Samsara School News : ग्रेटर नोएडा के समसारा विद्यालय में ‘बाल रामायण’ का भव्य आयोजन, नन्हे-मुन्नों की अद्भुत प्रस्तुति ने सबका मन जीता, मंचन की थीम संस्कार और संस्कृति का संगम, विद्यालय की प्रधानाचार्य कैप्टन प्रवीन राय ने कहा कि बाल रामायण जैसे आयोजन केवल मंचन नहीं, बल्कि एक शिक्षाप्रद अनुभव हैं

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। भारतीय संस्कृति, आदर्श और परंपराओं की झलक जब नन्हे-मुन्ने बच्चों के मासूम चेहरे और भाव-भंगिमा से झलके तो दृश्य स्वयं ही दिल को छू लेता है। 27 सितंबर को ग्रेटर नोएडा स्थित समसारा विद्यालय में ऐसा ही एक अद्भुत क्षण देखने को मिला। विद्यालय के कक्षा बाल वाटिका एक और दो के छोटे-छोटे विद्यार्थियों ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन को मंच पर जीवंत किया। इस कार्यक्रम को नाम दिया गया था – “बाल रामायण”, जिसमें प्रभु श्रीराम के बचपन से लेकर उनके राज्याभिषेक तक के जीवन की महत्वपूर्ण झलकियों का शानदार मंचन किया गया।
ग्रेटर नोएडा के समसारा विद्यालय में आयोजित बाल रामायण ने सभी को यह संदेश दिया कि आने वाली पीढ़ी यदि भारतीय संस्कृति और मर्यादाओं से जुड़ी रहे, तो समाज की नींव और भी मजबूत होगी। नन्हे-मुन्नों के अभिनय ने हर दिल को छू लिया और यह आयोजन लंबे समय तक याद किया जाएगा।
नन्हे-मुन्नों की अदाकारी ने रचा जादू
मंच पर जब मासूम बच्चों ने बाल राम का रूप धारण किया, तो दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठे। एक ओर जहां किसी ने छोटे-से कदमों से लक्ष्मण का साहस दिखाया,
तो किसी ने सीता माता का रूप धरकर मातृत्व और मर्यादा का संदेश दिया वहीं छोटे कलाकारों ने हनुमान, भरत और अन्य किरदारों को साकार कर दिया।
उनकी भोली मुस्कान और भावपूर्ण अभिनय ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शकों को ऐसा प्रतीत हुआ मानो समय पीछे लौट गया हो और त्रेता युग की झलकियों को उनके सामने जीवंत कर दिया गया हो।
मंचन की थीम – संस्कार और संस्कृति का संगम
इस मंचन का सबसे बड़ा उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श जीवन से परिचित कराना था। रामायण की गाथा में जहाँ भाईचारा, त्याग, प्रेम और कर्तव्यबोध की शिक्षा मिलती है, वहीं बच्चों ने इन आदर्शों को अपने अभिनय के माध्यम से उजागर किया।
नन्हे कलाकारों ने राम जन्म, बाल्यकाल की लीलाएँ, वनवास, रावण-वध और राज्याभिषेक तक की घटनाओं को मनमोहक तरीके से प्रस्तुत किया।
मंच पर रहे विशेष अतिथि
इस अवसर पर कई सम्मानित अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रोफेसर जीत सिंह, डायरेक्टर, आईपी लॉ कॉलेज, नॉलेज पार्क – मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद रहे। मिस पारुल सरदाना, ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित एक प्रतिष्ठित विद्यालय की प्रधानाचार्य, विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
बच्चों की प्रस्तुति की खुलकर सराहना की। सभी अतिथियों ने यह माना कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं।

अभिभावकों की भावनाएँ
बाल रामायण का मंचन केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के अभिभावकों के लिए भी यह अविस्मरणीय क्षण बन गया। दर्शकों में बैठे माता-पिता ने अपने बच्चों को भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान के रूप में देखकर गर्व और भावुकता दोनों का अनुभव किया।
तालियों की गूंज और उत्साह ने बच्चों का मनोबल कई गुना बढ़ा दिया। कैमरों और मोबाइल फोनों में इस अद्भुत प्रस्तुति को संजोने की होड़ लगी रही।
विद्यालय प्रबंधन की पहल
समसारा विद्यालय की प्रधानाचार्य कैप्टन प्रवीन राय ने इस आयोजन को विद्यालय की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा “बाल रामायण जैसे आयोजन केवल मंचन नहीं, बल्कि एक शिक्षाप्रद अनुभव हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, संस्कार और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है। यह देखना सुखद है कि इतने छोटे बच्चे इतनी सहजता से बड़े संदेश देने में सक्षम हैं।”
उन्होंने शिक्षकों और सहयोगी स्टाफ की भी सराहना की जिन्होंने बच्चों को इस प्रस्तुति के लिए तैयार किया।
संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
बाल रामायण का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारतीय समाज की उस परंपरा की पुनर्स्थापना था जिसमें विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा का केंद्र होता है। इस आयोजन ने साबित किया कि यदि बच्चों को सही दिशा और अवसर मिले तो वे बड़े-बड़ों को भी जीवन जीने की प्रेरणा दे सकते हैं।



