Sikandrabad Nagarpalika News : सिकंदराबाद में नाले की झूठी सफाई का सच आया सामने!, बरसात में निकला नगर पालिका का झूठ, सिर्फ कागजों में हुई नाले की सफाई, दुकानों और घरों में घुसा गंदा पानी

सिकंदराबाद, रफ़्तार टुडे।
नगर पालिका परिषद सिकंदराबाद एक बार फिर झूठे दावों और आधे-अधूरे कामों को लेकर जनता के निशाने पर आ गई है। हाल ही में नगर क्षेत्र के रुई का पेच, पुराना जीटी रोड समेत अन्य इलाकों में चंद मिनट की बारिश ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी।
जिन नालों और नालियों की सफाई की आख्या फाइलों में लगाई जा चुकी है, वह जमीनी हकीकत में अधूरी या नाम मात्र की निकली। नतीजा – जलभराव, गंदगी, बदबू, सड़कों पर बहता कचरा और दुकानों-घरों में घुसता गंदा पानी।
फोटो में जेसीबी, ज़मीनी हकीकत में कीचड़ ही कीचड़
स्थानीय नागरिक अखिल कौशिक ने बताया कि उन्होंने 17 जून 2025 को नालों की गंदगी और जलभराव को लेकर IGRS (जन शिकायत पोर्टल) पर शिकायत की थी।
- शिकायत संख्या: 40014225023527
- शिकायत में स्पष्ट कहा गया था कि नालों की सफाई ना होने से पानी सड़कों पर बह रहा है और लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है।
परंतु जब 27 जून 2025 को नगर पालिका के सफाई निरीक्षक राजेन्द्र जी ने इसका जवाब दर्ज किया, तो जवाब में सिर्फ जेसीबी मशीन की तस्वीरें लगाकर यह लिखा गया कि “नाले की सफाई कर दी गई है”।
अखिल कौशिक का आरोप है:
“अगर वास्तव में सफाई हो गई होती, तो आज यह हालात नहीं होते। सिर्फ जेसीबी मशीन खड़ी कर फोटो खींच देना सफाई नहीं कहलाता। असली सफाई तो जनता देखती है – जो है ही नहीं!”
बारिश के साथ बही नगर पालिका की जवाबदेही
30 जून को हुई हल्की बारिश ने ही पूरे मोहल्ले को तालाब में बदल दिया। दुकानों के अंदर गंदा पानी घुस गया, घरों की सीढ़ियों तक पानी भर गया, और सड़कों पर चलना भी मुश्किल हो गया।
स्थानीय व्यापारी और दुकानदारों ने बताया कि उनके कई हजार रुपये का सामान पानी और कीचड़ में बर्बाद हो गया।
आख्या में झूठ, ज़मीन पर सिर्फ गंदगी
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। पहले भी कई बार IGRS पोर्टल पर शिकायतें दर्ज की गई हैं, लेकिन हर बार सफाई निरीक्षक राजेन्द्र जी अपने “चहेते गवाहों” के साथ झूठी आख्या लगाकर मामले को निपटा देते हैं।
“आख्या लगाकर आंखों में धूल झोंकना नगर पालिका की आदत बन चुकी है। कभी गवाह बना लेते हैं तो कभी मशीने खड़ी करके फोटो खींच लेते हैं – लेकिन सफाई कभी होती ही नहीं।”
– स्थानीय निवासी, रुई का पेच क्षेत्र
नगर पालिका का रवैया बना बड़ा सवाल
लोगों का कहना है कि नगर पालिका के पास हर साल नालों की सफाई के लिए लाखों रुपये का बजट होता है। लेकिन जब सवाल जवाबदेही का आता है, तो
- या तो ठेकेदारों को साफ-सफाई के नाम पर भुगतान कर दिया जाता है,
- या फिर अधिकारी आख्या के नाम पर खानापूर्ति कर लेते हैं।
इन सबके बीच पिसते हैं आम लोग, जिनके घर और दुकानें गंदे पानी में डूबती रहती हैं।

जनता बोली – अब सड़कों पर उतरेंगे!
अब स्थानीय लोगों ने यह तय किया है कि यदि इस बार नगर पालिका ने ईमानदारी से सफाई नहीं कराई, तो वे नगरपालिका कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे।
व्यापारी संघ और मोहल्ला समिति के सदस्य जल्द ही एक संयुक्त बैठक कर आंदोलन की रणनीति बना सकते हैं। क्षेत्रीय पार्षद से भी इस मुद्दे पर जनता नाराज़ नजर आ रही है।
मुख्य मांगें:
- शिकायत संख्या 40014225023527 की पुनः निष्पक्ष जांच हो।
- सफाई निरीक्षक राजेन्द्र जी की भूमिका की जवाबदेही तय हो।
- नालों और नालियों की जमीनी स्तर पर वीडियो ग्राफी कराई जाए।
- जिन लोगों को पानी घुसने से नुकसान हुआ है, उन्हें मुआवज़ा मिले।
- आगामी बारिश से पहले सभी मुख्य नालों की आपात सफाई कराई जाए।
सिर्फ बजट नहीं, ज़मीनी सफाई चाहिए
बुलंदशहर जिले में सिकंदराबाद एक ऐसा कस्बा है जो तेज़ी से नगर क्षेत्र के रूप में विस्तारित हो रहा है, लेकिन अगर प्रशासनिक लापरवाही और कागज़ी खानापूर्ति ही इसका भविष्य तय करेंगी, तो लोग ऐसे विकास को विनाश से कम नहीं मानेंगे।
जलभराव की ताज़ा तस्वीरें बनीं सबूत
स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर जलभराव की ताज़ा तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें साफ दिख रहा है कि:
- दुकानों में पानी घुस चुका है,
- सड़कों पर घुटनों तक पानी भरा है,
- और कूड़ा-कचरा नालों से निकलकर गलियों में फैला पड़ा है।
इन तस्वीरों को अब लोग मुख्यमंत्री पोर्टल, X (ट्विटर) और फेसबुक पर टैग कर उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी में हैं।
सरकारी सिस्टम बनाम जनता का धैर्य
यह मामला सिर्फ एक मोहल्ले का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है –
- जब आम जनता ऑनलाइन शिकायत करती है,
- उसे ट्रैकिंग आईडी भी दी जाती है,
- लेकिन अंत में होता है क्या? झूठी आख्या और कागज़ी काम।
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✍️ निष्कर्ष:
सफाई केवल आख्या से नहीं होती, ज़मीनी काम से होती है। अगर अधिकारी और सफाई कर्मी केवल फोटो खिंचवाकर अपनी ड्यूटी निभाएंगे, तो जनता को हर बारिश में अपने घरों का सामान बचाने में जंग लड़नी पड़ेगी।
अब समय आ गया है कि सिकंदराबाद जैसे कस्बों में भी जवाबदेही आधारित प्रशासन लागू हो – ताकि हर साल की बारिश, लोगों के लिए विनाश ना बनकर संतोष लाए।
बताएं बस — “रफ़्तार टुडे” आपकी आवाज़ को रफ्तार देने के लिए तत्पर है! 📢📲



