Surajpur Barahi Mella News : “ढोल-नगाड़ों की गूंज, रागनियों की तान और संस्कृति का महासंगम!, सूरजपुर का बाराही मेला-2026 चौथे दिन बना भक्ति, कला और संदेशों का जीवंत उत्सव”, “रागनियों में छुपा संदेश—देशभक्ति से लेकर सामाजिक चेतना तक”

सूरजपुर (ग्रेटर नोएडा), रफ़्तार टूडे। प्राचीन परंपराओं और लोक संस्कृति की अनूठी विरासत को संजोए हुए बाराही मेला-2026 का चौथा दिन रविवार को भक्ति, रंगारंग प्रस्तुतियों और सामाजिक संदेशों के साथ बेहद शानदार अंदाज में संपन्न हुआ। मेले का पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक उल्लास और जनसहभागिता से सराबोर नजर आया, जहां सुबह से लेकर देर रात तक मंचों पर विविध कार्यक्रमों की झड़ी लगी रही।
“आरती से शुरुआत, फिर शुरू हुआ संस्कृति का रंगारंग कारवां”
प्रतिदिन की परंपरा के अनुसार कार्यक्रमों का शुभारंभ आरती और गणेश वंदना के साथ हुआ, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद लोक कला मंच और संस्कृति मंच पर प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ, जिसने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
हर प्रस्तुति में भारतीय संस्कृति की झलक, लोक परंपराओं की मिठास और कलाकारों की ऊर्जा साफ दिखाई दी।
“हरियाणा डांस ग्रुप ने बिखेरा रंग, दर्शक झूमने को हुए मजबूर”
हरियाणा डांस ग्रुप (आरसीएफ इवेंट) के कलाकारों ने अपनी धमाकेदार प्रस्तुतियों से मंच पर आग लगा दी। पारंपरिक वेशभूषा, तालबद्ध नृत्य और शानदार कोरियोग्राफी ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
लोकगीतों की धुन और कलाकारों की अभिव्यक्ति ने यह साबित कर दिया कि भारतीय लोक संस्कृति आज भी उतनी ही जीवंत और प्रभावशाली है।
“रागनियों में छुपा संदेश—देशभक्ति से लेकर सामाजिक चेतना तक”
इसके बाद हरेंद्र नागर एंड पार्टी और राहुल अवाना (हरौला) ने रागनियों के माध्यम से देशभक्ति और सामाजिक मूल्यों का संदेश दिया। “गंगा जमुना यहां बहे, म्हारा प्यारा हिंदुस्तान…” जैसी प्रस्तुति ने दर्शकों में देशप्रेम की भावना भर दी।
वहीं बिशन सिंह इंदौर (राजस्थानी) की रागनी “ज्ञान बिना संसद में गाल बजाना ठीक नहीं…” ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया और खूब तालियां बटोरीं।
“नृत्य, संवाद और भावनाओं का संगम बना आकर्षण”
आशु चौधरी (रोहतक) ने अपने जोशीले नृत्य से मंच पर अलग ही ऊर्जा भर दी। वहीं हरेंद्र नागर और बिशन सिंह इंदौर ने महाभारत के कर्ण-अर्जुन संवाद को रागनी के माध्यम से प्रस्तुत कर जीवन के गहरे संदेश दिए।
“भाई जैसी चीज जगत में मिलती न…” जैसी रागनी ने पूरे पंडाल को भावुक कर दिया और भाईचारे का संदेश मजबूती से प्रस्तुत किया।

“नगाड़ों की गूंज ने बढ़ाया रोमांच, 26 साल पुरानी परंपरा बरकरार”
मेले का एक प्रमुख आकर्षण जितेंद्र बंचारी नगाड़ा पार्टी रही, जिसने अपनी दमदार प्रस्तुति से पूरे माहौल को जीवंत कर दिया। पिछले 26 वर्षों से लगातार इस मेले में प्रस्तुति दे रही इस टीम ने एक बार फिर साबित किया कि परंपरा और कला का मेल कितना प्रभावशाली हो सकता है।
साथ ही सिकंदर नाथ भांगड़ा बीन पार्टी (जलपुरा) ने भी दर्शकों को अपनी लोक शैली से खूब प्रभावित किया।
“मुख्य अतिथियों ने दिया प्रेरणा और जागरूकता का संदेश”
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में Nirmal Tanwar और Ramveer Tanwar की गरिमामयी उपस्थिति रही।
निर्मल तंवर ने अपने संबोधन में बेटियों को आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी हैं। वहीं रामवीर तंवर ने जल संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यदि बाराही धाम में पर्याप्त स्थान मिलता है, तो वह यहां आधुनिक जलाशय के निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग भी देंगे।
“आगे भी जारी रहेगा सांस्कृतिक कारवां”
मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने जानकारी दी कि 6 अप्रैल को तरुण बलियान एंड पार्टी द्वारा रागनी कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें कई प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
यह जानकारी सुनकर दर्शकों में आगामी कार्यक्रमों को लेकर उत्साह और भी बढ़ गया।
“आस्था के साथ समाज को जोड़ता मंच”
बाराही मेला-2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता, युवा प्रेरणा और पर्यावरण जागरूकता का एक सशक्त मंच बन चुका है।
हर दिन यहां प्रस्तुत हो रहे कार्यक्रम यह साबित कर रहे हैं कि परंपरा और आधुनिक सोच का संगम समाज को एक नई दिशा दे सकता है।



