Breaking News : बड़ी खबर, बड़ा फैसला!, नोएडा की कमान अब कृष्ण करुणेश के हाथ, संकट के दौर में सरकार का सख्त संदेश, कौन हैं कृष्ण करुणेश? अनुभव, सख्ती और प्रशासनिक पकड़ की पहचान, सरकार का साफ संदेश: लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा प्राधिकरण में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने आईएएस अधिकारी कृष्ण करुणेश को नोएडा प्राधिकरण का नया मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। लखनऊ से जारी आधिकारिक निर्देशों के बाद यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। अब तक अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACE0) के रूप में सेवाएं दे रहे कृष्ण करुणेश को नोएडा की कमान सौंपना, मौजूदा हालात में सरकार का एक कड़ा और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सरकार पर भी दबाव बढ़ा था। ऐसे में नए सीईओ की तैनाती को केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सिस्टम सुधार की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
कौन हैं कृष्ण करुणेश? अनुभव, सख्ती और प्रशासनिक पकड़ की पहचान
2011 बैच के आईएएस अधिकारी कृष्ण करुणेश मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण जिलों में काम किया है।
गाजियाबाद में एसडीएम और मुख्य विकास अधिकारी (CDO)
हापुड़ और बलरामपुर में जिलाधिकारी (DM)
जनवरी 2021 से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) में उपाध्यक्ष
इन पदों पर रहते हुए उन्हें कठोर निर्णय लेने वाले, फील्ड में सक्रिय और जवाबदेही तय करने वाले अधिकारी के रूप में जाना गया। यही कारण है कि नोएडा जैसे हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील शहरी क्षेत्र की जिम्मेदारी अब उन्हें सौंपी गई है।
सरकार का साफ संदेश: लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं
नोएडा प्राधिकरण के पूर्व सीईओ को हटाए जाने के बाद यह साफ हो गया था कि सरकार अब नाम नहीं, काम देखेगी। कृष्ण करुणेश की नियुक्ति यह दर्शाती है कि—
निर्माण स्थलों की सुरक्षा
बिल्डरों की मनमानी
सड़क, ड्रेनेज और बेसमेंट से जुड़े खतरे
अधिकारियों की जवाबदेही
इन सभी मुद्दों पर अब सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
नोएडा की जनता की उम्मीदें बढ़ीं
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के नागरिक लंबे समय से यह सवाल उठा रहे थे कि हाईटेक सिटी में बेसिक सेफ्टी क्यों फेल हो रही है?
अब नए सीईओ से जनता को उम्मीद है कि—
अवैध खुदाई और खुले गड्ढों पर त्वरित कार्रवाई होगी
निर्माणाधीन परियोजनाओं का सुरक्षा ऑडिट होगा
हादसों से पहले सिस्टम अलर्ट मोड में रहेगा, न कि बाद में जांच होगी
कृष्ण करुणेश के सामने चुनौती भी बड़ी, मौका भी
नोएडा देश का सबसे तेजी से बढ़ता शहरी क्षेत्र है। यहां—
हजारों निर्माण परियोजनाएं, अरबों रुपये का निवेश, लाखों लोगों की सुरक्षा, इन सबका संतुलन साधना आसान नहीं। लेकिन प्रशासनिक अनुभव, फील्ड पकड़ और सरकार के भरोसे के साथ कृष्ण करुणेश के सामने यह मौका है कि वे नोएडा प्रशासन की छवि को फिर से मजबूत करें।
अब नजरें टिकी हैं पहले फैसले पर…
क्या नए सीईओ बिल्डरों पर सख्ती करेंगे?
क्या अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
और क्या युवराज जैसे हादसे भविष्य में रोके जा सकेंगे?
नोएडा की जनता अब सिर्फ बयान नहीं, ठोस एक्शन देखना चाहती है।
युवराज केस बना टर्निंग पॉइंट, 90 मिनट की देरी ने हिला दिया सिस्टम
सेक्टर-150 में निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में पानी भरे गड्ढे में डूबकर युवराज मेहता की मौत ने पूरे नोएडा को झकझोर दिया। इस घटना के बाद सामने आया कि रेस्क्यू में करीब 90 मिनट की देरी हुई, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया।
सरकार द्वारा गठित SIT (विशेष जांच टीम) ने इस मामले में नोएडा अथॉरिटी, पुलिस प्रशासन और रेस्क्यू से जुड़े विभागों की भूमिका की गहन जांच शुरू की।
सूत्रों के मुताबिक—CFO, ACP, SHO, CMO सहित कई जिम्मेदार अधिकारियों से घंटों पूछताछ
मौके पर लिए गए फैसलों, समन्वय की कमी और प्रक्रिया में देरी पर तीखे सवाल
यह जानने की कोशिश कि समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई
यही वह पृष्ठभूमि है, जिसमें कृष्ण करुणेश की नियुक्ति को “नो टॉलरेंस” नीति का संकेत माना जा रहा है।



