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Propack India Expo News : भारत का सबसे बड़ा खाद्य और पैकेजिंग मेला शुरू, एफआई इंडिया और प्रोपैक इंडिया 2025 में जुटे दुनिया भर के उद्योगपति, इनोवेशन और निवेश का खुला मंच बना ग्रेटर नोएडा का इंडिया एक्सपो मार्ट, भारत बनेगा वैश्विक फूड पावरहाउस

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आज से शुरू हुआ एफआई इंडिया और प्रोपैक इंडिया एक्सपो 2025 देश-विदेश के उद्योग जगत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बन गया है। यह आयोजन 3 से 5 सितंबर तक चलेगा, जिसमें 50 से अधिक देशों के 15,000 से अधिक पेशेवर और 340+ प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। यह मेला खाद्य सामग्री, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में एक नया आयाम जोड़ रहा है।

भारत का फूड सेक्टर क्यों खास?

भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र देश के विनिर्माण उत्पादन का 7.7% हिस्सा है और 70 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है। यही कारण है कि इस सेक्टर का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र न केवल किसानों और छोटे उद्यमियों के लिए नई संभावनाएं लेकर आ रहा है, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर भी फूड इनोवेशन हब बना रहा है।

भारत बनेगा वैश्विक फूड पावरहाउस

एफआई इंडिया और प्रोपैक इंडिया जैसे मेले न केवल उद्योग को नई दिशा देते हैं बल्कि किसानों, उद्यमियों, स्टार्टअप्स और निवेशकों को भी जोड़ते हैं।
इस आयोजन से साफ है कि भारत आने वाले वर्षों में खाद्य प्रसंस्करण और पैकेजिंग इंडस्ट्री का विश्व लीडर बनने की क्षमता रखता है।

उद्घाटन समारोह में उद्योग जगत की दिग्गज हस्तियां

मेले के उद्घाटन समारोह में डॉ. प्रबोध हल्दे, डॉ. दिनकर बी. कांबले, श्री नीलेश लेले, श्री हितेश पटेल, श्री उमेश कांबले, श्री सागर कुराडे, श्री योगेश मुद्रस और श्री राहुल देशपांडे जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।
इन सभी ने भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि आने वाला दशक भारत को इस उद्योग में ग्लोबल लीडर बना सकता है।

स्वास्थ्य और ऑर्गेनिक फूड्स की बढ़ती डिमांड

इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री योगेश मुद्रस ने कहा कि भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र स्वास्थ्य चेतना और ऑर्गेनिक उत्पादों की बढ़ती डिमांड से बदल रहा है।
ऑर्गेनिक फूड मार्केट 2025 तक ₹75,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। उपभोक्ता प्लांट-बेस्ड और हेल्दी फूड्स के लिए ज्यादा भुगतान करने को तैयार हैं।
इसका असर सीधा किसानों और स्टार्टअप्स पर पड़ेगा।

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भारत का सबसे बड़ा खाद्य और पैकेजिंग मेला शुरू, एफआई इंडिया और प्रोपैक इंडिया 2025 में जुटे दुनिया भर के उद्योगपति

आयुर्वेद और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की मांग में उछाल

डॉ. प्रबोध हल्दे ने बताया कि भारत के पारंपरिक खाद्य पदार्थ जैसे हल्दी, आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पाद विश्व बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इससे न केवल भारत की एक्सपोर्ट क्षमता बढ़ रही है बल्कि किसानों की आय में भी इजाफा हो रहा है।

वहीं श्री नीलेश लेले ने कहा कि बासमती चावल और भारतीय अचार जैसे पारंपरिक फूड्स विदेशी भारतीयों के बीच बहुत पसंद किए जा रहे हैं। यही कारण है कि 2025-26 तक यह क्षेत्र $535 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

नवाचार और पैकेजिंग का बढ़ता महत्व

CSIR की वैज्ञानिक डॉ. मीनाक्षी सिंह ने कहा कि खाद्य सामग्री और पैकेजिंग दोनों ही इस उद्योग की रीढ़ की हड्डी हैं। FSSAI अब सख्त लेबलिंग और ऑर्गेनिक फूड स्टैंडर्ड्स पर ध्यान दे रहा है।

भारत का ऑर्गेनिक फूड मार्केट 2024 में $1917 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया और 2033 तक $10,807 मिलियन डॉलर तक जाने का अनुमान है।

भारतीय इंग्रीडिएंट इंडस्ट्री की सफलता की कहानी

श्री सागर कुराडे ने कहा कि 1960 के दशक में छोटे स्तर पर शुरू हुआ भारत का फूड इंग्रीडिएंट इंडस्ट्री आज एक वैश्विक शक्ति बन चुका है।
आने वाले 5 सालों में क्लीन लेबल प्रोडक्ट्स (प्राकृतिक उत्पाद) और इनोवेशन इसे और तेज़ी से बढ़ाएंगे।
भारत पैकेजिंग और प्रोसेसिंग मशीनरी में भी ग्लोबल हब बनने की राह पर है।

इवेंट की खास झलकियां

एमएसएमई पवेलियन में छोटे और मंझोले उद्यमियों की इनोवेशन झलक रही है।
लाइव डेमो और प्रोडक्ट लॉन्च से उद्योग जगत में नई ऊर्जा का संचार।
विदेशी डेलीगेट्स और भारतीय स्टार्टअप्स के बीच बिजनेस मैचमेकिंग।
बेकरी, बेवरेज, डाइटरी सप्लीमेंट्स और पैकेजिंग सेक्टर की नई टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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