Big News : “संघ का शताब्दी विजन, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में जुटी सज्जन शक्ति, विजय गोयल के ‘पंच परिवर्तन’ मंत्र से गूंजा राष्ट्र निर्माण का संकल्प”, दीप प्रज्ज्वलन से शुरुआत, विचारों की ज्योति से हुआ मार्गदर्शन, ‘पंच परिवर्तन’ का मंत्र, समाज सुधार से राष्ट्र निर्माण तक की राह, युवाओं की जिज्ञासा और समाधान,‘Join RSS’ बना नया सेतु

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-12 के समीप भनोता क्षेत्र में रविवार को वैचारिक ऊर्जा और सामाजिक समरसता का एक प्रभावशाली संगम देखने को मिला, जब Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) द्वारा अपने शताब्दी वर्ष (2025–26) के उपलक्ष्य में ‘प्रमुख जनगोष्ठी’ का आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन में समाज के प्रबुद्ध वर्ग, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए और राष्ट्र निर्माण के विविध आयामों पर गंभीर चर्चा हुई।
दीप प्रज्ज्वलन से शुरुआत, विचारों की ज्योति से हुआ मार्गदर्शन
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें कार्यक्रम के अध्यक्ष Yogesh मुख्य वक्ता Vijay Goyal (प्रांत संपर्क प्रमुख, मेरठ) और Chiranjeev (विभाग प्रचारक, नोएडा विभाग) ने भाग लिया। इस दौरान पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता का भाव स्पष्ट रूप से महसूस किया गया।
‘पंच परिवर्तन’ का मंत्र: समाज सुधार से राष्ट्र निर्माण तक की राह
मुख्य वक्ता विजय गोयल जी ने अपने संबोधन में संघ के शताब्दी वर्ष की दृष्टि को विस्तार से रखते हुए ‘पंच परिवर्तन’—पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य, स्वदेशी और सामाजिक जागरूकता—को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।
उन्होंने कहा कि यदि आमजन इन पांच मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात कर लें, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः देखने को मिलेगा। उनका यह भी कहना था कि राष्ट्र का विकास केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों के संस्कार और जिम्मेदारी से संभव होता है।
संघ की स्थापना और विचारधारा पर ऐतिहासिक दृष्टि
विजय गोयल जी ने संघ के प्रथम संघचालक K. B. Hedgewar के योगदान को याद करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद एक ऐसी संगठनात्मक शक्ति का निर्माण किया, जो आज देशभर में सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का आधार बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य केवल संगठन विस्तार नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण है—ऐसे व्यक्तियों का निर्माण जो समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित हों।
“शाखा है संस्कारों की पाठशाला”: चिरंजीव जी का संदेश
कार्यक्रम में विभाग प्रचारक चिरंजीव जी ने संघ की कार्यप्रणाली और उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ की शाखा एक ऐसा मंच है, जहां व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता है—शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से। उन्होंने शाखा को “संस्कारों की पाठशाला” बताते हुए कहा कि यहां से तैयार होने वाले स्वयंसेवक समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बनते हैं। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे संघ से जुड़ें और नियमित शाखा में भाग लें।
युवाओं की जिज्ञासा और समाधान: ‘Join RSS’ बना नया सेतु
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित युवाओं और अन्य नागरिकों ने संघ से जुड़ने के तरीकों और योगदान के स्वरूप को लेकर कई प्रश्न पूछे। इस पर विजय गोयल जी ने बताया कि आज के डिजिटल युग में ‘Join RSS’ जैसे ऑनलाइन माध्यमों के जरिए युवा आसानी से संघ से जुड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग सीधे तौर पर संघ से नहीं जुड़े हैं, वे भी विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में सहयोग देकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।
मंच पर प्रमुख हस्तियां, जनसमूह में दिखा उत्साह
इस अवसर पर मंच पर जिला कार्यवाह Rajkumar Arya सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
जनगोष्ठी में दादरी नगर, दादरी खंड, एनटीपीसी खंड, भगत सिंह नगर, केशव नगर और मंगल पांडे नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सज्जन शक्ति, मातृ शक्ति और वरिष्ठ स्वयंसेवक शामिल हुए। यह उपस्थिति इस बात का संकेत थी कि समाज में वैचारिक संवाद और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर व्यापक रुचि बनी हुई है।
सामूहिक संकल्प के साथ समापन: समरस समाज की ओर कदम
कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र और सामाजिक समरसता के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। सभी उपस्थित जनों ने यह संकल्प लिया कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।
यह जनगोष्ठी न केवल एक वैचारिक मंच साबित हुई, बल्कि यह भी स्पष्ट कर गई कि संघ अपने शताब्दी वर्ष में समाज के हर वर्ग तक पहुंचकर संवाद और सहभागिता को और मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है।



