Yatharth Hospital News : "यथार्थ हॉस्पिटल घोटाला, इलाज के नाम पर लापरवाही और लूट का आरोप, मरीजों की जान पर बन आई!, इलाज नहीं, ये तो मौत का खेल है?, इलाज से ज्यादा लूट पर ध्यान?, पूर्व बार अध्यक्ष उमेश भाटी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का डीएम से विरोध

“ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे स्पेशल रिपोर्ट
इलाज नहीं, ये तो मौत का खेल है?
ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल पर बड़े मेडिकल घोटाले के गंभीर आरोप लगे हैं, जहां इलाज के नाम पर लापरवाही, धन की लूट और जान से खिलवाड़ का सिलसिला सामने आया है।
पिछले कुछ महीनों में 10 से 15 ऐसे केस सामने आए हैं जहां मामूली बीमारी को लेकर आए मरीजों की हालत अचानक बिगड़ गई। इनमें से कई लोगों की मौत हो गई और कुछ को दिल्ली के अन्य बड़े अस्पतालों में जाकर अपनी जान बचानी पड़ी।
इलाज से ज्यादा लूट पर ध्यान?
पीड़ितों और उनके परिजनों का आरोप है कि यथार्थ हॉस्पिटल में —
- छोटी बीमारियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।
- अनावश्यक ICU में भर्ती कराया गया।
- महंगे टेस्ट और दवाओं के नाम पर लाखों रुपये वसूले गए।
- और फिर मरीज की स्थिति बिगड़ने पर परिवार को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
जनता का आक्रोश और अधिकारियों की सख्ती
इस गंभीर मामले पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) ने तुरंत संज्ञान लिया है।
तीन डॉक्टरों की एक विशेष जांच कमेटी (पैनल) का गठन किया गया है, जो हर मामले की पुनः जांच करेगी।
पूर्व बार अध्यक्ष उमेश भाटी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का डीएम से विरोध
यथार्थ अस्पताल में हुई राखी भाटी नामक महिला के केस की लापरवाही के बाद अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्व बार अध्यक्ष उमेश भाटी के नेतृत्व में डीएम कार्यालय पहुंचा। उन्होंने सख्त कार्रवाई की मांग की और व्हाट्स अप पर लिखा कि:
“हॉस्पिटल में मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। यह जगह अब अस्पताल नहीं, लूट का अड्डा बन चुकी है।”
जांच में खुल सकते हैं कई राज
जानकारी के अनुसार जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं:
- फर्जी मेडिकल दस्तावेजों से बिल बढ़ाना
- अनावश्यक ऑपरेशन
- अयोग्य स्टाफ से इलाज
- और अंदरखाने चल रही आर्थिक सांठगांठ
पीड़ितों की ज़ुबानी
पूर्व सचिव एडवोकेट धीरेंद्र भाटी, जिनकी पत्नी राखी का मामला सबसे चर्चित बन चुका है, ने बताया:
“डॉक्टर ने ऑपरेशन के बाद कहा कि दोनों पथरी निकाल दी गई है, लेकिन कुछ दिन बाद दर्द नहीं रुका। दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया तो पता चला कि एक पथरी अभी भी पेट में है और इंफेक्शन फैल चुका है।”
धीरेंद्र ने आगे बताया कि:
“शिकायत के बाद अस्पताल ने गलती मानी, लेकिन कोई समाधान नहीं दिया। दूसरे अस्पताल में ले जाकर जान बचानी पड़ी।”
⚖️ कानूनी कार्रवाई की मांग तेज़
पीड़ित परिवारों का कहना है कि यह केवल एक अस्पताल की लापरवाही नहीं, बल्कि एक बड़ा संगठित मेडिकल घोटाला है।
अब मांग हो रही है कि:
- यथार्थ हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित किया जाए
- फायर सेफ्टी, मेडिकल अनुमति और डॉक्टर्स की डिग्री की जांच की जाए
- पुलिस में FIR दर्ज कर मुकदमा चलाया जाए
सवालों के घेरे में यथार्थ हॉस्पिटल
क्या यथार्थ हॉस्पिटल एक हेल्थ सेंटर है या मौत का टोल बूथ बन चुका है?
क्या कोई सरकार, प्रशासन, और स्वास्थ्य महकमा ऐसे संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई करेगा?
रफ्तार टुडे की मांग:
- सभी शिकायतों की सार्वजनिक सुनवाई हो
- अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, बिलिंग डिटेल्स और स्टाफ रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं
- दोषियों पर IPC की संगीन धाराओं में केस दर्ज हो
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📢 रफ्तार टुडे आपसे अपील करता है – अगर आपके साथ या आपके जानने वाले के साथ यथार्थ हॉस्पिटल में कोई लापरवाही हुई है, तो हमें अपनी कहानी भेजें। हम उसे सबके सामने लाएंगे।
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रिपोर्ट: रफ्तार टुडे इन्वेस्टिगेशन टीम, ग्रेटर नोएडा



