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Greater Noida Authority News : ग्रेटर नोएडा वेस्ट को बड़ी सौगात, 45 एमएलडी एसटीपी और मास्टर सीवेज पंपिंग स्टेशन का निर्माण तेज, एसीईओ प्रेरणा सिंह ने किया निरीक्षण, तय समय से पहले कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश, 71 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा अत्याधुनिक एसटीपी

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की तेजी से बढ़ती आबादी और आवासीय विस्तार को देखते हुए सीवेज निस्तारण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) प्रेरणा सिंह ने बृहस्पतिवार को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-1 में निर्माणाधीन 45 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और मास्टर सीवेज पंपिंग स्टेशन (एमएसपीएस) का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान एसीईओ ने परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की और कार्यदायी संस्थाओं को निर्धारित समयसीमा से पहले काम पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीवेज प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाएं सीधे तौर पर पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और शहरी सुविधाओं से जुड़ी होती हैं, इसलिए इनमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


71 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा अत्याधुनिक एसटीपी


ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-1 में बन रहा यह एसटीपी करीब 71 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का अब तक लगभग 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य अगले छह महीनों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
एसीईओ प्रेरणा सिंह ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, मशीनरी की स्थापना, ट्रीटमेंट प्रोसेस और टाइमलाइन की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए।

तीन माह में पूरा होगा मास्टर सीवेज पंपिंग स्टेशन
एसटीपी के साथ-साथ लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा मास्टर सीवेज पंपिंग स्टेशन (एमएसपीएस) भी इस परियोजना का अहम हिस्सा है। एमएसपीएस का उद्देश्य विभिन्न सेक्टरों और गांवों से आने वाले सीवेज को एकत्र कर एसटीपी तक पहुंचाना है।
प्राधिकरण ने इस एमएसपीएस को तीन माह में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, हालांकि एसीईओ ने निरीक्षण के दौरान इसे भी समय से पहले पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एसटीपी और एमएसपीएस दोनों परियोजनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं, इसलिए दोनों का समन्वित रूप से समय पर पूरा होना बेहद जरूरी है।


इन इलाकों को मिलेगा सीधा लाभ

45 एमएलडी क्षमता का यह एसटीपी चालू होने के बाद ग्रेटर नोएडा वेस्ट और आसपास के कई सेक्टरों व गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। इनमें प्रमुख रूप से—
सेक्टर-1, 2, 3 और 4
सेक्टर-16, 16बी और 16सी
टेकजोन-4 और टेकजोन-7
ईकोटेक-12, 14 और 15
हैबतपुर, पतवारी, बिसरख, ऐमनाबाद
इटेहरा, छोटी मिलक, मिलक लच्छी
शाहबेरी और तिगड़ी इन सभी क्षेत्रों से निकलने वाले सीवेज को अब वैज्ञानिक तरीके से शोधित किया जा सकेगा, जिससे नालों, जलस्रोतों और भू-जल प्रदूषण की समस्या पर काफी हद तक अंकुश लगेगा।

ग्रेटर नोएडा में पहले से मौजूद एसटीपी की स्थिति
गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में फिलहाल कुल चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कार्यरत हैं—
बादलपुर एसटीपी – 2 एमएलडी क्षमता
कासना एसटीपी – 137 एमएलडी क्षमता
ईकोटेक-2 एसटीपी – 15 एमएलडी क्षमता
ईकोटेक-3 एसटीपी – 20 एमएलडी क्षमता
इनकी कुल क्षमता के बावजूद ग्रेटर नोएडा वेस्ट के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में सीवेज ट्रीटमेंट की अतिरिक्त जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। ऐसे में 45 एमएलडी का नया एसटीपी इस कमी को काफी हद तक पूरा करेगा।


पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता की दिशा में अहम कदम
एसीईओ प्रेरणा सिंह ने कहा कि सीवेज को बिना शोधित किए नालों या जलाशयों में छोड़ना पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा है। नया एसटीपी चालू होने से—
यमुना और हिंडन नदी बेसिन पर प्रदूषण का दबाव कम होगा
भूमिगत जल की गुणवत्ता बेहतर होगी
दुर्गंध और जलभराव की समस्याओं में कमी आएगी
भविष्य की आबादी के लिए मजबूत सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा


अधिकारियों और सीवर विभाग की टीम रही मौजूद
एसीईओ के निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ प्रबंधक सन्नी यादव, प्रबंधक संध्या सिंह सहित सीवर विभाग की पूरी टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने साइट पर चल रहे कार्यों की प्रगति, तकनीकी पहलुओं और संभावित चुनौतियों की जानकारी एसीईओ को दी।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सीवेज प्रबंधन किसी भी आधुनिक शहर की बुनियाद होता है। 45 एमएलडी एसटीपी और एमएसपीएस के चालू होने से न सिर्फ मौजूदा समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।

रफ़्तार टूडे की न्यूज
Raftar Today
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