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IEC College News : आईईसी कॉलेज में शिक्षक दिवस का भव्य आयोजन, शिक्षकों को दिया गया सम्मान, समाज की नींव कहे गए गुरुजन, शिक्षक दिवस का महत्व सरस्वती से लेकर विवेकानंद तक की परंपरा, शिक्षकों की मौजूदगी से गूंजा सभागार

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
नॉलेज पार्क स्थित आईईसी कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर एक भव्य और भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने न केवल कॉलेज परिवार को एकजुट किया, बल्कि समाज में शिक्षक की भूमिका और महत्व पर गहरी छाप भी छोड़ी।

शिक्षक – समाज की असली नींव

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के सीएफओ श्री अभिजीत कुमार, एक्सीक्यूटिव निदेशक प्रोफ़ेसर सुनील कुमार, निदेशक प्रोफेसर विनय गुप्ता तथा प्रोफेसर भानु सागर ने अपने संबोधन में शिक्षकों की महान भूमिका पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक समाज की नींव होते हैं।
शिक्षक ही वह शिल्पकार हैं, जो देश और समाज की प्रगति का भविष्य गढ़ते हैं।
शिक्षक की गोद में ही प्रलय और विकास दोनों पलते हैं।

इसलिए शिक्षकों को अपने कर्तव्यों और दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करते हुए राष्ट्र और समाज की तरक्की में योगदान देना चाहिए।

शिक्षकों का सम्मान – स्मृति चिन्ह देकर बढ़ाया मान

कार्यक्रम में संस्थान के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। यह क्षण शिक्षकों के लिए गर्व और खुशी से भरा हुआ था।

कई शिक्षकों ने इस सम्मान को अपने जीवन का यादगार पल बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम उनके और छात्रों के बीच भावनात्मक बंधन को और मजबूत करता है।

विचारों की बौछार

कार्यक्रम में प्रोफेसर नुरुल हसन और डीन छात्र कल्याण डॉ. नैमपाल सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल किताबें पढ़ाने वाले नहीं होते, बल्कि वे मूल्य, संस्कार और जिम्मेदारी भी सिखाते हैं।

शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त साधन है।

आयोजन समिति की अहम भूमिका

इस शानदार कार्यक्रम के सफल आयोजन में कई शिक्षकों की सक्रिय भूमिका रही।

प्रोफेसर राजकमल, प्रो. विनोद, प्रो. अमित यादव, प्रो. स्नेहिल, प्रो. शिवा, प्रो. रचना श्रीवास्तव ने मिलकर कार्यक्रम का संयोजन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर शरद माहेश्वरी और प्रबंधन विभाग की शिक्षिका निदा सरफराज ने किया।

कार्यक्रम के अंत में डीन एकेडेमिक्स प्रोफेसर विभूति शरण ने सभी का आभार जताया और इस आयोजन को शिक्षकों और छात्रों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

शिक्षकों की मौजूदगी से गूंजा सभागार

इस अवसर पर भारी संख्या में शिक्षक और स्टाफ सदस्य मौजूद रहे। सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और भावनाओं से भरा हुआ था। हर तरफ एक ही संदेश गूंज रहा था –
“शिक्षक ही असली मार्गदर्शक हैं, जिनके बिना समाज अधूरा है।”

शिक्षक दिवस का महत्व – सरस्वती से लेकर विवेकानंद तक की परंपरा

कार्यक्रम में वक्ताओं ने शिक्षक दिवस के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की धरोहर है।

गुरुओं के आशीर्वाद से ही विद्यार्थी अपने जीवन में नई ऊँचाइयों को छूता है। आधुनिक शिक्षा पद्धति में बदलाव के बावजूद गुरु का महत्व कम नहीं हुआ है। आज भी विद्यार्थी के जीवन में शिक्षक का मार्गदर्शन ही सफलता की कुंजी है।

आईईसी कॉलेज की पहचान – शिक्षा और संस्कार दोनों का संगम

आईईसी कॉलेज हमेशा से शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर देता आया है।

यह आयोजन साबित करता है कि कॉलेज न केवल तकनीकी शिक्षा में बल्कि मानवीय मूल्यों को संजोने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

आगे की राह – शिक्षक ही दिखाएंगे रास्ता

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश उभरकर सामने आया कि आने वाली पीढ़ियों को संवारने की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा शिक्षकों पर है। वे न केवल विद्यार्थियों को करियर में सफलता की ओर ले जाते हैं, बल्कि उन्हें अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक भी बनाते हैं।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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