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Paramount Waterlogging News : "पानी में डूबा करोड़ों का सपना!" पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट में जलजमाव से बर्बाद होते आशियाने, लोग बोले 'बिल्डर तो बस वसूली में एक्सपर्ट है', 4 करोड़ के विला, 1.25 लाख के फ्लैट, फिर भी बेहाल जिंदगी, 2015 से जारी है संघर्ष, लेकिन बिल्डर ने नहीं दी कोई सुध

प्रशासनिक लापरवाही और बिल्डर की मनमानी ने मिलकर इस सोसाइटी को “जल-समाधि” में धकेल दिया है।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
जहां एक ओर स्मार्ट सिटी और हाईटेक टाउनशिप के सपने सजाए जा रहे हैं, वहीं ग्रेटर नोएडा के सेक्टर जीटा-2 स्थित ‘पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट सोसाइटी’ के निवासी बर्बादी के कगार पर हैं।
लाखों-करोड़ों रुपये लगाकर बनाए गए इन आलीशान विला और फ्लैटों में हर मानसून के साथ आती है सिर्फ पानी की त्रासदी, बिल्डर की बेरुखी और मेंटेनेंस टीम की चुप्पी।


जलभराव ने छीनी सुकून की नींद, घरों में कैद हजारों लोग

बारिश की हर बूंद अब यहां लोगों के लिए खुशहाली की नहीं, परेशानी की निशानी बन गई है।
कुछ ही दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट की सड़कें, पार्किंग और ग्राउंड फ्लोर के घर पूरी तरह पानी में डूब गए।
लोगों को घर के अंदर कैद रहना पड़ा, बच्चे खेलने तक नहीं निकल सके, फर्नीचर खराब हो गया और कारों के इंजन तक डूबने लगे।


2015 से जारी है संघर्ष, लेकिन बिल्डर ने नहीं दी कोई सुध

निवासियों के मुताबिक, यह कोई नई समस्या नहीं है।
2015 से ही यह जलभराव की समस्या जारी है।
सोसाइटी के विला निवासी पीके दत्ता ने बताया,

“सोसाइटी में जल निकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। तेज बारिश के बाद पानी जमा होकर विला और फ्लैट तक पहुंच जाता है।”

बिल्डर की तरफ से सिर्फ पानी निकालने के लिए टेम्पररी मोटरें लगाई जाती हैं, लेकिन स्थायी समाधान की कोई मंशा नहीं दिखती।


4 करोड़ के विला, 1.25 लाख के फ्लैट, फिर भी बेहाल जिंदगी

इस हाई-प्रोफाइल सोसायटी में लगभग 1988 विला हैं जिनकी कीमत 1 करोड़ से 4 करोड़ रुपये तक है।
इसके अलावा 300 फ्लैट ऐसे हैं जिनकी कीमत 1 से 1.24 करोड़ रुपये है।
करीब 10000 से अधिक निवासी यहां रह रहे हैं, लेकिन सुविधाएं ज़ीरो!

“इतनी भारी कीमत चुकाकर भी अगर हमें हर साल बारिश के पानी से लड़ना है, तो ये किस तरह का लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट है?” – एक गुस्साए निवासी की टिप्पणी।


मेंटेनेंस फीस में करोड़ों की वसूली, फिर भी हालत वही ढाक के तीन पात

बिल्डर द्वारा हर महीने एक विला से 4-5 हजार रुपये मेंटेनेंस चार्ज वसूला जा रहा है।
इस हिसाब से महीने भर में करीब 1 करोड़ रुपये, और फिर भी बेसिक ड्रेनेज सिस्टम नहीं।

निवासी कीर्तिका, जो पिछले 7 साल से यहां रह रही हैं, बताती हैं:

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“पानी में डूबा करोड़ों का सपना!” पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट में जलजमाव से बर्बाद होते आशियाने, लोग बोले ‘बिल्डर तो बस वसूली में एक्सपर्ट है’,

“बिल्डर हर महीने मेंटेनेंस के लिए पैसा वसूलता है लेकिन काम एक भी नहीं करता। बस कहते हैं – ‘इस बार पक्का ठीक करवा देंगे’।


‘बस जी मैम, जी मैम’: लोकल मैनेजर की जिम्मेदारी से भागने की आदत

सोसाइटी के लोकल एस्टेट मैनेजर पर भी लोगों का भरोसा टूट चुका है।
कई निवासियों ने बताया कि शिकायत के बावजूद जवाब आता है – “जी मैम, अभी देख रहे हैं”, “बस दो दिन और दें”, लेकिन कोई एक्शन नहीं।


वीडियो सबूत भी बेअसर, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

निवासियों ने जलभराव के वीडियो फुटेज भी बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी को भेजे लेकिन फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
अब यह मुद्दा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां लोग #BuilderFraud और #ParamountProtest जैसे हैशटैग्स के साथ अपनी व्यथा साझा कर रहे हैं।


बच्चे घरों में बंद, फर्नीचर बर्बाद, गाड़ियाँ जलमग्न

एडवोकेट कीर्तिका बताती हैं –

“हर बार बारिश होती है, और पानी घर के अंदर घुस आता है। फर्नीचर खराब हो जाता है, कार डूब जाती है, और बच्चे खेल तक नहीं पाते। बिल्डर के लोग बस वादा करते हैं, काम कुछ नहीं करते।”


आवारा कुत्तों का आतंक बना एक और सिरदर्द

एक और बड़ी समस्या है – आवारा कुत्तों का आतंक
सोसाइटी में डॉग बाइट के लगातार मामले सामने आ रहे हैं लेकिन मेंटेनेंस एजेंसी न तो कुत्तों का टीकाकरण कराती है और न ही उन्हें शेल्टर भेजती है।

“हमारे बच्चे बाहर खेलने नहीं जा सकते। सोसाइटी की सड़कों पर डर का माहौल है।” – निवासियों का आरोप।


UPSIDC तक को नहीं खबर? प्रशासन भी मौन

इस पूरे मामले में यूपीसीडा (UPSIDC) जैसी नियामक संस्था को भी अब तक कोई जानकारी नहीं है।
न तो कोई निरीक्षण हुआ, न कोई लिखित चेतावनी बिल्डर को दी गई।
प्रशासनिक लापरवाही और बिल्डर की मनमानी ने मिलकर इस सोसाइटी को “जल-समाधि” में धकेल दिया है।


हैंडओवर अभी तक नहीं, लोग कह रहे – ‘कब तक सहें अन्याय?’

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अभी तक सोसाइटी का हैंडओवर नहीं हुआ है।
बिल्डर ही सभी व्यवस्थाएं चला रहा है – यानी शिकायत करने का मतलब है उसी से इंसाफ मांगना जो खुद दोषी है।


क्या अब जागेगा प्रशासन? क्या होगी कोई कार्रवाई?

अब निवासियों की मांग है कि:

  • UPSIDC और GNIDA संयुक्त जांच कराएं
  • बिल्डर को जलनिकासी का पुख्ता समाधान करने का आदेश दिया जाए
  • हैंडओवर की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए
  • मेंटेनेंस एजेंसी की जवाबदेही तय की जाए
  • RERA और स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज की जाए

निष्कर्ष: स्मार्ट सिटी का सपना या जलसंकट का सच?

जहां एक ओर भारत डिजिटल और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की बातें करता है, वहीं नोएडा की हकीकत इस पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट जैसे मामलों में उजागर होती है।
किसी हाईप्रोफाइल सोसाइटी का 10 सालों से जलभराव से जूझना और करोड़ों वसूलने के बाद भी समस्या जस की तस रहना – यह प्रशासन, बिल्डर और नियामक एजेंसियों के लिए शर्म की बात है।


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