Fortis Hospital News : “दिल की धड़कनों को मिली नई जिंदगी!”, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में केन्या के मरीज पर हुआ हाईटेक पेसमेकर कमाल, बिना चीर-फाड़ के मिला नया जीवन, हार्ट ब्लॉकेज से जूझ रहा था मरीज, हर पल मंडरा रहा था खतरा, विशेषज्ञों ने बताया – यह भविष्य की तकनीक है
फोर्टिस बना अंतरराष्ट्रीय मरीजों का भरोसेमंद केंद्र

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए फोर्टिस हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा ने एक जटिल हृदय रोग से जूझ रहे केन्या के 67 वर्षीय मरीज का सफल उपचार कर इतिहास रच दिया। यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें अत्याधुनिक ड्यूल-चैंबर लीडलैस पेसमेकर तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जो इस क्षेत्र में अपनी तरह की पहली प्रक्रिया मानी जा रही है। इस उन्नत तकनीक ने न सिर्फ मरीज की जान बचाई, बल्कि उन्हें एक नई जिंदगी भी दी।
हार्ट ब्लॉकेज से जूझ रहा था मरीज, हर पल मंडरा रहा था खतरा
जानकारी के अनुसार, केन्या से भारत आए इस मरीज को पिछले कई महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। उन्हें बार-बार बेहोशी आना, अत्यधिक थकान महसूस होना और चक्कर आना जैसी समस्याएं लगातार परेशान कर रही थीं। जब उनकी जांच फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में की गई, तो सामने आया कि उनका हृदय पूरी तरह से ब्लॉक हो चुका है।
यह स्थिति बेहद गंभीर होती है, जिसमें हृदय के ऊपरी और निचले चैंबरों के बीच इलेक्ट्रिकल सिग्नल का प्रवाह पूरी तरह रुक जाता है। मरीज की हृदय गति भी खतरनाक रूप से घटकर केवल 30 से 40 धड़कन प्रति मिनट रह गई थी, जिससे कभी भी कार्डियक अरेस्ट या अचानक मृत्यु का खतरा बना हुआ था।
ड्यूल-चैंबर लीडलैस पेसमेकर: तकनीक का चमत्कार
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने उन्हें ड्यूल-चैंबर लीडलैस पेसमेकर प्रत्यारोपण की सलाह दी। यह तकनीक पारंपरिक पेसमेकर से काफी अलग और अधिक उन्नत है।
जहां सामान्य पेसमेकर में सीने में सर्जरी करके डिवाइस लगाई जाती है और तारों को नसों के जरिए हृदय तक पहुंचाया जाता है, वहीं इस नई तकनीक में बिना किसी बड़े चीरे के केवल दो छोटी डिवाइस सीधे हृदय में प्रत्यारोपित की जाती हैं। इनमें से एक डिवाइस दाएं एट्रियम में और दूसरी दाएं वेंट्रिकल में लगाई जाती है।
ये दोनों डिवाइस वायरलेस तरीके से आपस में तालमेल बनाकर हृदय की सामान्य धड़कन को बनाए रखती हैं। यही वजह है कि यह तकनीक न केवल सुरक्षित है, बल्कि मरीज के लिए अधिक आरामदायक भी है।
दो घंटे में पूरी हुई जटिल प्रक्रिया, अगले दिन मिली छुट्टी
इस जटिल प्रक्रिया को फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट और फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. हरनीश सिंह भाटिया के नेतृत्व में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
डॉक्टरों की टीम ने इस सर्जरी को मिनिमली इनवेसिव तकनीक के जरिए पूरा किया, जिसमें जांघ (फेमर) की नस के माध्यम से कैथेटर डालकर डिवाइस को हृदय तक पहुंचाया गया। पूरी प्रक्रिया लगभग दो घंटे में संपन्न हुई और दोनों डिवाइस को सटीक स्थान पर स्थापित किया गया।
सबसे खास बात यह रही कि मरीज का शरीर इस प्रक्रिया के प्रति बेहद सकारात्मक रहा और उनकी हृदय गति सामान्य हो गई। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज को अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जो इस तकनीक की सफलता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों ने बताया – यह भविष्य की तकनीक है
डॉ. हरनीश सिंह भाटिया ने बताया कि ड्यूल-चैंबर लीडलैस पेसमेकर आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र की सबसे उन्नत तकनीकों में से एक है। यह न केवल हृदय की सामान्य गति को बहाल करता है, बल्कि पारंपरिक पेसमेकर से जुड़ी कई जटिलताओं से भी बचाता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की सर्जरी के लिए अत्यधिक विशेषज्ञता, सटीक योजना और आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है। खासकर तब, जब मरीज की स्थिति पहले से गंभीर हो, तो यह प्रक्रिया और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
फोर्टिस बना अंतरराष्ट्रीय मरीजों का भरोसेमंद केंद्र
फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के फैसिलिटी डायरेक्टर सिद्धार्थ निगम ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता अस्पताल की विशेषज्ञ टीम और अत्याधुनिक सुविधाओं का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि आज भारत में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं, जिसके चलते दुनिया भर से मरीज यहां इलाज के लिए आ रहे हैं। इस तरह की जटिल सर्जरी यह साबित करती है कि भारत अब एडवांस कार्डियक केयर के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
नई उम्मीद, नई जिंदगी
इस सफल सर्जरी के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं और सामान्य जीवन जीने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्षों से चली आ रही गंभीर समस्या से राहत मिलने के बाद उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास लौट आया है।
यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा विज्ञान की प्रगति को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सही समय पर सही इलाज से सबसे जटिल बीमारियों को भी मात दी जा सकती है।



