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Noida Authority News : नोएडा के 6 बड़े बिल्डरों पर EOW का शिकंजा, 1,589 करोड़ रुपये के बकाये की जांच तेज; हवाला कनेक्शन भी रडार पर, हवाला और फंड डायवर्जन की भी होगी जांच, 4,300 फ्लैट खरीदारों को मिली राहत, सीईओ कृष्णा करुणेश के निर्देश पर कार्रवाई तेज

नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बकाया वसूली, फ्लैट खरीदारों के हितों की सुरक्षा और अधूरी परियोजनाओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। नोएडा प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी ने बताया कि जिन बिल्डरों ने अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के अनुरूप राहत योजना स्वीकार की है, वहां फ्लैट खरीदारों को लगातार राहत मिल रही है। अब तक लगभग 4,300 फ्लैटों की रजिस्ट्री कराई जा चुकी है और संबंधित बिल्डरों द्वारा लगभग 800 करोड़ रुपये प्राधिकरण में जमा कराए गए हैं।

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा प्राधिकरण के बकाया करोड़ों रुपये की वसूली और फ्लैट खरीदारों के हितों की सुरक्षा को लेकर अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्राधिकरण की शिकायत पर ईओडब्ल्यू ने छह प्रमुख बिल्डर कंपनियों के वित्तीय लेनदेन और परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि फ्लैट खरीदारों से एकत्र की गई राशि का उपयोग संबंधित परियोजनाओं के निर्माण में किया गया या उसे अन्य कंपनियों, परियोजनाओं अथवा संदिग्ध माध्यमों में स्थानांतरित कर दिया गया।

नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-96 स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन में ग्रुप हाउसिंग विभाग से संबंधित अभिलेख ईओडब्ल्यू को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जांच एजेंसी पूरे वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल करेगी ताकि खरीदारों के धन के दुरुपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सके।

राहत योजना का लाभ नहीं लेने वाले बिल्डर जांच के दायरे में

प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार जिन बिल्डरों ने राज्य सरकार द्वारा गठित अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के तहत दी गई राहत योजना का लाभ नहीं लिया, उन्हें जांच के दायरे में रखा गया है। इन बिल्डरों को कई बार नोटिस जारी किए गए, बैठक के लिए बुलाया गया और बकाया जमा करने का अवसर भी दिया गया, लेकिन उन्होंने न तो भुगतान किया और न ही संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद प्राधिकरण ने पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी। प्राधिकरण का मानना है कि फ्लैट खरीदारों से प्राप्त धन का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित होना चाहिए। यदि परियोजनाओं के लिए एकत्र राशि का दुरुपयोग हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

हवाला और फंड डायवर्जन की भी होगी जांच

ईओडब्ल्यू की जांच केवल बकाया राशि तक सीमित नहीं रहेगी। एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि खरीदारों से वसूले गए हजारों करोड़ रुपये का प्रवाह किन-किन खातों और कंपनियों तक पहुंचा। यदि जांच के दौरान धन को दूसरी कंपनियों में स्थानांतरित करने, फर्जी वित्तीय लेनदेन या हवाला नेटवर्क से जुड़े कोई साक्ष्य मिलते हैं तो उस दिशा में भी विस्तृत जांच की जाएगी। इस कार्रवाई को रियल एस्टेट क्षेत्र में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

4,300 फ्लैट खरीदारों को मिली राहत – Aceo वंदना त्रिपाठी

नोएडा प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी ने बताया कि जिन बिल्डरों ने अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के अनुरूप राहत योजना स्वीकार की है, वहां फ्लैट खरीदारों को लगातार राहत मिल रही है। अब तक लगभग 4,300 फ्लैटों की रजिस्ट्री कराई जा चुकी है और संबंधित बिल्डरों द्वारा लगभग 800 करोड़ रुपये प्राधिकरण में जमा कराए गए हैं।

उन्होंने कहा, “नोएडा प्राधिकरण फ्लैट खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जिन बिल्डरों ने शासन की राहत योजना का पालन किया है, वहां रजिस्ट्रियों की प्रक्रिया तेजी से पूरी कराई जा रही है। वहीं जो बिल्डर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं या बकाया जमा नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या खरीदारों के धन के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

सीईओ कृष्णा करुणेश के निर्देश पर कार्रवाई तेज

नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बकाया वसूली, फ्लैट खरीदारों के हितों की सुरक्षा और अधूरी परियोजनाओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिन बिल्डरों ने नियमों की अनदेखी की है, उनके खिलाफ सभी वैधानिक कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ाई जाए।

इन बिल्डरों पर है करोड़ों रुपये का बकाया

ईओडब्ल्यू की जांच में शामिल प्रमुख बिल्डरों में एसोटेक लिमिटेड, जीएसएस प्रोकान प्राइवेट लिमिटेड, ग्रेनाइट गेट प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और आईवीआर प्राइम डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

  • एसोटेक लिमिटेड पर लगभग 88 करोड़ रुपये बकाया हैं।
  • जीएसएस प्रोकान प्राइवेट लिमिटेड पर करीब 90.54 करोड़ रुपये बकाया हैं।
  • ग्रेनाइट गेट प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड की दो परियोजनाओं पर मिलाकर करीब 1,589.27 करोड़ रुपये का बकाया दर्ज है।
  • शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड पर भी लंबे समय से बकाया होने के साथ परियोजना अधूरी पड़ी है।
  • आईवीआर प्राइम डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड पर लगभग 500 करोड़ रुपये का बकाया बताया गया है।

फ्लैट खरीदारों को जांच से उम्मीद

ईओडब्ल्यू की कार्रवाई से हजारों फ्लैट खरीदारों में उम्मीद जगी है कि वर्षों से अधूरी पड़ी परियोजनाओं, लंबित रजिस्ट्रियों और बकाया भुगतान के मामलों में अब तेजी आएगी। यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ियां सामने आती हैं तो संबंधित बिल्डरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।

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