Noida Land Dispute News : नोएडा में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष पर कब्जे, मारपीट और धमकी के गंभीर आरोप, पुलिस आयुक्त से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग, खसरा नंबर 121 समेत कई जमीनों को लेकर लगाए गए आरोप, राजनीतिक प्रभाव के इस्तेमाल का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने हाल ही में गेझा रोड पर सामने आए जमीन विवाद का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि रवि प्रधान की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह कहा गया था कि हबीबपुर गांव निवासी शिवराम शर्मा उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर रहे हैं। आजाद सिंह का दावा इसके विपरीत है। उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति यह है कि रवि प्रधान स्वयं शिवराम शर्मा की जमीन पर कथित तौर पर कब्जा करना चाहते हैं। दोनों पक्षों की ओर से लगाए जा रहे इन परस्पर आरोपों के बीच जमीन के स्वामित्व, कब्जे और संबंधित दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

नोएडा, रफ़्तार टूडे । नोएडा के इलाहाबास गांव में जमीन के एक विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। मामले में आजाद सिंह ने पुलिस आयुक्त, गौतम बुद्ध नगर को शिकायत देकर पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष रवि प्रधान पर जमीन पर कथित कब्जे का प्रयास, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के मुताबिक, विवादित जमीन खसरा नंबर 121 में आजाद सिंह सहखातेदार हैं। उनका आरोप है कि रवि प्रधान उनके हिस्से की जमीन पर कथित रूप से कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो कथित तौर पर बाहरी लोगों को बुलाकर उनके साथ मारपीट और धमकी देने की कोशिश की गई।
कई खसरों की जमीन को लेकर भी लगाए आरोप
शिकायत में केवल खसरा नंबर 121 ही नहीं, बल्कि खसरा नंबर 42, 45, 121 और 270 की जमीन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने इन जमीनों पर कथित अवैध कब्जे और कॉलोनी काटने की गतिविधियों का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है और संबंधित जमीनों के स्वामित्व एवं कब्जे से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं, यह पुलिस और संबंधित प्राधिकरण की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के आधार पर पूरे मामले की जांच की मांग की है।
निर्माण कार्य को लेकर भी कार्रवाई का आरोप
आजाद सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 28 अगस्त को खसरा नंबर 122 में निर्माण कार्य के दौरान उनके भाई के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई कराई गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि जमीन से जुड़े विवाद के बीच उनके परिवार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की गई, जिसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि नोएडा प्राधिकरण की ओर से जमीन से जुड़े एक अन्य मामले में रवि प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। हालांकि, इस दावे और संबंधित एफआईआर की स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
राजनीतिक प्रभाव के इस्तेमाल का भी आरोप
आजाद सिंह ने शिकायत में रवि प्रधान पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अधिकारियों पर कथित दबाव बनाने और उन्हें गुमराह करने का आरोप भी लगाया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि रवि प्रधान ने अलग-अलग राजनीतिक दलों से नजदीकी बनाकर अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।
शिकायत में लगाए गए राजनीतिक आरोपों में कहा गया है कि रवि प्रधान पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा), फिर समाजवादी पार्टी और बाद में भाजपा से जुड़े रहे, ताकि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव बनाए रखा जा सके। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि जिले के कई प्रभावशाली नेताओं से उनके संपर्क हैं और इसी प्रभाव के चलते अधिकारियों पर कथित दबाव बनाया जाता है।
हालांकि, ये राजनीतिक एवं प्रभाव संबंधी आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी व्यक्ति के राजनीतिक संबंध अथवा किसी अधिकारी पर प्रभाव डालने के आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेज, आधिकारिक रिकॉर्ड या जांच के निष्कर्षों से ही हो सकती है।
गेझा रोड के जमीन विवाद का भी जिक्र
शिकायतकर्ता ने हाल ही में गेझा रोड पर सामने आए जमीन विवाद का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि रवि प्रधान की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह कहा गया था कि हबीबपुर गांव निवासी शिवराम शर्मा उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर रहे हैं।
आजाद सिंह का दावा इसके विपरीत है। उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति यह है कि रवि प्रधान स्वयं शिवराम शर्मा की जमीन पर कथित तौर पर कब्जा करना चाहते हैं। दोनों पक्षों की ओर से लगाए जा रहे इन परस्पर आरोपों के बीच जमीन के स्वामित्व, कब्जे और संबंधित दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
निष्पक्ष जांच की मांग
आजाद सिंह ने पुलिस आयुक्त को दी शिकायत में मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने अपने और अपने परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जमीन विवाद के कारण उनके परिवार को खतरा महसूस हो रहा है और मामले में समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है।
उन्होंने मांग की है कि जांच के दौरान संबंधित खसरा नंबरों की जमीन के राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व दस्तावेज, मौके की स्थिति और कथित निर्माण गतिविधियों की जांच की जाए। साथ ही, मारपीट और धमकी से जुड़े आरोपों की भी तथ्यात्मक जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
जमीन से जुड़े मामलों में स्वामित्व, कब्जा, बैनामा, राजस्व रिकॉर्ड और प्राधिकरण के दस्तावेज अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इस मामले में भी शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही सामने आएगी।
फिलहाल यह मामला पुलिस आयुक्त के समक्ष शिकायत के रूप में पहुंचा है। रवि प्रधान का पक्ष इस शिकायत के संबंध में उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
अब निगाहें पुलिस और संबंधित प्राधिकरण की जांच पर हैं। जांच में खसरा नंबर 121 समेत अन्य जमीनों के स्वामित्व और कब्जे की स्थिति, कथित निर्माण गतिविधियों, मारपीट एवं धमकी के आरोपों तथा राजनीतिक प्रभाव के दावों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।



