Breaking News : “कानून की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति साज़िश से नहीं झुकेगा”, राजनीतिक रसूख, मुखबिर और झूठे मुकदमे के आरोपों पर बार अध्यक्ष मनोज भाटी का बड़ा खुलासा, समिति गठित, हर पहलू पर नजर, समर्थन में उमड़े अधिवक्ता और समाज के लोग

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतम बुद्ध नगर जनपद की न्यायिक और राजनीतिक हलचल के बीच उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एडवोकेट मनोज भाटी (बोडाकी) ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर खुलकर मोर्चा खोल दिया। ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब, सेक्टर स्वर्ण नगरी में आयोजित एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके विरुद्ध दर्ज कराया गया मुकदमा कानून नहीं, बल्कि राजनीतिक साज़िश और रसूख की देन है।
“मुकदमा नहीं, सोची-समझी साज़िश है”
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बार अध्यक्ष मनोज भाटी ने कहा कि कुछ स्वार्थी और प्रभावशाली तत्वों द्वारा पुलिस के एक मुखबिर के माध्यम से उनके खिलाफ झूठा और मनगढ़ंत मुकदमा दर्ज कराया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वही व्यक्ति है, जो पूर्व में भी कई लोगों को झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास कर चुका है और जिसकी भूमिका हमेशा संदेह के घेरे में रही है।
मनोज भाटी ने दो टूक कहा—“यह मुकदमा मेरी छवि धूमिल करने और बार एसोसिएशन में मिली लोकतांत्रिक जीत से घबराए लोगों की हताशा का परिणाम है।”
वकालत को अपराध बताने की कोशिश?
उन्होंने मीडिया के सामने पूरे प्रकरण की कानूनी पृष्ठभूमि रखते हुए स्पष्ट किया कि जिन मामलों का हवाला देकर उन्हें आरोपी बनाने की कोशिश की गई है, उनमें वे केवल एक अधिवक्ता के रूप में अपने वादकारियों की ओर से पैरवी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि संबंधित शिकायतों की जांच पहले ही पुलिस स्तर पर हो चुकी थी और तब पुलिस ने यह कहते हुए कार्रवाई से इनकार कर दिया था कि मामला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
इसके बावजूद, बिना किसी नए तथ्य या साक्ष्य के, वही शिकायत दोबारा अलग माध्यम से दर्ज कराई गई और अंततः 10 दिसंबर 2025 को मुकदमा पंजीकृत कर दिया गया।
प्रक्रियागत चूक पर उठे सवाल
मनोज भाटी ने इस पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया की गंभीर खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नियमानुसार मुकदमे की प्रति 24 घंटे के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
जब उन्हें इस मुकदमे की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत माननीय न्यायालय का रुख किया और अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिस पर न्यायालय ने उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह तथ्य स्वयं दर्शाता है कि मामला कितना कमजोर और दुर्भावनापूर्ण है।
समिति गठित, हर पहलू पर नजर
बार अध्यक्ष ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा और आगे की रणनीति तय करने के लिए एक स्वतंत्र कानूनी समिति का गठन किया गया है। यह समिति दस्तावेजों, प्रक्रिया, शिकायतकर्ता की भूमिका और प्रशासनिक कार्रवाई—हर बिंदु पर गहन अध्ययन कर रही है।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी लड़ाई और आवश्यक कदम तय किए जाएंगे।

शैक्षणिक योग्यता पर उठे सवालों का जवाब
एलएलबी डिग्री और अधिवक्ता पंजीकरण को लेकर उठाए गए सवालों पर मनोज भाटी ने स्पष्ट और ठोस जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी एलएलबी डिग्री की वैधता पहले ही विश्वविद्यालय स्तर पर जांच के बाद प्रमाणित हो चुकी है।
भारतीय वायुसेना में सेवा के दौरान अध्ययन को लेकर उन्होंने बताया कि यह शिक्षा विभागीय अनुमति लेकर पूरी की गई थी और इससे उनकी सेवा में कोई बाधा नहीं आई।
बार काउंसिल में पंजीकरण से जुड़ी शिकायतों को भी उन्होंने पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि सक्षम प्राधिकरण पहले ही उनके पक्ष में निर्णय दे चुका है।
“यह लड़ाई व्यक्ति नहीं, संस्था की गरिमा की है”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में मनोज भाटी ने कहा कि यह पूरा प्रकरण राजनीतिक दुर्भावना और बार एसोसिएशन की स्वायत्तता पर हमला है।
उन्होंने कहा—“मैं कानून का विद्यार्थी हूं और कानून पर ही मेरा भरोसा है। साज़िशें मुझे विचलित नहीं कर सकतीं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे न केवल कानूनी रूप से, बल्कि नैतिक और संवैधानिक रूप से भी इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे।
समर्थन में उमड़े अधिवक्ता और समाज के लोग
प्रेस वार्ता में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, सामाजिक प्रतिनिधि और मीडिया कर्मी मौजूद रहे। कई अधिवक्ताओं ने इसे बार एसोसिएशन के लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला बताया और मनोज भाटी के साथ मजबूती से खड़े रहने की बात कही।



