विज़न कैमरे
हाई रिज़ॉल्यूशन डोम कैमरे
इन कैमरों की बड़ी खासियत यह होगी कि ये एक-दूसरे से जुड़े होंगे और सभी का डेटा सीधे प्राधिकरण मुख्यालय में स्थित कंट्रोल रूम में पहुंचेगा। यानी अगर कोई घटना शहर में कहीं भी होगी, तो उसकी जानकारी सेकंडों में सिस्टम के पास होगी।
कंट्रोल रूम: सुरक्षा का डिजिटल दिमाग बनेगा प्राधिकरण का कार्यालय
इस पूरे प्रोजेक्ट का नियंत्रण प्राधिकरण दफ्तर में बने एक अति-आधुनिक कंट्रोल रूम से किया जाएगा। इस कंट्रोल रूम में— बड़ी डिजिटल वीडियो वॉल्स
अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम
रियल-टाइम अलर्ट
इमरजेंसी इंटरवेनशन टेक्नोलॉजी
सब एक साथ काम करेंगे।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पुलिस को अलर्ट जाएगा और मौके पर तेजी से कार्रवाई हो सकेगी। यह सिस्टम ट्रैफिक उल्लंघनों से लेकर राहगीरों की सुरक्षा तक में बड़ा बदलाव लाएगा।
227 करोड़ की मेगा योजना — कई चरणों में लागू होगा प्रोजेक्ट
इस परियोजना पर लगभग 227 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह पूरा प्रोजेक्ट दो बड़े हिस्सों में बांटा गया है—
- सेफ सिटी इनिशिएटिव
- इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS)
दोनों प्रोजेक्ट्स के संयुक्त होने से ग्रेटर नोएडा न सिर्फ सुरक्षित बनेगा, बल्कि ट्रैफिक जाम, गलत पार्किंग और सड़क हादसों में भी कमी आएगी।
कई साल से अटकी थी योजना, अब दिख रहा तेज़ी से अमल
यह योजना कई सालों से प्राधिकरण और पुलिस के बीच विचार विमर्श में फंसी थी।
निविदा की तारीखें कई बार बदली गईं, कंपनियों की रुचि कम हुई, लेकिन अब जब तीन बड़ी कंपनियां सामने आई हैं और तकनीकी परीक्षण में भी यह प्रोजेक्ट पास हो चुका है, तो इसे जल्द मंजिल मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों का दावा है कि “कंपनी चयन प्रक्रिया पूरी होते ही कैमरों की स्थापना तेजी से शुरू की जाएगी।”
सुरक्षा का मान बढ़ेगा — क्राइम कंट्रोल में आएगी क्रांति
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, शहर में इतने बड़े स्तर पर निगरानी तंत्र स्थापित होने के बाद— चेन स्नैचिंग
चोरी
रोड रेज
उत्पीड़न
दुर्घटनाएं
जैसे मामलों में कमी आएगी। क्योंकि अपराधियों को पता होगा कि शहर का हर कोना निगाहें देख रही हैं।
नागरिकों की उम्मीद — “शहर पहले से ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित होगा”
ग्रेटर नोएडा के नागरिक इस प्रोजेक्ट से बड़ी उम्मीदें लगाए हुए हैं। लोगों का कहना है कि बढ़ते ट्रैफिक और सुरक्षा घटनाओं के बीच यह सिस्टम शहर को और सुरक्षित बनाएगा और स्मार्ट सिटी जैसा अनुभव देगा।



