BJP President Election News : भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार, संघ की सहमति से बनेगी बात, गडकरी-शिवराज-संजय जोशी और भूपेंद्र यादव सबसे आगे, संघ की सोच व्यक्ति गौण, विचार शाश्वत, क्यों टल रहा है निर्णय?

दिल्ली/उ.प्र., रफ़्तार टुडे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीति इन दिनों सबसे ज्यादा जिस मुद्दे पर चर्चा बटोर रही है, वह है पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन। वर्तमान अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का कार्यकाल वर्ष 2023 में ही समाप्त हो चुका था, लेकिन विभिन्न कारणों से उन्हें अब तक विस्तार मिलता रहा। भाजपा का संविधान स्पष्ट रूप से “एक पद – एक व्यक्ति” के सिद्धांत पर आधारित है, मगर नड्डा इस समय न केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, बल्कि कैबिनेट मंत्री और राज्यसभा में भाजपा के नेता की ज़िम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
इस समय सोशल मीडिया व मेन स्ट्रीम मीडिया में सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर है l वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 2023 में पूर्ण हो चुका है lविगत दो वर्षों से किन्ही कारणों से उनके कार्यकाल को विस्तार मिलता रहा है lभारतीय जनता पार्टी के संविधान के अनुसार एक पद-एक व्यक्ति की व्यवस्था है l बावजूद इसके वे राष्ट्रीय अध्यक्ष,कैबिनेट मंत्री तथा राज्यसभा में दल के नेता की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं l जानकारी में रहे कि 2029 लोकसभा चुनाव तथा इससे पहले 12 राज्यों के चुनाव नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में ही लड़े जाएंगे l नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन मे विलंब का कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भाजपा मे असहमति होना बताया जा रहा है l सामान्यतः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने आनुषगिक संगठन के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करता जब तक कि वह उसके मूल सिद्धांतों के विरुद्ध न हो l पिछले 11 वर्षों मे संघ ने भाजपा तथा सरकार के कार्यों मे कोई हस्तक्षेप नहीं किया l
अब जब 2029 लोकसभा चुनाव और उससे पहले 12 बड़े राज्यों के विधानसभा चुनाव दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं, पार्टी नेतृत्व और संघ परिवार दोनों को ही यह निर्णय लेना होगा कि भाजपा का नया अध्यक्ष कौन होगा, जो आने वाले वर्षों में संगठन को संभाले और कार्यकर्ताओं से लेकर सरकार तक मजबूत सेतु का काम कर सके।
क्यों टल रहा है निर्णय?
पार्टी और संगठन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच इस मुद्दे पर अभी तक पूरी सहमति नहीं बन पाई है। सामान्यतः संघ भाजपा जैसे आनुषंगिक संगठनों के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन जब मामला संगठन की आत्मा और मूल सिद्धांतों से जुड़ा हो, तब संघ की राय निर्णायक हो जाती है।
पिछले 11 वर्षों में संघ ने भाजपा सरकार और संगठन के कार्यों में सीधा हस्तक्षेप नहीं किया। राम मंदिर, धारा 370 का हटना, राष्ट्र सुरक्षा और विदेश नीति में सफलता जैसी उपलब्धियों से संघ भी संतुष्ट रहा है। लेकिन संघ का मानना है कि अब संगठन को नया नेतृत्व देना जरूरी है, ताकि पार्टी की ऊर्जा और कार्यकर्ता–सरकार का संतुलन मजबूत बना रहे।

संघ की सोच: व्यक्ति गौण, विचार शाश्वत
संघ की विचारधारा हमेशा से रही है कि सत्ता स्थायी नहीं होती। सत्ता नदी के उस प्रवाह की तरह होती है जो बरसात के समय अवांछनीय वस्तुओं से भर जाती है, लेकिन समय बीतने के बाद वही नदी अपने मूल स्वरूप में लौट आती है। इसलिए संगठन की असली शक्ति व्यक्ति नहीं, बल्कि विचार होते हैं।
संघ यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भाजपा का नया अध्यक्ष केवल चुनाव जीतने वाला नेता न होकर ऐसा कार्यकर्ता-नेता हो जो पार्टी की वैचारिक दिशा, राष्ट्र निर्माण के ध्येय और संगठन की मजबूती के लिए हमेशा समर्पित रहे।
संजय जोशी का नाम सबसे आगे
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री संजय भाई जोशी का नाम इस समय संघ परिवार में गंभीरता से विचाराधीन है। माना जा रहा है कि वे संघ द्वारा तय मानकों पर खरे उतरते हैं। वे संगठन की गहराई से समझ रखने वाले नेता हैं।
उनकी कार्यशैली स्पष्ट, ऊर्जावान और वैचारिक है। वे कार्यकर्ताओं और सरकार के बीच सेतु का काम कर सकते हैं। पिछले एक वर्ष में संजय जोशी की लोकप्रियता वैचारिक कार्यकर्ताओं के बीच काफी बढ़ी है। यही वजह है कि संघ उनका नाम आगे बढ़ा रहा है।
नितिन गडकरी भी प्रमुख दावेदार
संजय जोशी के अलावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का नाम भी चर्चाओं में है। गडकरी को संगठन और सरकार दोनों का अनुभव है। बतौर सड़क परिवहन मंत्री उन्होंने देश की इंफ्रास्ट्रक्चर तस्वीर को बदला है। संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े गडकरी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करने के लिए भी जाने जाते हैं।
शिवराज सिंह चौहान का नाम भी सूची में
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम भी भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल माना जा रहा है। शिवराज लंबे समय तक प्रदेश में लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे और उनकी छवि जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़े रहने वाले नेता की रही है।
भूपेंद्र यादव और अन्य विकल्प
संघ और भाजपा नेतृत्व की चर्चाओं में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम भी आता है। संगठन की बारीक समझ, पार्टी रणनीति में अहम योगदान और आरएसएस से गहरे रिश्ते उन्हें संभावित उम्मीदवार बनाते हैं।
इसके अलावा विकल्प के तौर पर संघ ने मनोहर लाल खट्टर, वसुंधरा राजे सिंधिया और अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी अपने पास रखे हुए हैं।
आने वाले बदलाव के संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के नए अध्यक्ष का चयन केवल संगठन का आंतरिक मामला नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा भी तय करेगा।
2029 का लोकसभा चुनाव इस नए अध्यक्ष के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। 12 राज्यों के विधानसभा चुनाव भी इसी कार्यकाल में होंगे। संगठन और सरकार के बीच तालमेल और कार्यकर्ताओं का मनोबल नए अध्यक्ष की कार्यशैली पर निर्भर करेगा।
भाजपा और संघ इस समय चौराहे पर खड़े हैं। एक ओर जे.पी. नड्डा का कार्यकाल पहले ही लंबा हो चुका है, दूसरी ओर पार्टी को भविष्य की लड़ाई लड़ने के लिए एक नए ऊर्जावान, वैचारिक और अनुभवी अध्यक्ष की जरूरत है।
चर्चा चाहे संजय जोशी, नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान या भूपेंद्र यादव की हो, लेकिन अंतिम निर्णय संघ और भाजपा नेतृत्व की सहमति से ही होगा। फिलहाल कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक सभी निगाहें इस ओर टिकाए बैठे हैं कि आखिर भाजपा की कमान किसके हाथ में सौंपी जाएगी।



