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DDRWA Society News : 30–40 मंज़िला इमारतों के बीच फंसी सुरक्षा व्यवस्था!, ग्रेटर नोएडा में आपदा से निपटने को DDRWA की बड़ी मांग—“ज़मीन नहीं, अब आसमान से हो रेस्क्यू”, दो हेलीकॉप्टर तुरंत हों तैनात

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। तेजी से ऊंची होती इमारतें, बढ़ती आबादी और सीमित आपात संसाधनों के बीच नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रेटर नोएडा में 30 से 40 मंज़िल तक की हाईराइज सोसाइटियों के बढ़ते जाल को देखते हुए डिस्टिक डेवलपमेंट रेजिडेंट्स वेलफेयर संगठन (DDRWA) ने प्रशासन के सामने एक अहम और दूरदर्शी मांग रखी है। संगठन ने जिले में कम से कम दो रेस्क्यू हेलीकॉप्टर तैनात करने की मांग करते हुए कहा है कि भविष्य की किसी बड़ी आपदा में केवल ज़मीनी संसाधन नाकाफी साबित हो सकते हैं।


अध्यक्ष एनपी सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने अफसरों से की मुलाकात
DDRWA के प्रतिनिधिमंडल ने संगठन के अध्यक्ष एनपी सिंह के नेतृत्व में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव और लक्ष्मी वीएस से मुलाकात की। इस दौरान संगठन की ओर से जिले की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को छह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी सौंपा और इन मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई की अपील की।


ऊपर आग लगी तो नीचे से बचाना नामुमकिन
प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को अवगत कराया कि ग्रेटर नोएडा जिले में अब कई ऐसी सोसाइटियां हैं, जिनकी ऊंचाई 30 से 40 मंज़िल तक पहुंच चुकी है। यदि ऐसी किसी ऊंची इमारत की ऊपरी मंज़िलों में आग या अन्य आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो मौजूदा फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू सिस्टम सीमित ऊंचाई तक ही प्रभावी रह जाते हैं।


DDRWA का कहना है कि “ऐसी स्थिति में आम नागरिकों की जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए अब समय आ गया है कि ज़मीनी रेस्क्यू के साथ-साथ हवाई रेस्क्यू व्यवस्था भी मजबूत की जाए।”
इसी के तहत संगठन ने जिले में दो विशेष रेस्क्यू हेलीकॉप्टर की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि आग, भूकंप या अन्य आपदाओं के समय ऊपर फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।

सेक्टर-150 की घटना के बाद क्विक रिस्पांस टीम की जरूरत
ज्ञापन में संगठन ने सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की घटना का उल्लेख करते हुए इसे प्रशासनिक सतर्कता के लिए चेतावनी बताया। संगठन का कहना है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए जिले में एक क्विक रिस्पांस टीम (QRT) का गठन किया जाना चाहिए।
यह टीम किसी भी दुर्घटना, हादसे या आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचे और शुरुआती स्तर पर ही स्थिति को नियंत्रित करे, ताकि जान-माल की क्षति को रोका जा सके।


सड़कों पर खतरा, यू-टर्न और रिफ्लेक्टर की मांग
DDRWA ने जिले की रोड इंजीनियरिंग पर भी सवाल उठाए। संगठन के सदस्यों का कहना है कि कई स्थानों पर यू-टर्न अव्यवस्थित हैं
रात के समय पर्याप्त रिफ्लेक्टर न होने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है
तेज़ रफ्तार और खराब डिज़ाइन जानलेवा साबित हो रहे हैं
संगठन ने मांग की कि प्रमुख सड़कों और कट्स पर रिफ्लेक्टर लगाए जाएं, यू-टर्न को वैज्ञानिक तरीके से डिजाइन किया जाए और ट्रैफिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

खुले नाले बन रहे जानलेवा जाल
ज्ञापन में जिले में मौजूद खुले बड़े नालों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। DDRWA का कहना है कि ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में आज भी बड़े-बड़े नाले खुले हुए हैं, जिनमें गिरने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं।
बरसात के मौसम में यह खतरा और भी बढ़ जाता है। संगठन ने प्रशासन से मांग की कि—
सभी खुले नालों को तत्काल ढका जाए
पैदल यात्रियों और वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए


सिटीजन चार्टर को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग
संगठन ने जिले में सिटीजन चार्टर सेवाओं को केवल कागज़ों तक सीमित न रखते हुए उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की मांग भी की। DDRWA का कहना है कि यदि नागरिक सेवाओं की समय-सीमा तय हो और जवाबदेही तय की जाए, तो आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती है।


प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन, सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद
प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से उम्मीद जताई कि इन मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जिले की तेजी से बदलती जरूरतों के अनुसार सुरक्षा और सुविधाओं को अपग्रेड किया जाएगा।
इस मौके पर DDRWA की ओर से महासचिव शेर सिंह भाटी, उपाध्यक्ष संजीव कुमार, अनिल सिंह, सत्यवीर मुखिया, ममता तिवारी, श्रीपाल फौजी और यशपाल नागर भी मौजूद रहे।

ग्रेटर नोएडा: हाईराइज सिटी, हाईरिस्क नहीं चाहिए
ग्रेटर नोएडा अब केवल रिहायशी या औद्योगिक शहर नहीं रहा, बल्कि यह एक हाईराइज सिटी बन चुका है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को भी उसी स्तर तक ले जाना वक्त की मांग है। DDRWA की यह पहल न केवल संगठन की चिंता को दर्शाती है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा की आवाज़ भी बनकर सामने आई है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज
Raftar Today
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