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Panchsheel Green 1 News : 11 साल की आस्था, एकता और उत्सव की परंपरा, पंचशील ग्रीन्स वन में भव्य होलिका दहन, आधी रात गूंजे जयकारे और रंगों के त्योहार की हुई शुरुआत, 11 क्विंटल लकड़ियों से तैयार हुई होलिका, आस्था के साथ हुआ पूजन

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। रंगों के पर्व Holi की शुरुआत से पहले ग्रेटर नोएडा वेस्ट की प्रमुख सोसाइटी Panchsheel Greens One में एक बार फिर आस्था, परंपरा और सामुदायिक एकता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां पिछले 11 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा होलिका दहन समारोह इस बार भी पूरे भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।
इस आयोजन की शुरुआत कभी सिर्फ 11 लोगों के छोटे से समूह से हुई थी, लेकिन आज यह परंपरा सैकड़ों परिवारों की भागीदारी वाला विशाल सामाजिक और धार्मिक उत्सव बन चुकी है। इस वर्ष भी नवरात्र सेवक दल के तत्वावधान में पंचशील ग्रीन्स वन और आसपास की कई सोसाइटी के निवासियों ने मिलकर पूरे उत्साह के साथ होलिका पूजन और दहन किया।


11 लोगों से शुरू हुई परंपरा, आज बन गई हजारों दिलों की आस्था
करीब एक दशक पहले शुरू हुई इस परंपरा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं था, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना भी था।
समय के साथ यह आयोजन लगातार बड़ा होता गया और अब यह केवल एक सोसाइटी का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लोगों के लिए सामुदायिक उत्सव बन गया है।
हर साल की तरह इस बार भी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस आयोजन में भाग लेकर इसे और अधिक यादगार बना दिया। लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और होली के स्वागत में उत्साह से भरपूर माहौल दिखाई दिया।

11 क्विंटल लकड़ियों से तैयार हुई होलिका, आस्था के साथ हुआ पूजन
नवरात्र सेवक दल के अध्यक्ष Manish Kumar Awasthi ने बताया कि इस वर्ष भी परंपरा को निभाते हुए 11 क्विंटल लकड़ियों के संकल्प के साथ होलिका माई की आधारशिला रखी गई थी।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन वर्षों से परिसर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता आ रहा है।
समाज के लोग मिलकर इस आयोजन की तैयारियों में कई दिन पहले से जुट जाते हैं। लकड़ियों की व्यवस्था से लेकर पूजा की तैयारियों तक हर काम सामूहिक सहयोग से किया जाता है, जिससे यह आयोजन एक साझा उत्सव का रूप ले लेता है।


आधी रात 12:50 बजे विधि-विधान से हुआ होलिका दहन
इस वर्ष 2 मार्च 2026 की रात 12:50 बजे भद्रा के पूंछ काल में पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ होलिका दहन किया गया।
जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हुई, पूरे परिसर में “होलिका माई की जय” के जयकारे गूंज उठे। लोग श्रद्धा के साथ अग्नि की परिक्रमा करते नजर आए और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
इस दौरान बड़ी संख्या में निवासियों की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को एक आस्था और उत्साह से भरा सामुदायिक पर्व बना दिया।

समाज के लोगों के सहयोग से बना सफल आयोजन
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के कई लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन में राजू, सुनीता, राठौर, पूर्ति अवस्थी, नगेंद्र, अभिषेक, तारा, ममता, प्रमोद जोशी सहित अनेक लोगों ने सक्रिय योगदान दिया।
आयोजकों ने बताया कि हर वर्ष समाज के लोग बढ़-चढ़कर इस आयोजन में सहयोग करते हैं, जिससे यह परंपरा लगातार मजबूत होती जा रही है।
इस अवसर पर पुलिस प्रशासन का भी सराहनीय सहयोग मिला, जिसके कारण आयोजन पूरी तरह व्यवस्थित और सुरक्षित वातावरण में संपन्न हुआ। इसके लिए आयोजकों ने प्रशासन का आभार भी व्यक्त किया।


केवल धार्मिक आयोजन नहीं, सामाजिक एकता का प्रतीक
पंचशील ग्रीन्स वन में आयोजित यह होलिका दहन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन चुका है।
ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोग एक-दूसरे के करीब आते हैं, समाज में भाईचारे की भावना मजबूत होती है और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है।
यही कारण है कि हर वर्ष इस आयोजन में लोगों की भागीदारी बढ़ती जा रही है और यह उत्सव अब पूरे क्षेत्र के लिए एक सांस्कृतिक पहचान बनता जा रहा है।

रंगों के त्योहार का स्वागत, खुशियों से भरा माहौल
होलिका दहन के साथ ही पूरे परिसर में होली के स्वागत का उत्साह दिखाई दिया। बच्चों और युवाओं में खासा जोश देखने को मिला और सभी ने एक-दूसरे को त्योहार की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।
निवासियों का कहना है कि इस तरह के सामुदायिक आयोजन समाज में एकजुटता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हैं।
11 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आने वाले वर्षों में भी इसी तरह जारी रहेगी और लोगों को जोड़ती रहेगी।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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