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Good News : हिंदू समाज की एकजुटता आज की सबसे बड़ी जरूरत - प्रणीत भाटी, एकता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत, संघ के 100 वर्षों की यात्रा बनी प्रेरणा

ग्रेटर नोएडा , रफ़्तार टूडे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रविवार को जिले के विभिन्न स्थानों पर विराट हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठन, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूक करना रहा।
इसी क्रम में दादरी स्थित मिहिर भोज कॉलेज में आयोजित हिंदू सम्मेलन में भारतीय जनता पार्टी के प्रथम जिला अध्यक्ष एवं गौतमबुद्धनगर लोकसभा क्षेत्र के संयोजक प्रणीत भाटी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हिंदू समाज को एकजुट करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। समाज के भीतर व्याप्त जातिगत भेदभाव, असमानता और आपसी विभाजन को समाप्त किए बिना एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है।


समाज को बांटने वाली चुनौतियों पर गंभीर मंथन जरूरी
प्रणीत भाटी ने कहा कि आज हिंदू समाज कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने लव जिहाद, सामाजिक विघटन और सांस्कृतिक मूल्यों पर हो रहे प्रहार जैसे विषयों पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र संस्कृति है, जिसे समझने और आत्मसात करने की जरूरत है।


एकता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत
अपने वक्तव्य में उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानताओं को समाप्त कर ही हिंदू समाज को एकता के सूत्र में बांधा जा सकता है।
उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के हित में सोचना चाहिए। जब समाज संगठित होता है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है।

संघ के 100 वर्षों की यात्रा बनी प्रेरणा
सम्मेलन में वक्ताओं द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की राष्ट्रसेवा यात्रा को भी रेखांकित किया गया। बताया गया कि संघ ने समाज को जोड़ने, संस्कारों को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं और समाज के सभी वर्गों को राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया गया।


सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता पर जोर
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि हिंदू समाज की मजबूती केवल धार्मिक आयोजनों से नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण से संभव है।
वक्ताओं ने कहा कि जब समाज संगठित होगा, तभी वह हर चुनौती का सामना मजबूती से कर सकेगा।


कार्यक्रम का समापन एकजुटता के संकल्प के साथ
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने हिंदू समाज की एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जागरूक करने और सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

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