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Noida Medical Mafia News : नोएडा में मेडिकल माफिया पर अब तक का सबसे बड़ा शिकंजा!, करोड़ों की कैंसर दवाओं का गुप्त भंडार बेनकाब, सेक्टर-76 की आम्रपाली प्रिंसली सोसायटी का फ्लैट नंबर-402 बना जांच का केंद्र, दिल्ली-बिहार-हैदराबाद तक फैले नेटवर्क की जांच तेज, मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले गिरोह पर एजेंसियों का बड़ा एक्शन

जांच एजेंसियों को सूचना मिली थी कि नोएडा के एक फ्लैट में नियंत्रित श्रेणी की महंगी कैंसर रोधी दवाओं का अवैध भंडारण किया जा रहा है। इसके बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और गौतमबुद्ध नगर जिला औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने 20 और 21 जुलाई की रात संयुक्त छापेमारी की।

नोएडा, रफ़्तार टूडे। देशभर में जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी पर शिकंजा कसने की दिशा में नोएडा से एक बेहद बड़ा खुलासा सामने आया है। सेक्टर-76 स्थित एक हाईराइज सोसायटी के फ्लैट से करोड़ों रुपये मूल्य की कैंसर की महंगी दवाओं का अवैध भंडार मिलने के बाद जांच एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह मामला केवल एक फ्लैट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार दिल्ली, बिहार के पटना और हैदराबाद तक फैले एक बड़े मेडिकल नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। यही कारण है कि अब जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और कई राज्यों की एजेंसियां भी इस मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुट गई हैं। यह कार्रवाई केवल अवैध दवा भंडारण का मामला नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे उन संगठित गिरोहों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है जो मरीजों की मजबूरी को अपना कारोबार बना लेते हैं। करोड़ों रुपये की कैंसर रोधी दवाओं का एक आवासीय फ्लैट से मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

सेक्टर-76 की आम्रपाली प्रिंसली सोसायटी का फ्लैट नंबर-402 बना जांच का केंद्र

नोएडा के सेक्टर-76 स्थित आम्रपाली प्रिंसली सोसायटी का फ्लैट नंबर-402 इन दिनों सबसे अधिक चर्चा में है। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य आवासीय फ्लैट दिखाई देता था, लेकिन जब जांच एजेंसियों ने यहां छापा मारा तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। फ्लैट के भीतर बड़ी मात्रा में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी बायोलॉजिकल दवाएं, इंजेक्शन और अन्य जीवनरक्षक दवाएं अवैध रूप से संग्रहित मिलीं। अधिकारियों के अनुसार बरामद दवाओं की अनुमानित बाजार कीमत करीब दो करोड़ रुपये आंकी गई है। छापेमारी के दौरान बरामद सभी दवाओं को जब्त कर सील कर दिया गया है। अब उनके बैच नंबर, निर्माण विवरण और सप्लाई रिकॉर्ड का गहन परीक्षण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये दवाएं किस चैनल से यहां तक पहुंचीं।

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दिल्ली की जांच से खुली नोएडा की बड़ी परत

सूत्रों के अनुसार पूरे मामले का खुलासा दिल्ली में दर्ज एक अन्य मामले की जांच के दौरान हुआ। जांच एजेंसियों को सूचना मिली थी कि नोएडा के एक फ्लैट में नियंत्रित श्रेणी की महंगी कैंसर रोधी दवाओं का अवैध भंडारण किया जा रहा है। इसके बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और गौतमबुद्ध नगर जिला औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने 20 और 21 जुलाई की रात संयुक्त छापेमारी की। टीम ने जब फ्लैट की तलाशी ली तो वहां से भारी मात्रा में महंगी जीवनरक्षक दवाएं बरामद हुईं। अधिकारियों का कहना है कि इस स्तर का अवैध भंडारण किसी बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

एक आरोपी गिरफ्तार, कई और लोगों की तलाश

छापेमारी के दौरान आनंद कुमार नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। शुरुआती पूछताछ में जांच एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। अधिकारियों का मानना है कि आरोपी का संबंध दिल्ली में सक्रिय एक बड़े मेडिकल नेटवर्क से हो सकता है। उसके मोबाइल फोन, दस्तावेजों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के आधार पर जल्द ही इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान होगी और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां संभव हैं।

सरकारी सप्लाई चेन से जुड़े होने की आशंका

जांच का सबसे गंभीर पहलू यह माना जा रहा है कि बरामद दवाओं में कुछ बैच ऐसे मिले हैं जिनके सरकारी आपूर्ति प्रणाली से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से बिहार सरकार की स्वास्थ्य आपूर्ति प्रणाली से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि सरकारी अस्पतालों या सरकारी योजनाओं के लिए भेजी गई दवाएं अवैध तरीके से बाजार में पहुंचाई गईं, तो यह मामला केवल अवैध भंडारण नहीं बल्कि सरकारी दवाओं की कालाबाजारी और संगठित तस्करी का बड़ा मामला बन सकता है। इसी वजह से जांच एजेंसियां बेहद सावधानी से प्रत्येक दस्तावेज और बैच नंबर की जांच कर रही हैं।

दिल्ली, पटना और हैदराबाद तक फैले नेटवर्क की पड़ताल

जांच अधिकारियों के अनुसार इस पूरे रैकेट के तार कई राज्यों तक फैले होने की संभावना है। दिल्ली में दवा कारोबार से जुड़े लोगों के साथ संपर्क, बिहार में संभावित सप्लाई चेन और हैदराबाद से जुड़े फार्मा कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। देशभर में कई स्थानों पर दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं और संबंधित एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है।

कैंसर मरीजों की जिंदगी से जुड़ा गंभीर मामला

विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर की दवाएं सामान्य दवाओं की तरह नहीं होतीं। इनकी गुणवत्ता, तापमान और भंडारण की वैज्ञानिक व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि ऐसी दवाएं गलत परिस्थितियों में रखी जाएं या अवैध चैनल के माध्यम से मरीजों तक पहुंचें तो उनका असर कम हो सकता है या मरीज के लिए गंभीर खतरा भी पैदा हो सकता है।

यही कारण है कि इन दवाओं की खरीद, बिक्री और परिवहन पर सख्त कानूनी नियंत्रण लागू रहता है।

मेडिकल माफिया के खिलाफ बड़ा संदेश

स्वास्थ्य विभाग और जांच एजेंसियों का कहना है कि जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई को मेडिकल माफिया के खिलाफ एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जाएगा।

पूरे नेटवर्क का होगा खुलासा

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फ्लैट नंबर-402 कब से अवैध गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, यहां कितनी बार दवाओं की खेप आई, किन अस्पतालों या एजेंटों तक इन्हें भेजा गया और इस पूरे कारोबार में कितने लोग शामिल हैं।

मोबाइल डेटा, बैंक लेनदेन, परिवहन रिकॉर्ड और दवा कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है । अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है। यदि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होता है तो यह देश में जीवनरक्षक दवाओं की अवैध तस्करी के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक साबित हो सकती है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

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