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Jewar Yamuna Airport News : नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तार से बदलेगा हजारों परिवारों का जीवन!, जानिए किसे कितना मुआवजा और कहां मिलेगा नया ठिकाना, 17 हजार से ज्यादा परिवार होंगे प्रभावित, 14 गांवों की जमीन अधिग्रहित, सरकार ने तैयार किया पुनर्वास का खाका, हर परिवार को मिलेगा प्लॉट, गुजारा भत्ता और नौकरी का वादा

ADM बच्चू सिंह ने बताया कि “हमने पुनर्वास योजना बना ली है। सरकार की मंजूरी मिलते ही अंतिम योजना प्रकाशित कर दी जाएगी। फिर औपचारिक रूप से पुनर्वास क्षेत्र घोषित होगा।”


जेवर, रफ्तार टुडे।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का तीसरा और चौथा चरण अब आकार लेने को तैयार है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सामाजिक बदलाव भी दस्तक दे रहा है।
दिल्ली से सटे जेवर क्षेत्र में चल रहे इस मेगा प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए 14 गांवों की 1857 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहित की जाएगी, जिससे करीब 17,945 परिवारों के जीवन पर सीधा असर पड़ेगा।

ये परिवार मुख्यतः खेती-किसानी और पशुपालन पर निर्भर छोटे किसान हैं। ऐसे में जिला प्रशासन ने एक विस्तृत पुनर्वास योजना तैयार की है जिसमें मुआवजा, प्लॉट, आजीविका सहायता, और नौकरी की गारंटी जैसे कई अहम बिंदु शामिल हैं।


जमीन अधिग्रहण की जरूरत क्यों?

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है, और अब उसके तीसरे और चौथे चरण की शुरुआत हो रही है।
इसके लिए ज़रूरी बुनियादी ढांचे, रनवे विस्तार, लॉजिस्टिक ज़ोन और सुरक्षा घेरे को ध्यान में रखते हुए 14 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है।

इस अधिग्रहण में 7 सरकारी स्कूल भी शामिल हैं, जिन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा।


सर्वे रिपोर्ट में क्या सामने आया?

मई-जून 2025 में जिला प्रशासन ने एक विस्तृत सर्वे कराया।
इसमें पाया गया कि:

  • 85% परिवारों की सालाना आय 50,000 से 1 लाख रुपये के बीच है
  • मात्र 4% परिवारों की सालाना आय 5 लाख से अधिक है
  • अधिकांश लोग खेती या खेतिहर मजदूरी पर निर्भर हैं
  • पशुपालन से जुड़ी आय भी इन गांवों का सहारा है

इसी आधार पर पुनर्वास योजना बनाई गई जिसमें पशुओं के लिए अलग शेड, चारा भंडारण की जगह और गांवों में आवश्यक सुविधाएं देने की योजना शामिल है।


सबको मिलेगा नया घर – जानिए पुनर्वास की योजना

प्रशासन ने 340 हेक्टेयर भूमि का चयन किया है जहाँ विस्थापित परिवारों को बसाया जाएगा।
यह भूमि अलावलपुर, मंगरौली, अहमदपुर चौरौली और नीमका शाहजहांपुर क्षेत्रों में है।

यहां निम्न सुविधाएं होंगी:

  • हर परिवार को उनके सदस्यों के अनुसार 50 से 500 वर्ग मीटर तक प्लॉट
  • सड़क, सीवेज, बिजली, जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं
  • सामुदायिक भवन, राशन की दुकानें, आंगनवाड़ी, श्मशान घाट और पशुशेड
  • महिलाओं और अविवाहित बेटियों को भी प्लॉट में बराबरी का हक

कितना मिलेगा मुआवजा?

प्रशासन की तरफ से जमीन मालिकों को 4300 रुपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजा देने की योजना है, जो पिछली बार की तुलना में 40% अधिक है।

इसके अलावा:

  • ₹50,000 रुपये परिवहन मुआवजा
  • ₹3,000 प्रति माह का एक साल तक का गुजारा भत्ता
  • SC/ST परिवारों को ₹50,000 अतिरिक्त सहायता
  • परिवार के एक सदस्य को एयरपोर्ट अथवा संबंधित क्षेत्र में रोजगार देने का वादा

महिलाओं को बराबरी का अधिकार – एक नई पहल

इस योजना की खास बात यह है कि इसमें महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं
अविवाहित बेटियों को भी बेटों की तरह अलग प्लॉट दिया जाएगा।
यह कदम न केवल पुनर्वास का हिस्सा है, बल्कि लैंगिक समानता की दिशा में भी बड़ा संकेत है।

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तार से बदलेगा हजारों परिवारों का जीवन!

गांवों में असंतोष भी कायम

हालांकि यह योजना कागज़ों पर सशक्त दिखती है, लेकिन कई गांवों में इसका विरोध भी है।

  • नीमका शाहजहांपुर में केवल 1% परिवारों ने ही सर्वे में हिस्सा लिया
  • ख्वाजपुर में 20% और थोरा में 50% लोगों ने ही सर्वे कराया
  • ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें और अधिक मुआवजा चाहिए
  • स्कूलों को नई जगह मुफ्त जमीन मिलेगी, पर पुरानी जमीन का कोई मुआवजा नहीं मिलेगा, जिससे असंतोष और गहराया है

क्या बोले ADM भूमि अधिग्रहण?

ADM बच्चू सिंह ने बताया कि:

“हमने पुनर्वास योजना बना ली है। सरकार की मंजूरी मिलते ही अंतिम योजना प्रकाशित कर दी जाएगी। फिर औपचारिक रूप से पुनर्वास क्षेत्र घोषित होगा।”


क्या कहते हैं जानकार?

विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना अगर पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ लागू की जाती है, तो यह सर्वश्रेष्ठ पुनर्वास मॉडल बन सकती है। लेकिन यदि गांव वालों की बातों को नजरअंदाज किया गया, तो इसका राजनीतिक और सामाजिक विरोध भी तेज हो सकता है।


निष्कर्ष: विकास की कीमत चुकाएंगे किसान, लेकिन विकल्प होंगे तैयार?

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है, लेकिन इसके विस्तार के लिए जिन हजारों परिवारों को उजड़ना पड़ेगा, उनके लिए सरकार की योजनाएं कितनी प्रभावी और न्यायसंगत साबित होती हैं, यह समय बताएगा।

अगर प्रशासन अपनी योजना को ईमानदारी, पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण से लागू करता है, तो यह एक आदर्श पुनर्वास उदाहरण बन सकता है।


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