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Active Citizen News : जब सूख गए कचनार, उठी जनआवाज़ – फिर 180 नए जीवन बने हरियाली की उम्मीद!, ग्रेटर नोएडा की ग्रीन बेल्ट में एक्टिव सिटीजन की पहल से लौट रही है हरियाली, प्राधिकरण की तत्परता से खुश है समाज, प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार और उद्यान विभाग की पूरी टीम को धन्यवाद


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
कभी सजे-संवरे, हरियाली से लहलहाते पेड़ों से जानी जाने वाली अमृतपुरम रोटरी से लेकर रामपुर गोल चक्कर और पुरानी अथॉरिटी रोटरी तक की ग्रीन बेल्ट अब फिर से अपना हरा रूप पाने की ओर है। वर्षों से इन ग्रीन बेल्टों में लगे कचनार के पेड़ सूख गए थे, जिससे न केवल क्षेत्र की खूबसूरती खत्म हो रही थी, बल्कि पर्यावरण संतुलन भी प्रभावित हो रहा था। लेकिन अब एक सशक्त नागरिक हस्तक्षेप और प्राधिकरण की सक्रियता के चलते यह इलाका फिर से हरियाली से भरने लगा है।


एक शिकायत से हरियाली तक: जब नागरिकों ने लिया मोर्चा

इस बदलाव की शुरुआत हुई जब एक्टिव सिटीजन टीम के प्रमुख हरिंद्र भाटी ने इस ग्रीन बेल्ट की दुर्दशा को गंभीरता से लिया और इसकी जानकारी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, एसीईओ, तथा ओएसडी को दी। शिकायत के साथ स्थलीय निरीक्षण और “कनेर के बजाय कचनार ही लगाए जाएं” जैसी मांग भी रखी गई।

हरिंद्र भाटी ने बताया:

“हमारा उद्देश्य केवल पौधे लगवाना नहीं था, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और पहचान को बचाना था। कचनार न केवल छायादार पेड़ है, बल्कि इसकी सुंदर गुलाबी-सफेद फूलों की छटा इस रोटरी क्षेत्र की पहचान रही है।”


प्राधिकरण ने लिया संज्ञान, और तुरंत हुआ सुधार

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इस शिकायत को सकारात्मक दृष्टिकोण से संज्ञान में लिया और तत्काल उद्यान विभाग को निर्देश दिए कि कनेर की जगह फिर से कचनार के पौधे ही लगाए जाएं। उसी आदेश का पालन करते हुए 15 जुलाई 2025 को कुल 180 कचनार के नए पौधे लगाए गए।

इस ग्रीन बेल्ट की देखरेख और भविष्य में संरक्षण के लिए एक स्थानीय मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है, जिसमें RWA प्रतिनिधि और एक्टिव सिटीजन शामिल होंगे।


समाजसेवी मनजीत सिंह बोले: “ये पेड़ मां के नाम”

इस वृक्षारोपण के मौके पर मौजूद समाजसेवी श्री मनजीत सिंह ने कहा:

“कचनार के ये 180 पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं हैं, ये हमारे भविष्य की सांसें हैं। हम इन्हें ‘एक पेड़ – मां के नाम’ की थीम के तहत लगा रहे हैं। हर इंसान को अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ अपनी मां के नाम पर जरूर लगाना चाहिए – यही असली सेवा है।”

उन्होंने प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार और उद्यान विभाग की पूरी टीम को धन्यवाद और शुभकामनाएं दीं।


अमृतपुरम से रामपुर तक – ग्रीन बेल्ट को नया जीवन

इस पूरी ग्रीन बेल्ट में पहले सैकड़ों की संख्या में कचनार के पेड़ थे जो पिछले कुछ वर्षों में या तो सूख गए या कट गए। उनकी जगह कुछ समय पहले कनेर के पौधे लगाए जा रहे थे। हालांकि कनेर सजावटी है, लेकिन छांव, ऑक्सीजन उत्सर्जन और जैव विविधता के लिहाज़ से कचनार कहीं अधिक प्रभावी है।

हरिंद्र भाटी ने बताया:

“हमने मांग की थी कि ग्रीन बेल्ट की मूल पहचान को वापस लाया जाए। और आज जब 180 कचनार दोबारा लगाए जा रहे हैं, तो लगता है कि हमारी मेहनत सफल हुई।”


क्यों खास है कचनार?

  • यह बहुत तेज़ी से बढ़ने वाला छायादार पेड़ है
  • इसके फूलों से मधुमक्खियां और तितलियां आकर्षित होती हैं, जो लोकल इकोसिस्टम के लिए जरूरी हैं
  • कचनार की औषधीय महत्ता भी है – आयुर्वेद में इसका प्रयोग अनेक रोगों के उपचार में किया जाता है
  • और सबसे अहम – इसकी सुंदरता, जो सड़क किनारे, रोटरी और पार्कों को अलौकिक बना देती है

बच्चों को दी गई पौधों की जिम्मेदारी

कार्यक्रम में आए स्थानीय बच्चों और स्कूली छात्रों को भी शामिल किया गया। हर बच्चे को एक पौधे की ‘अभिभावक’ की भूमिका दी गई – यानी वह पौधे की पानी देना, निगरानी रखना और उसके नामकरण तक का काम करेगा। इस तरह बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का भाव विकसित हो रहा है।

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फिर 180 नए जीवन बने हरियाली की उम्मीद!, ग्रेटर नोएडा की ग्रीन बेल्ट में एक्टिव सिटीजन की पहल से लौट रही है

प्राधिकरण की छवि को मिली मजबूती

इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की जनता-संवाद नीति को भी बल मिला है। आमतौर पर जहां सरकारी विभागों पर फॉलो-अप में ढील का आरोप लगता है, वहीं इस मामले में तेजी, पारदर्शिता और सुधारात्मक कदमों ने प्राधिकरण की प्रगतिशील कार्यशैली को जनता के सामने उजागर किया।

हरिंद्र भाटी ने स्पष्ट कहा:

“यदि नागरिक सजग हों और प्रशासन संवेदनशील, तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है।”


“एक पेड़ मां के नाम” – अब बनेगा जन आंदोलन

कार्यक्रम के अंत में ‘एक पेड़ मां के नाम’ मुहिम को और व्यापक बनाने की अपील की गई। इसके अंतर्गत सभी निवासियों से आग्रह किया जाएगा कि वे अपने परिवार की महिलाओं या मां के नाम पर कम से कम एक पौधा लगाएं, उसकी फोटो सोशल मीडिया पर साझा करें और पर्यावरण के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखें।


आगे क्या?

  • ग्रीन बेल्ट की निरंतर निगरानी
  • ड्रिप सिंचाई और पौधों की संख्या की डिजिटल गिनती
  • “My Plant Tracker” ऐप का प्रस्ताव, जिससे लोग अपने लगाए गए पौधे को जियो-टैग के ज़रिए देख सकें
  • हर RWA में ‘हरियाली दूत’ नियुक्त करने की योजना

“180 नई सांसें – एक नई उम्मीद”

इस कार्यक्रम की तस्वीरें, वीडियो और नागरिकों की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। एक्टिव सिटीजन टीम ने #GreenGreaterNoida अभियान के तहत इसे शहर की सबसे प्रेरक हरियाली पहल बताया है।


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📢 रफ़्तार टुडे इस शानदार उदाहरण के लिए हरिंद्र भाटी, मनजीत सिंह, और प्राधिकरण की पूरी टीम को सलाम करता है – जिन्होंने मिलकर साबित कर दिया कि जब समाज और प्रशासन एकसाथ चलें, तो पर्यावरण भी मुस्कुरा उठता है।


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