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DM News : ठंड के बीच ज़मीनी हकीकत पर जिलाधिकारी की सीधी दस्तक, रैन बसेरों में औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं की खुली पोल और सख्त चेतावनी, “शीत लहर में कोई भी खुले आसमान के नीचे नहीं सोएगा”, DM मेधा रूपम का मानवीय प्रशासन मॉडल, रैन बसेरों में बिस्तर, कंबल, अलाव और सुरक्षा पर खुद लिया जायज़ा

गौतमबुद्धनगर, रफ़्तार टुडे। जब कड़ाके की ठंड और शीत लहर आमजन के लिए परेशानी बन जाती है, ऐसे समय में प्रशासन की सक्रियता ही सबसे बड़ा सहारा बनती है। गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इसी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए जिले में संचालित रैन बसेरों का औचक निरीक्षण कर न केवल व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया, बल्कि अधिकारियों को साफ संदेश दे दिया कि—ठंड में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिलाधिकारी ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-2 स्थित सामुदायिक केंद्र और परी चौक, वर्क सर्किल-4 में बने रैन बसेरों का निरीक्षण कर वहां रह रहे जरूरतमंद लोगों से सीधे संवाद किया।

अचानक पहुंचीं डीएम, हर व्यवस्था को परखा

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी मेधा रूपम बिना किसी पूर्व सूचना के रैन बसेरों में पहुंचीं। उन्होंने—ठहरने की व्यवस्था, बिस्तरों की संख्या, कंबल की स्थिति, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति, सुरक्षा इंतज़ाम हर एक बिंदु को बारीकी से देखा। डीएम ने रैन बसेरों में रह रहे लोगों से सीधे बात कर पूछा कि उन्हें किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही है और उपलब्ध सुविधाएं पर्याप्त हैं या नहीं।

रैन बसेरों में ठहरे लोगों से सीधा संवाद

जिलाधिकारी ने निरीक्षण को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने वहां ठहरे बुजुर्गों, मजदूरों और असहाय लोगों से बातचीत की। लोगों ने उन्हें बताया कि—बिस्तर और कंबल मिलने से ठंड में राहत है

अलाव जलने से रातें थोड़ी आसान हो रही हैं

लेकिन कुछ स्थानों पर और बेहतर साफ-सफाई की आवश्यकता है। इस पर जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को तुरंत सुधार के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा “हर व्यक्ति को मिले सम्मानजनक और सुरक्षित आश्रय”

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि “रैन बसेरा केवल एक छत नहीं, बल्कि ठंड से बचाव का सुरक्षित और सम्मानजनक स्थान होना चाहिए। यहां ठहरे हर व्यक्ति को बिस्तर, कंबल, स्वच्छ पानी और सुरक्षा मिलना अनिवार्य है।”

उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी रैन बसेरे में फर्श पर सीधे सोने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। सभी के लिए चारपाई या तख्त पर गद्दे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

शीत लहर को लेकर सख्त निर्देश

जिलाधिकारी मेधा रूपम ने शीत लहर को देखते हुए प्रशासन को हाई अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा— कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए

रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों पर सो रहे लोगों को रैन बसेरों तक पहुंचाया जाए

कंबल और चादरें साफ हों

शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था हर समय उपलब्ध रहे। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर रैन बसेरों की क्षमता बढ़ाई जाए।

अलाव की व्यवस्था पर भी विशेष जोर

ठंड से बचाव के लिए जलाए जा रहे अलावों की व्यवस्था पर भी जिलाधिकारी ने विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से पूछा—

कितने स्थानों पर अलाव जल रहे हैं

ईंधन की उपलब्धता कितनी है

नियमित रूप से अलाव जलाए जा रहे हैं या नहीं

डीएम ने निर्देश दिए कि रैन बसेरों के आसपास और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर नियमित रूप से अलाव जलाए जाएं और लकड़ी या अन्य ईंधन की कोई कमी न हो।

निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि— केवल आदेश जारी करना काफी नहीं है, ज़मीनी निगरानी जरूरी है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि—

रैन बसेरों की नियमित जांच हो

किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाए

ठंड के दौरान 24×7 निगरानी सुनिश्चित की जाए

इसके लिए नगर निकाय, तहसील प्रशासन और पुलिस के बीच समन्वय बनाने पर भी जोर दिया गया।

मानवीय प्रशासन की मिसाल

जिलाधिकारी का यह औचक निरीक्षण केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल भी है। जब अक्सर शिकायतें आती हैं कि ठंड में बेसहारा लोग उपेक्षित रह जाते हैं, ऐसे समय में डीएम का स्वयं मौके पर पहुंचना एक सकारात्मक संदेश देता है।

यह संदेश साफ है—प्रशासन जनता के साथ खड़ा है।

अधिकारियों को साफ चेतावनी

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट कर दिया कि— किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई

यदि किसी व्यक्ति को ठंड से नुकसान हुआ

या रैन बसेरों में अव्यवस्था मिली

तो संबंधित अधिकारी की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारी

इस दौरान जिलाधिकारी के साथ उप जिलाधिकारी सदर — आशुतोष गुप्ता, तहसीलदार सदर — प्रतीक चौहान, नायब तहसीलदार सदर — ज्योत्सना, प्राधिकरण एवं संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सभी को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

ठंड में राहत की उम्मीद

जिलाधिकारी मेधा रूपम के इस औचक निरीक्षण से यह उम्मीद जगी है कि—शीत लहर के दौरान कोई भी जरूरतमंद उपेक्षित नहीं रहेगा

रैन बसेरों की व्यवस्थाएं और बेहतर होंगी। प्रशासन की मौजूदगी से आमजन को सुरक्षा का भरोसा मिलेगा

रफ़्तार टुडे का विश्लेषण

ठंड के मौसम में रैन बसेरों की व्यवस्था किसी भी जिले की संवेदनशीलता और प्रशासनिक क्षमता को दर्शाती है। गौतमबुद्धनगर में जिलाधिकारी का यह सक्रिय रुख बताता है कि जिला प्रशासन ठंड को हल्के में नहीं ले रहा।

अब देखना यह है कि—ये निर्देश काग़ज़ों तक सीमित रहते हैं या ज़मीनी स्तर पर पूरी सख्ती से लागू होते हैं।

रफ़्तार टूडे की न्यूज
Raftar Today
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