ABVP News : आत्महत्या या हत्या?, बी.टेक छात्रा खुशी की मौत से उठे कई सवाल, ABVP ने उठाई न्याय की मांग, दोषियों पर हत्या का केस दर्ज करने की दी चेतावनी, कौन थी खुशी? और क्यों उठाया यह कठोर कदम?,

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित KCC इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट में पढ़ने वाली बी.टेक छात्रा खुशबू (जो GNIOT की छात्रा थी) द्वारा हाल ही में की गई आत्महत्या की घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जोरदार विरोध दर्ज कराया है और डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस, ग्रेटर नोएडा सेंट्रल को ज्ञापन सौंपा है। परिषद ने दोषियों पर सीधा हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है और प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ज़िला-स्तरीय छात्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
कौन थी खुशी? और क्यों उठाया यह कठोर कदम?
छात्रा खुशबु, बी.टेक की होनहार छात्रा थी जो ग्रेटर नोएडा स्थित GNIOT कॉलेज से अपनी पढ़ाई कर रही थी। परीक्षा के दौरान उस पर नकल का झूठा आरोप लगाकर UFM (Unfair Means) लगाया गया। इस गंभीर आरोप के खिलाफ छात्रा ने कॉलेज प्रशासन और विश्वविद्यालय दोनों से शिकायत की, लेकिन कहीं से कोई न्याय नहीं मिला।
मानसिक दबाव, सामाजिक लज्जा और करियर की अनिश्चितता ने खुशी को इस कदर तोड़ दिया कि उसने आत्महत्या जैसा कठोर और पीड़ादायक फैसला ले लिया। यह एक व्यक्ति की हार नहीं, पूरे सिस्टम की विफलता है।
ABVP ने उठाई सख्त आवाज़ — दोषियों पर दर्ज हो हत्या का केस
ABVP ने इस मामले को सिर्फ आत्महत्या नहीं बल्कि एक सोची-समझी संस्थागत हत्या बताया है। परिषद का कहना है कि परीक्षा केंद्र अधीक्षक, विश्वविद्यालय प्रेक्षक, और परीक्षा कक्ष में तैनात निरीक्षक व अन्य स्टाफ ने जानबूझकर छात्रा को मानसिक प्रताड़ना दी। यह सबक केवल परीक्षा में ‘अनुशासन’ बनाए रखने के नाम पर नहीं था, बल्कि यह एक गंभीर मानसिक उत्पीड़न का मामला बन चुका है।
परिषद की चार अहम मांगें:
- 24 घंटे के भीतर सभी दोषी अधिकारियों के विरुद्ध IPC की संगत धाराओं में नामजद एफ.आई.आर. दर्ज की जाए।
- निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए केस को महिला थाना या एस.आई.टी. को सौंपा जाए।
- जांच पूरी होने तक दोषियों को तत्काल निलंबित या पदमुक्त किया जाए।
- सभी निजी तकनीकी संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र और एंटी-हैरासमेंट सेल की अनिवार्य स्थापना की जाए।
प्रशासन को दी गई चेतावनी: आंदोलन के लिए तैयार रहे
ABVP ने यह स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि 24 घंटे के अंदर कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया, तो पूरे जिले में छात्र उग्र आंदोलन करेंगे। इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रमुख पदाधिकारी
इस ज्ञापन को सौंपने के दौरान ABVP के विभाग संयोजक वैभव मिश्रा, जिला संयोजक देव नागर, प्रांत मीडिया संयोजक अभिनव वत्स, प्रांत सविष्कार संयोजक वैभव श्रीवास्तव, तथा आयुष, ख़ुशी, प्रियंका, अनमोल, राज, यशस्वी, आर्यन, सक्षम समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
क्या कहता है यह मामला समाज के लिए?
इस घटना ने एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या शैक्षणिक संस्थान छात्रों की मानसिक सेहत के लिए जवाबदेह नहीं हैं?
- क्या ‘अनुशासन’ के नाम पर छात्र-छात्राओं की भावनाओं को कुचलना जायज़ है?
- क्यों नहीं हर कॉलेज में मानसिक परामर्श और संवेदनशील प्रशासनिक ढांचा होता?
छात्रा खुशी का आत्महत्या करना केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कमजोरी और असंवेदनशीलता को उजागर करता है।
ABVP ने दिखाई सक्रियता, अब बारी प्रशासन की
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सक्रियता से एक बार फिर यह साबित होता है कि विद्यार्थी संगठनों की भूमिका केवल कैंपस पॉलिटिक्स तक सीमित नहीं, बल्कि छात्रों के न्याय और अधिकारों की रक्षा के लिए भी अहम है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।
📌 आपकी राय क्या है? क्या इस मामले में कॉलेज और विश्वविद्यालय दोनों जिम्मेदार हैं? क्या छात्राओं को ज्यादा संवेदनशील और सुरक्षित माहौल नहीं मिलना चाहिए?
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