Noida Authority News : “नोएडा की कुर्सी खाली, गलियारों में गूंजते नाम” — सीईओ की नियुक्ति पर सस्पेंस बरकरार,वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को लेकर चल रही है चर्चा, घोषणा कभी भी संभव

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा प्राधिकरण के सबसे ताक़तवर और संवेदनशील पद — मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) — पर अभी तक नाम तय नहीं हो सका है। डॉ. लोकेश एम. को पद से हटाए जाने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज़ है और हर दिन नए कयास, नई चर्चाएं और नए समीकरण सामने आ रहे हैं। सवाल एक ही है — नोएडा की कमान अब किसके हाथ में होगी?
नोएडा केवल एक शहर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक धड़कन, औद्योगिक इंजन और रियल एस्टेट का बड़ा केंद्र है। ऐसे में यहां का सीईओ केवल अफसर नहीं, बल्कि नीति, विकास, कार्रवाई और जवाबदेही का चेहरा होता है। यही वजह है कि इस नियुक्ति को लेकर सरकार बेहद सतर्क दिखाई दे रही है।
कार्यवाहक सीईओ का विकल्प भी तैयार
सूत्र बताते हैं कि यदि किसी कारणवश अंतिम निर्णय में देरी होती है, तो नोएडा प्राधिकरण के वर्तमान एसीईओ कृष्णा करुणेश को कार्यवाहक सीईओ की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इससे प्रशासनिक कामकाज में ठहराव न आए और बड़े फैसले लंबित न हों।
दो दावेदार, दो प्रशासनिक सोच
सूत्रों के अनुसार, फिलहाल दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के नाम सबसे मज़बूती से चर्चा में हैं —
सुरेन्द्र सिंह (IAS) और डॉ. रोशन जैकब (IAS)।
हालांकि, सत्ता के गलियारों में यह भी चर्चा है कि सरकार किसी तीसरे नाम से सभी को चौंका भी सकती है।
सुरेन्द्र सिंह: सख़्त प्रशासन और त्वरित फैसलों की पहचान
सुरेन्द्र सिंह को उत्तर प्रदेश के उन अधिकारियों में गिना जाता है, जो सख़्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटते। मई 2022 में जब उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ का पद संभाला था, तभी उन्होंने अतिक्रमण, अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार पर सीधी चोट करने का संकेत दे दिया था।
हालांकि, उनका कार्यकाल केवल चार महीने का रहा। सितंबर 2022 में उन्हें दिल्ली के उपराज्यपाल का सचिव बनाकर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया। तीन वर्षों तक दिल्ली में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने के बाद अब वे उत्तर प्रदेश लौट चुके हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सचिव के रूप में कार्यरत हैं।
सीएम कार्यालय और केंद्र—दोनों स्तरों पर काम करने का अनुभव उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है। माना जा रहा है कि यदि सरकार नोएडा में कठोर प्रशासन, तेज़ कार्रवाई और संदेश देने वाला नेतृत्व चाहती है, तो सुरेन्द्र सिंह का नाम सबसे ऊपर हो सकता है।
डॉ. रोशन जैकब: भरोसे, संतुलन और जन-प्रशासन की मिसाल
दूसरी ओर, डॉ. रोशन जैकब का प्रशासनिक कद भी किसी से कम नहीं है। लगभग सात वर्षों तक लखनऊ की मंडलायुक्त रहीं रोशन जैकब को प्रशासनिक कुशलता, संवेदनशीलता और जन-विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
कोविड-19 महामारी के सबसे कठिन दौर में उन्होंने जिस तरह से स्वास्थ्य व्यवस्था, राहत वितरण और सार्वजनिक संवाद को संभाला, उसने उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विश्वसनीय अफसरों की सूची में शामिल कर दिया। वर्तमान में वे खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSSAI) विभाग की सचिव हैं।
यदि सरकार नोएडा के लिए स्थिर, संतुलित और जन-केन्द्रित प्रशासन चाहती है, तो रोशन जैकब की तैनाती एक बड़ा और सकारात्मक संदेश मानी जाएगी।
नोएडा को कैसा सीईओ चाहिए?
नोएडा प्राधिकरण इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियों से जूझ रहा है—अवैध निर्माण और भू-माफिया
अधूरी परियोजनाएं और बिल्डर-खरीदार विवाद
औद्योगिक निवेश को गति देने की ज़रूरत
इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैफिक और नागरिक सुविधाओं का दबाव
ऐसे में सरकार ऐसे अधिकारी की तलाश में है, जिसने बड़े शहरी प्रशासन या औद्योगिक विकास में पहले ही अपनी क्षमता साबित की हो।
घोषणा कभी भी संभव
हालांकि, राज्य सरकार ने अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन यह माना जा रहा है कि चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि इसी सप्ताह या सप्ताहांत तक नए सीईओ के नाम की घोषणा हो सकती है।
नोएडा की जनता, उद्योग जगत और रियल एस्टेट सेक्टर की निगाहें अब सरकार के फैसले पर टिकी हैं।
क्योंकि यह नियुक्ति तय करेगी कि नोएडा अगले कुछ वर्षों में व्यवस्था, विकास और विश्वास के रास्ते पर कैसे आगे बढ़ेगा।



