सुरजपुरगौतमबुद्ध नगरग्रेटर नोएडाताजातरीनदादरी

Surajpur Barahi Mella : “रागनी की गूंज, भक्ति का रंग और आधुनिक आकर्षण, सूरजपुर बाराही मेला-2026 बना जनआस्था और मनोरंजन का महाकुंभ”, “परंपरा के साथ शुरुआत, संस्कृति के रंग में रंगा मंच”, “आधुनिक आकर्षण का तड़का—जलपरी शो और एडवेंचर झूले बने हिट”, “7 अप्रैल को होगा होली संगीत प्रतियोगिता का आयोजन”

सूरजपुर, रफ़्तार टूडे। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बाराही मेला-2026 इस वर्ष एक भव्य और बहुआयामी आयोजन के रूप में उभरकर सामने आया है। रविवार को मेले में उमड़ा जनसैलाब, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, आध्यात्मिक संदेश और आधुनिक मनोरंजन साधनों का संगम ऐसा रहा, जिसने इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि जनभावनाओं का महोत्सव बना दिया।
दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं, परिवारों, युवाओं और बच्चों की भारी भीड़ ने पूरे मेला परिसर को जीवंत कर दिया, जहां हर कोना आस्था, उल्लास और सांस्कृतिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।


“परंपरा के साथ शुरुआत, संस्कृति के रंग में रंगा मंच”
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि-विधान और पूजन के साथ हुआ, जिसके बाद सांस्कृतिक मंच पर प्रस्तुतियों की श्रृंखला शुरू हुई। प्रसिद्ध रागनी कलाकार ज्ञानेंद्र सरधना एंड पार्टी ने अपनी दमदार आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को बांधे रखा। वहीं हरिद्वार से आए कलाकार वेदपाल बसेड़ा ने “मिट्टी के पुतले जाना पड़ेगा जरूर” रागनी के माध्यम से जीवन की नश्वरता और मानव अस्तित्व के गूढ़ दर्शन को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को न केवल भावुक किया, बल्कि आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित किया।

“सामाजिक चेतना की आवाज बनी रागनी”
मंच पर केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों को भी प्रमुखता दी गई। कलाकार संध्या चौधरी ने “आज दया धर्म बस कहने के रह गए…” जैसी रागनी के माध्यम से समाज में गिरते नैतिक मूल्यों पर तीखा प्रहार किया।
वहीं ज्ञानेंद्र सरधना ने “बोली के प्रभाव से ही अपने पराए हो जाते हैं…” विषय पर अपनी प्रस्तुति से संवाद और व्यवहार की शक्ति को प्रभावशाली तरीके से उजागर किया।
इन प्रस्तुतियों ने मेले को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर एक संदेशवाहक मंच बना दिया।


“भक्ति और भावनाओं का चरम—राजा मोरध्वज प्रसंग ने नम कर दी आंखें”
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब ज्ञानेंद्र सरधना और संध्या चौधरी ने राजा मोरध्वज की परीक्षा का प्रसंग मंचित किया। इस मार्मिक प्रस्तुति ने पूरे पंडाल को भावनाओं से भर दिया। दर्शकों की आंखें नम हो गईं और तालियों की गूंज ने कलाकारों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

“नन्हीं प्रतिभा का कमाल—पलक राजपूत ने किया संपूर्ण रामायण मंचन”
मेले में बाल प्रतिभाओं को भी विशेष मंच दिया गया।
पलक राजपूत ने संपूर्ण रामायण का अद्भुत मंचन कर सभी को चौंका दिया। उनकी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और “जय श्रीराम” के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। शिव मंदिर सेवा समिति द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया, जिससे अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिली।


“आधुनिक आकर्षण का तड़का—जलपरी शो और एडवेंचर झूले बने हिट”
इस वर्ष के बाराही मेले में पारंपरिक आयोजनों के साथ आधुनिक मनोरंजन का अनूठा मिश्रण देखने को मिला।
जलपरी शो ने बच्चों और युवाओं के बीच खास आकर्षण पैदा किया। नीले समुद्र जैसी पृष्ठभूमि में जलपरी की जीवंत प्रस्तुति रोमांच से भरपूर रही। शो के संचालक मनोज गुप्ता के अनुसार, इस अनोखे कॉन्सेप्ट को केरल से सीखकर शुरू किया गया था और अब यह कई शहरों में लोकप्रिय हो चुका है। वहीं मिक्चर चिपकने वाला झूला भी रोमांच प्रेमियों के लिए मुख्य आकर्षण बना रहा, जहां लोग हवा के दबाव से दीवारों से चिपकते हुए अनोखा अनुभव लेते नजर आए।

“सोशल मीडिया और संस्कार—मेले की थीम ने दिया बड़ा संदेश”
इस वर्ष मेले की थीम “सोशल मीडिया और संस्कार” रखी गई, जिस पर समिति के कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सिंघल ने विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों और युवाओं के संस्कारों को प्रभावित कर रहा है। अभिभावकों से अपील की गई कि वे बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ें और संयुक्त परिवार व्यवस्था को मजबूत करें।


“मुख्य अतिथियों ने दिया समाजसेवा और संस्कृति का संदेश”
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में Bharat Vikas Parishad की नई कार्यकारिणी के अध्यक्ष मुकुल गोयल, महासचिव आलोक गोयल और कोषाध्यक्ष कुमार आदित्य (कवि) उपस्थित रहे। मुकुल गोयल ने दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए सहायता का आश्वासन दिया, वहीं कुमार आदित्य ने अपनी ओजपूर्ण कविता से मेले की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत कर दिया।
आलोक गोयल ने बाराही मेले को क्षेत्र की पहचान बताते हुए इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित किया।


“युवाओं को मिला प्रेरणा का मंच”
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित आर्टिस्ट और यूट्यूबर प्रदीप भाटी एवं रजनीश ने युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को पहचानने का संदेश दिया। उनकी उपस्थिति ने युवाओं के बीच नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया।


“7 अप्रैल को होगा होली संगीत प्रतियोगिता का आयोजन”
मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने जानकारी दी कि 7 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को मेले में भव्य होली संगीत प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें क्षेत्र के प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इस आयोजन को लेकर दर्शकों में अभी से उत्साह देखने को मिल रहा है।


“परंपरा, संस्कृति और आधुनिकता का जीवंत संगम”
सूरजपुर का बाराही मेला-2026 इस वर्ष केवल एक मेला नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति, सामाजिक चेतना और आधुनिक मनोरंजन का विराट मंच बनकर उभरा है।
यह आयोजन न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त कर रहा है, बल्कि समाज को एकजुट करने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

Raftar Today
Raftar Today

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button