Breaking News : “काले कोट पर बरसी लाठियां, कानून के रखवालों में उबाल!”, लखनऊ लाठीचार्ज के विरोध में गौतमबुद्ध नगर बार एसोसिएशन का बड़ा प्रदर्शन, सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी, मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, अधिवक्ताओं में दिखा भारी आक्रोश

सुरजपुर, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं पर हुए कथित लाठीचार्ज की गूंज अब गौतमबुद्ध नगर तक पहुंच गई है। जिले के अधिवक्ताओं में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला। सुरजपुर स्थित न्यायालय परिसर में मंगलवार को गौतमबुद्ध नगर बार एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण आम सभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने हिस्सा लेकर घटना की कड़ी निंदा की और सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। सभा की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी एडवोकेट ने की। इस दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार लखनऊ में कानून व्यवस्था संभालने वाली पुलिस ने अधिवक्ताओं पर बल प्रयोग किया, वह लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करता है। अधिवक्ताओं का कहना था कि जो लोग संविधान और कानून की रक्षा के लिए न्यायालयों में संघर्ष करते हैं, उन्हीं के साथ इस प्रकार का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
“वकीलों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर हमला” — मनोज भाटी एडवोकेट
सभा को संबोधित करते हुए बार अध्यक्ष मनोज भाटी एडवोकेट ने घटना को अमानवीय बताते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा—“अधिवक्ता समाज लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की रीढ़ है। यदि वकीलों की सुरक्षा ही खतरे में होगी तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा?”
उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज करना सरकार और प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेशभर में अधिवक्ता आंदोलन को और तेज करेंगे।
मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
बैठक के बाद अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा, जहां मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी मेधा रूपम को सौंपा गया। ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं, जिनमें—
लाठीचार्ज में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई
घायल अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता और उचित इलाज
क्षतिग्रस्त चेंबरों का पुनर्निर्माण
अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए ठोस नीति
जैसी मांगें प्रमुख रहीं।
अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार समय रहते इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो प्रदेशभर में न्यायिक कार्य बहिष्कार और बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
“अधिवक्ता समाज चुप नहीं बैठेगा” — सचिव शोभाराम चन्दीला
सभा का संचालन बार एसोसिएशन के सचिव शोभाराम चन्दीला एडवोकेट ने किया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज हमेशा संविधान और न्याय व्यवस्था की रक्षा के लिए संघर्ष करता आया है और इस बार भी अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी। उन्होंने कहा— “यह केवल लखनऊ के अधिवक्ताओं का मामला नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के वकीलों के सम्मान और सुरक्षा का सवाल है। अधिवक्ता समाज चुप नहीं बैठेगा।” उन्होंने अधिवक्ताओं से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि यह समय संगठन की ताकत दिखाने का है। सभा में मौजूद अधिवक्ताओं ने भी एक स्वर में घटना की निंदा करते हुए सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की।

अधिवक्ताओं में दिखा भारी आक्रोश
सभा के दौरान न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं का गुस्सा साफ दिखाई दिया। कई अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि कानून के जानकारों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों के साथ इस प्रकार की घटनाएं होंगी, तो आम नागरिकों का भरोसा भी व्यवस्था से उठने लगेगा। अधिवक्ताओं का कहना था कि लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है और पुलिस द्वारा बल प्रयोग इस अधिकार का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज इस लड़ाई को केवल अपने सम्मान की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई मानता है।
आंदोलन की दी चेतावनी
सभा में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसमें न्यायिक कार्यों का बहिष्कार, धरना-प्रदर्शन और राज्यव्यापी विरोध शामिल हो सकता है।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि अधिवक्ताओं की आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास सफल नहीं होगा। अधिवक्ता समाज एकजुट होकर अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा करेगा।
न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों ने जताई चिंता
कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं न्यायपालिका और प्रशासन के बीच विश्वास को कमजोर करती हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि अधिवक्ताओं के साथ संवाद स्थापित कर मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाए। सभा के अंत में सभी अधिवक्ताओं ने एकजुटता का संकल्प लिया और कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा।



