
दिल्ली/मुंबई, रफ्तार टुडे।
भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने और स्थानीय कारीगरों के हुनर को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंचाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार और हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (EPCH) के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इस साझेदारी का उद्देश्य न केवल भारत के हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देना है, बल्कि देश को “हुनरमंद भारत” की नई पहचान देना भी है।
EPCH और महाराष्ट्र सरकार के बीच साझेदारी को मिली नई रफ्तार
EPCH अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई सचिवालय में महाराष्ट्र सरकार के विकास आयुक्त (उद्योग) दीपेंद्र सिंह कुशवाह (IAS) से मुलाकात की। इस बैठक में हस्तशिल्प क्षेत्र की संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई और महाराष्ट्र को इस क्षेत्र का अग्रणी राज्य बनाने की रणनीतियाँ तय की गईं।
EPCH का उद्देश्य: ग्लोबल मार्केट से जोड़ना ‘महाराष्ट्र के हाथों की कला’
डॉ. नीरज खन्ना ने कहा –
“महाराष्ट्र के प्रतिभाशाली कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर लाना हमारा मकसद है। हम नीतियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और निर्यात मॉडल्स के ज़रिए उन्हें सशक्त करेंगे।”
बैठक में सुझाए गए मुख्य प्रस्ताव, जो हस्तशिल्प को देंगे वैश्विक उड़ान
- ✅ राज्य स्तरीय निर्यात नीति का निर्माण
- ✅ महिला कारीगरों को सशक्त करने की योजनाएं
- ✅ जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) उत्पादों को प्रमोट करना
- ✅ O.D.O.P. (एक ज़िला एक उत्पाद) मॉडल को सशक्त बनाना
- ✅ माल ढुलाई सब्सिडी, ऋण सुविधा और व्यावसायिक इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण
- ✅ डिज़ाइन और टेक्नोलॉजी सहयोग, टेक्सटाइल व होम डेकोर क्लस्टर की स्थापना
मुंबई, पुणे और नागपुर में 7 लाख वर्ग फुट में इनोवेशन सेंटर की तैयारी
बैठक में EPCH द्वारा यह भी प्रस्ताव दिया गया कि महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों – मुंबई, पुणे, ठाणे और नागपुर – में अत्याधुनिक इनोवेशन और ट्रेनिंग सेंटर्स बनाए जाएं, जिससे कारीगरों को डिज़ाइनिंग, टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता का प्रशिक्षण मिल सके। इससे 7 लाख वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।
दिल्ली फेयर 2025 में महाराष्ट्र की ऐतिहासिक भागीदारी की योजना
13-17 अक्टूबर 2025 को दिल्ली में आयोजित होने वाले 60वें इंडिया एक्सपो फेयर – Autumn 2025 में महाराष्ट्र की विशेष भागीदारी सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। इस आयोजन में प्रदेश के हजारों हस्तशिल्प उत्पाद वैश्विक खरीदारों के सामने प्रदर्शित किए जाएंगे। इस फेयर में लगभग 7000 विदेशी खरीदार और 3000 भारतीय निर्यातक भाग लेंगे।
भारत का हस्तशिल्प निर्यात आंकड़ों में
EPCH के कार्यकारी निदेशक आर. के. वर्मा के अनुसार:
“2024-25 में भारत का हस्तशिल्प निर्यात ₹33,123 करोड़ यानी लगभग 3.918 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। हमारा उद्देश्य भारतीय कारीगरों की कला को पूरी दुनिया में पहचान दिलाना है।”
भारत के होम डेकोर, टेक्सटाइल, फर्नीचर, लाइटिंग और फैशन एक्सेसरीज़ जैसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, और महाराष्ट्र इस ग्रोथ जर्नी का एक बड़ा हिस्सा बन सकता है।
राज्य सरकार की ओर से पूरा सहयोग: दीपेंद्र सिंह कुशवाह
विकास आयुक्त दीपेंद्र सिंह कुशवाह ने बैठक के दौरान कहा:
“हस्तशिल्प क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। हम रोजगार, निर्यात और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के हस्तशिल्प की अगली रणनीति
बैठक के बाद EPCH प्रतिनिधिमंडल ने यूरोपीय संघ चैंबर ऑफ कॉमर्स (मुंबई) की निदेशक रेनू शो से भी मुलाकात की। इसमें यूरोपीय बाजार में भारतीय हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा देने और संभावित समझौते की रूपरेखा पर चर्चा हुई।
‘हुनरमंद भारत’ की ओर तेज़ रफ्तार
यह साझेदारी भारत के हस्तशिल्प उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे जहां स्थानीय शिल्प और कारीगरी को सम्मान मिलेगा, वहीं लाखों कारीगरों को स्वावलंबन और अंतरराष्ट्रीय मंच भी मिलेगा। यह पहल भारत के “लोकल टू ग्लोबल” विज़न को साकार करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के हस्तशिल्प को प्रमोट करने की योजना
इससे पहले ईपीसीएच प्रतिनिधिमंडल ने यूरोपीय संघ चैंबर ऑफ कॉमर्स, मुंबई की निदेशक सुष्री रेनू शो से भी मुलाकात की और यूरोप में भारतीय हस्तशिल्प की निर्यात नीति पर विस्तार से चर्चा की।
निष्कर्ष: “हस्तशिल्प से समृद्ध भारत” की ओर अग्रसर
EPCH और महाराष्ट्र सरकार की यह साझेदारी भारत के कारीगरों को आत्मनिर्भर और वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा बल्कि स्थानीय शिल्प और परंपरा को भी वैश्विक पहचान मिलेगी।
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