GBU University News : गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में संविधान दिवस का भव्य आयोजन, विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण विचार, आयोजन मानविकी और सामाजिक विज्ञान स्कूल के तत्वाधान में संपन्न हुआ

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में संविधान दिवस बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा “हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान” के संदेश को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय के डॉ. अंबेडकर मानवाधिकार अध्ययन केंद्र और राजनीतिक विज्ञान व अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग ने संयुक्त रूप से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। यह आयोजन मानविकी और सामाजिक विज्ञान स्कूल के तत्वाधान में संपन्न हुआ।
विशेषज्ञों ने प्रस्तावना, अधिकारों और कर्तव्यों पर डाली रोशनी
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. टी.आर. नवल, गेस्ट ऑफ हॉनर के रूप में प्रो. अवत्थी रमैया और मुख्य वक्ता के रूप में नरेंद्र सिंह की उपस्थिति रही। मंच का शुभारंभ कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज की अध्यक्ष प्रो. वंदना पांडे, और विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रभानु भरास द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
स्वागत भाषण में प्रो. वंदना पांडे ने संविधान को भारत की आत्मा बताते हुए इसकी तुलना वेदों की ऋचाओं से की और कहा कि संविधान अधिकारों और कर्तव्यों का संतुलित ग्रंथ है जिसकी मूल भावना समता पर आधारित है।
डॉ. चंद्रभानु भरास ने संविधान निर्माण से जुड़े महापुरुषों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि बी.एन. राव संविधान सभा के सलाहकार थे, जबकि वास्तविक रचनाकार के रूप में डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद किया जाना चाहिए।
प्रस्तावना का सामूहिक वाचन, अनुच्छेद 17 और अधिकारों पर जोर
मुख्य अतिथि डॉ. नवल ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कराया और अनुच्छेद 17 की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समाज को अस्पृश्यता और शोषण के विरुद्ध लड़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 का भी उल्लेख करते हुए सामाजिक न्याय पर जोर दिया।
“संविधान किताब नहीं, बल्कि समाज के लिए विचार और सिद्धांत” – अवत्थी रमैया
गेस्ट ऑफ हॉनर प्रो. रमैया ने कहा कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय का नाम ही शांति, समानता और तर्क का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि देश को जोड़ने वाला विचार है। प्रस्तावना को उन्होंने संविधान की शुरुआत और अंत दोनों बताया।
मुख्य वक्ता ने अंबेडकर के योगदान को रखा केंद्र में
मुख्य वक्ता नरेंद्र सिंह ने डॉ. अंबेडकर के विचारों को किताब ‘बुद्ध टू कार्ल मार्क्स’ के संदर्भ से समझाया। उन्होंने बताया कि बी.एन. राव द्वारा प्रस्तुत ड्राफ्ट में 7000 से अधिक संशोधन अंबेडकर द्वारा सुझाए गए, इसलिए वे ही वास्तविक निर्माता माने जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अंबेडकर ने हिंदू महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष में अपने पद से भी इस्तीफा दे दिया था।
कुलपति ने विद्यार्थियों को कर्तव्यपरायण बनने का दिया संदेश
कुलपति राणा प्रताप सिंह ने संविधान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अंबेडकर केवल अधिकारों के लिए संघर्ष नहीं करते थे, बल्कि कर्तव्यों के पालन को भी उतना ही महत्व देते थे। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को कर्तव्यनिष्ठ होने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ
अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रभानु भरास ने सभी अतिथियों और विद्यार्थियों के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने अगले वर्ष और भी भव्य आयोजन करने का आश्वासन देते हुए बताया कि विद्यार्थियों की भारी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां सभी ने संविधान के प्रति निष्ठा और कर्तव्यों के पालन का संकल्प लिया।



