Fortis Hospital News : चार साल की व्हीलचेयर, सात साल का दर्द… और फिर चमत्कारफोर्टिस ग्रेटर नोएडा में जटिल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी से उत्तराखंड के बुजुर्ग दंपत्ति को मिली नई ज़िंदगी, संक्रमण, टीबी और टूटा हुआ हौसला… लेकिन इलाज ने लौटाया आत्मविश्वास

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। जब उम्र के इस पड़ाव पर चलना भी सपना बन जाए, आत्मनिर्भरता खो जाए और रोज़मर्रा की ज़िंदगी किसी पर बोझ बनने लगे, तब उम्मीद की एक किरण भी जीवन बदल सकती है। उत्तराखंड से आए एक बुजुर्ग दंपत्ति के लिए यह किरण फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा में मिली, जहां जटिल और चुनौतीपूर्ण नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद दोनों ने एक बार फिर अपने पैरों पर खड़े होकर जीवन को नए सिरे से जीना शुरू किया।
पिछले कई वर्षों से यह दंपत्ति व्हीलचेयर और असहनीय दर्द तक सीमित हो चुका था। दिल्ली-एनसीआर के कई बड़े अस्पतालों में इलाज कराने के बावजूद जब कहीं राहत नहीं मिली, तब उन्होंने फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा का रुख किया। यहां कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. भरत गोस्वामी की अगुवाई में हुई सटीक जांच और चरणबद्ध उपचार ने उनकी किस्मत ही बदल दी।
संक्रमण, टीबी और टूटा हुआ हौसला… लेकिन इलाज ने लौटाया आत्मविश्वास
72 वर्षीय बुजुर्ग पति पिछले करीब चार वर्षों से व्हीलचेयर पर जीवन बिताने को मजबूर थे। उनके घुटने का जोड़ न केवल बुरी तरह क्षतिग्रस्त था, बल्कि उसमें तपेदिक (टीबी) और गंभीर संक्रमण भी फैल चुका था। यह स्थिति मेडिकल दृष्टि से बेहद जटिल मानी जाती है, क्योंकि संक्रमण के साथ नी रिप्लेसमेंट करना उच्च जोखिम से जुड़ा होता है।
डॉ. भरत गोस्वामी और उनकी टीम ने जल्दबाज़ी के बजाय चरणबद्ध इलाज का फैसला किया। पहले एंटीबायोटिक नी-स्पेसर के साथ डीब्राइडमेंट सर्जरी की गई, ताकि संक्रमण को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके। इसके करीब 15 दिन बाद जब स्थिति स्थिर हुई, तब सफलतापूर्वक टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) सर्जरी की गई।
इस जटिल प्रक्रिया के बाद जब बुजुर्ग मरीज पहली बार बिना सहारे खड़े हुए, तो वह पल सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मेडिकल स्टाफ के लिए भी भावुक था।
पत्नी को भी सात साल बाद मिला दर्द से छुटकारा
68 वर्षीय पत्नी की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं थी। वह पिछले सात वर्षों से ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण लगातार घुटनों के असहनीय दर्द से जूझ रही थीं। चलना-फिरना लगभग बंद हो चुका था और रोज़मर्रा के छोटे-छोटे काम भी किसी चुनौती से कम नहीं थे।
फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा में उनका बाइलेटरल टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया। सर्जरी के बाद न केवल दर्द में भारी कमी आई, बल्कि वह दोबारा खुद खड़ी होने, चलने और दैनिक गतिविधियां करने में सक्षम हो गईं।
दोनों सर्जरी पूरी तरह सफल रहीं और चिकित्सकों की निगरानी में दंपत्ति को स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टर बोले: समय पर इलाज न होता तो बिगड़ सकती थी स्थिति
डॉ. भरत गोस्वामी ने बताया कि दोनों ही केस मेडिकल दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण थे।
“एक मरीज में घुटने का जोड़ संक्रमित था और टीबी से ग्रसित था, जबकि दोनों मरीजों के जोड़ पूरी तरह खराब हो चुके थे। सही समय पर सटीक डायग्नॉसिस, संक्रमण नियंत्रण और एडवांस सर्जिकल तकनीकों के कारण हम उन्हें दोबारा चलने-फिरने में सक्षम बना सके,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी चेताया कि अगर इलाज में और देरी होती, तो मरीजों की स्थिति और बिगड़ सकती थी और जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ता।
‘यह इलाज नहीं, हमारे लिए दूसरा जन्म है’
इलाज के बाद भावुक होते हुए 72 वर्षीय बुजुर्ग मरीज ने कहा “चार साल तक व्हीलचेयर पर रहने से मेरा आत्मविश्वास पूरी तरह टूट चुका था। आज जब मैं अपने पैरों पर खड़ा हूं, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता।”
उनकी पत्नी ने कहा,
“सात साल से दर्द के साथ जीना मजबूरी बन गया था। फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा में इलाज के बाद ऐसा लग रहा है जैसे ज़िंदगी दोबारा मिल गई हो।”
अस्पताल प्रबंधन का भरोसा
फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के फैसिलिटी डायरेक्टर सिद्धार्थ निगम ने बताया कि अस्पताल में अत्याधुनिक ऑर्थोपेडिक तकनीक, उन्नत ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू सपोर्ट और 24×7 इमरजेंसी एवं ट्रॉमा केयर की सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि मरीज-केंद्रित और मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच के कारण फोर्टिस अस्पताल में लोग न केवल इलाज पाते हैं, बल्कि सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की ओर लौटते हैं।
उम्मीद की कहानी
यह दंपत्ति की कहानी सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि उन लाखों बुजुर्गों के लिए उम्मीद की मिसाल है, जो दर्द और असहायता के साथ जीवन जी रहे हैं। सही डॉक्टर, सही तकनीक और समय पर इलाज—इन तीनों के मेल से सचमुच ज़िंदगी बदली जा सकती है।



