New Noida News : हाइब्रिड मॉडल से होगा ‘नया नोएडा’ का विस्तार, भूमि अधिग्रहण को लेकर शासन स्तर पर तैयारी तेज, हाइब्रिड मॉडल पर क्यों हो रहा है विचार?, लखनऊ में दिया जा चुका है प्रस्तुतीकरण, भविष्य का स्मार्ट शहर बनने की तैयारी

नोएडा/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। दिल्ली-नोएडा-गाजियाबाद क्षेत्र के शहरी विस्तार को नई दिशा देने जा रही ‘नया नोएडा’ परियोजना को लेकर एक बड़ा संकेत सामने आया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भूमि अधिग्रहण हाइब्रिड मॉडल पर किए जाने की संभावना जताई जा रही है। नोएडा-दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र (DN-GN SIR) को ‘नया नोएडा’ के रूप में विकसित करने के लिए करीब 80 गांवों की भूमि अधिग्रहित की जानी है, जिस पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम ने स्पष्ट किया है कि ‘नया नोएडा’ को चरणबद्ध और नियोजित तरीके से विकसित किया जाएगा। इस परियोजना का कुल प्रस्तावित क्षेत्रफल 209.11 वर्ग किलोमीटर होगा। इसके लिए अक्टूबर 2024 में अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर शासन और प्राधिकरण के बीच मंथन तेज हो गया है।
हाइब्रिड मॉडल पर क्यों हो रहा है विचार?
प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार, हाइब्रिड मॉडल में आपसी सहमति और लैंड पूलिंग दोनों को शामिल किया जाएगा। इससे किसानों और प्राधिकरण के बीच टकराव की स्थिति कम होगी और विकास प्रक्रिया को गति मिलेगी। इस मॉडल में किसानों को मुआवजे के साथ-साथ विकसित भूखंड या अन्य लाभ भी दिए जा सकते हैं, जिससे वे विकास प्रक्रिया के साझेदार बन सकें।
इस संबंध में नोएडा प्राधिकरण ने अधिकारियों के नामों का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे मंजूरी मिल चुकी है। अब जल्द ही ‘नया नोएडा’ परियोजना के लिए एक अस्थायी कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा, ताकि ज़मीनी स्तर पर कार्य तेजी से आगे बढ़ सके। इसके अलावा, तीन नए नायब तहसीलदारों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।
चार चरणों में बसेगा ‘नया नोएडा’ शहर
‘नया नोएडा’ का मास्टर प्लान चार चरणों में पूरा किया जाएगा। इसके तहत विकास की समय-सीमा और क्षेत्रफल पहले ही तय कर दिया गया है—
पहला चरण (2023-27): 3,165 हेक्टेयर भूमि का विकास
दूसरा चरण (2027-32): 3,798 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास
तीसरा चरण (2032-37): 5,908 हेक्टेयर भूमि विकसित की जाएगी
चौथा और अंतिम चरण (2037-41): 8,230 हेक्टेयर क्षेत्र को शहरी ढांचे में बदला जाएगा
इस तरह लगभग दो दशकों में ‘नया नोएडा’ को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और आत्मनिर्भर शहर के रूप में विकसित करने की योजना है।
लखनऊ में दिया जा चुका है प्रस्तुतीकरण
भूमि अधिग्रहण के प्रस्ताव और हाइब्रिड मॉडल को लेकर लखनऊ में शासन के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिया जा चुका है। इसमें हाइब्रिड मॉडल के फायदे, किसानों की सहमति, लैंड पूलिंग की प्रक्रिया और चरणबद्ध विकास की रूपरेखा को विस्तार से समझाया गया। शासन स्तर पर इस पर सकारात्मक चर्चा हुई है और संकेत मिल रहे हैं कि इसी मॉडल को आगे बढ़ाया जा सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों से संवाद किया जाएगा। उनकी शंकाओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए अंतिम रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर असंतोष की स्थिति न बने।
भविष्य का स्मार्ट शहर बनने की तैयारी
‘नया नोएडा’ को केवल आवासीय क्षेत्र ही नहीं, बल्कि औद्योगिक, व्यावसायिक और रोजगार केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां आधुनिक सड़क नेटवर्क, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन, हरित क्षेत्र, शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थान, साथ ही निवेश के लिए विशेष जोन विकसित किए जाने की योजना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूमि अधिग्रहण हाइब्रिड मॉडल पर होता है, तो यह परियोजना किसान हित और शहरी विकास के बीच संतुलन का एक सफल उदाहरण बन सकती है।
‘नया नोएडा’ उत्तर प्रदेश के शहरी विकास का अगला बड़ा अध्याय बनने जा रहा है। हाइब्रिड मॉडल पर भूमि अधिग्रहण की तैयारी से यह साफ है कि सरकार और प्राधिकरण अब टकराव नहीं, सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं। आने वाले महीनों में शासन स्तर से अंतिम निर्णय के बाद यह परियोजना ज़मीन पर उतरती दिखाई दे सकती है, जो भविष्य में एनसीआर की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है।



