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Expo Mart News : हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को वैश्विक मंच देने की कवायद तेज, EPCCH अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कर्नाटक के वरिष्ठ अधिकारियों से की उच्च स्तरीय वार्ता, कर्नाटक से ग्लोबल मार्केट तक हस्तशिल्प की उड़ान!, निर्यात में आ रही चुनौतियों को दूर करने के लिए EPCCH ने राज्य सरकार के साथ मिलाया हाथ



नई दिल्ली/बेंगलुरु, रफ़्तार टुडे।
भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने और निर्यात के रास्ते में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (EPCCH) ने कर्नाटक सरकार के साथ रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत किया है। परिषद के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना के नेतृत्व में EPCCH प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु में राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें राज्य से हस्तशिल्प निर्यात बढ़ाने के लिए प्रभावी उपायों पर चर्चा हुई।


उच्चस्तरीय मुलाकातों में निर्यात की बाधाओं से लेकर समाधान तक हर पहलू पर हुई चर्चा

डॉ. नीरज खन्ना ने EPCCH के मुख्य संयोजक श्री अवधेश अग्रवाल, सदस्य सीओए श्री के. एन. तुलसी राव और कार्यकारी निदेशक श्री आर. के. वर्मा के साथ कर्नाटक सरकार की तीन प्रमुख शीर्ष अधिकारियों से भेंट की:

  • अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं विकास आयुक्त श्रीमती उमा महादेवन, IAS
  • कौशल विकास, उद्यमिता एवं आजीविका विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एस. सेल्वाकुमार, IAS
  • उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की आयुक्त श्रीमती गुंजन कृष्णा, IAS

इन मुलाकातों में EPCCH प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के हस्तशिल्प क्षेत्र को मजबूत करने, निर्यात की बाधाएं दूर करने, रोजगार सृजन और शिल्पकारों को सशक्त बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया।


भारत के हस्तशिल्प निर्यात में कर्नाटक की अहम भूमिका

डॉ. खन्ना ने बताया कि कर्नाटक में लकड़ी, धातु, बुनकरी, चित्रकला, हस्तनिर्मित वस्त्र और बेंत-बांस जैसी अनेक समृद्ध हस्तशिल्प परंपराएं हैं, जिनका निर्यात बड़ी मात्रा में संभव है। उन्होंने कहा,

“कर्नाटक का हस्तशिल्प न केवल सुंदरता का प्रतीक है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट कर न केवल रोजगार बढ़ाया जा सकता है बल्कि भारत के शिल्प को वैश्विक ब्रांड बनाया जा सकता है।”


निर्यात को लेकर उठाए गए अहम मुद्दे – जानिए क्या-क्या आया सामने

बैठक के दौरान EPCCH अध्यक्ष ने प्रमुख चुनौतियों और उनके समाधान प्रस्तुत किए, जैसे:

  • मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA) योजना में सुधार
  • ई-कॉमर्स निर्यात को सुविधाजनक बनाना
  • शिपिंग लागत में सब्सिडी, खासकर कंटेनरों की ढुलाई
  • डिज़ाइन विकास और कंप्लायंस में मदद
  • निर्यात बीमा व ब्याज सब्सिडी की योजना
  • नई अंतरराष्ट्रीय मार्केट्स की खोज में राज्य की भागीदारी

राज्य सरकार के अधिकारियों ने इन सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और संभावित सहायता देने का आश्वासन दिया।


IHGF दिल्ली फेयर-ऑटम 2025 में कर्नाटक को मिला विशेष आमंत्रण

डॉ. खन्ना ने बैठक के दौरान कर्नाटक सरकार को IHGF Delhi Fair – Autumn 2025 में सक्रिय भागीदारी का औपचारिक निमंत्रण भी सौंपा। यह मेला 13 से 17 अक्टूबर, 2025 तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित किया जाएगा।

“यह दुनिया का सबसे बड़ा हस्तशिल्प मेला है, जिसमें 3,000 से ज्यादा प्रदर्शक और 7,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार भाग लेंगे। कर्नाटक के लिए यह बड़ा अवसर है।” – डॉ. नीरज खन्ना


कर्नाटक के कारीगरों के लिए प्रस्तावित है एक समर्पित मंडप

EPCCH की ओर से प्रस्तावित है कि कर्नाटक की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को एक थीमैटिक मंडप में प्रस्तुत किया जाए, जहां कारीगर सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से संवाद कर सकें और अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार में उतार सकें।


निर्यातकों से संवाद – बेंगलुरु, मैसूर के प्रमुख निर्यातकों के साथ खुली बैठक

EPCCH प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के प्रमुख निर्यातकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और जमीनी समस्याएं सुनीं। बैठक में सामने आया कि अभी भी कई प्रकार की लॉजिस्टिक, ट्रेड पॉलिसी और बैंकिंग बाधाएं हैं, जिनसे छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातक जूझ रहे हैं।

श्री अवधेश अग्रवाल ने कहा,

“हम हर कदम पर कारीगरों और निर्यातकों के साथ खड़े हैं। राज्य सरकार के सहयोग से इन अड़चनों को दूर कर निर्यात को नई ऊंचाई तक पहुंचाया जाएगा।”


EPCCH की भूमिका – 10,000 से अधिक निर्यातकों का प्रतिनिधित्व

EPCCH देश भर के 10,000 से ज्यादा हस्तशिल्प निर्यातकों का प्रतिनिधित्व करता है और ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान में एक अहम कड़ी बन चुका है।

वर्ष 2024-25 के दौरान, भारत से ₹33,123 करोड़ रुपये (लगभग $3.9 बिलियन) का हस्तशिल्प निर्यात किया गया। इस रिकॉर्ड में कर्नाटक के योगदान को और बढ़ाने की रणनीति EPCCH और राज्य सरकार मिलकर तैयार कर रही हैं।


हस्तशिल्प – भारत की सांस्कृतिक पहचान और रोजगार की रीढ़

हस्तशिल्प न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता भी है। विशेषकर महिलाएं और वंचित वर्ग इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हैं।

डॉ. खन्ना ने कहा,

“हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत का पारंपरिक शिल्प ग्लोबल रिटेल स्टोर्स की शेल्फ पर पहुंचे और ‘मेक इन इंडिया’ का असली रूप सामने आए।”


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✍️ निष्कर्ष:
EPCCH और कर्नाटक सरकार की साझेदारी भारत के हस्तशिल्प उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल कारीगरों और छोटे उद्यमियों को नए बाजार मिलेंगे, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान भी प्राप्त होगी। जब नीति, योजना और स्थानीय प्रतिभा का मेल होता है – तो भारत की कला सीमाओं से परे उड़ान भरने लगती है। 🌐🇮🇳


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