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American Terrif News : अमेरिकी टैरिफ का बड़ा झटका भारतीय हस्तशिल्प उद्योग पर मंडराए संकट के काले बादल, लाखों कारीगरों की रोज़ी-रोटी पर खतरा, नेतृत्व की प्रतिक्रिया, “नेशन फर्स्ट पॉलिसी” से संकट से निकलने की तैयारी, टैरिफ वृद्धि का असर छोटे उद्यम से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक हाहाकार

दिल्ली/एनसीआर, रफ़्तार टुडे।
भारतीय हस्तशिल्प उद्योग, जिसे दुनिया भर में “क्रिएटिव इंडिया” की आत्मा कहा जाता है, इस समय अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। अमेरिका ने 27 अगस्त से अपने आयात शुल्क में अचानक भारी इज़ाफा करते हुए मौजूदा 50% टैरिफ पर अतिरिक्त 25% शुल्क लागू करने का फैसला किया है। इस झटके ने भारत के कारीगरों, निर्यातकों और छोटे उद्योगों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (EPCH) ने इस निर्णय को “भारत की कला और कारीगरी पर सीधा हमला” बताते हुए गहरी चिंता जताई है। परिषद का कहना है कि यह नीति सिर्फ व्यापारिक संकट नहीं लाएगी, बल्कि 3.5 मिलियन से अधिक कारीगरों की आजीविका को भी खतरे में डाल देगी, जिनमें से बड़ी संख्या ग्रामीण इलाकों की महिलाएं हैं।

टैरिफ वृद्धि का असर: छोटे उद्यम से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक हाहाकार

EPCH के अनुसार, अमेरिका भारतीय हस्तशिल्प का सबसे बड़ा बाजार है, जहां कुल निर्यात का लगभग 40% हिस्सा जाता है।

अब हालात ऐसे बन गए हैं कि—

छोटे और मध्यम उद्यमों के ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं।

कई कंपनियों को निर्यात सौदे आधे दाम पर करने पड़ रहे हैं।

निर्यातकों की वर्किंग कैपिटल पर गहरा दबाव है।

रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, खासकर उन इलाकों में जहां महिलाएं हस्तशिल्प निर्माण से जुड़ी हैं।

कुल मिलाकर, यह नीति सीधे तौर पर गांव-गांव के कारीगरों की थाली छीनने जैसा असर डाल रही है।

नेतृत्व की प्रतिक्रिया: “नेशन फर्स्ट पॉलिसी” से संकट से निकलने की तैयारी

EPCH के संरक्षक और IEML अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने इस मौके पर कहा:
“हस्तशिल्प उद्योग हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर काम करता आया है। अब वक्त है कि भारत, अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करे और लैटिन अमेरिका, यूरोप व अफ्रीका जैसे नए बाजारों की ओर रणनीतिक तरीके से कदम बढ़ाए।”

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार उरुग्वे और चिली जैसे देशों में वेयरहाउस-कम-मार्केटिंग चैनल स्थापित करे, जिससे भारतीय उत्पाद सीधे उन बाजारों तक पहुंच सकें।

इसी कड़ी में EPCH के कार्यकारी निदेशक आर. के. वर्मा ने कहा कि,
“आज की स्थिति में सरकार का तत्काल हस्तक्षेप बेहद जरूरी है। अगर MEIS स्कीम की पुनर्बहाली, Interest Equalisation Scheme का विस्तार, और RODTEP एवं Duty Drawback रेट्स में वृद्धि की जाए, तो उद्योग को बड़ी राहत मिल सकती है।”

हस्तशिल्प: भारत की पहचान और संस्कृति की धरोहर

यह संकट केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी चिंताजनक है। भारतीय हस्तशिल्प सिर्फ निर्यात का साधन नहीं है, बल्कि यह भारत की परंपरा, संस्कृति और कला का जीवंत दस्तावेज है।

भदोही की मशहूर कालीनें

लखनऊ की चिकनकारी

मुरादाबाद का पीतल उद्योग

फिरोजाबाद का कांच

कन्नौज का इत्र

ये सभी शिल्प भारत की पहचान हैं। यदि अमेरिकी टैरिफ की मार लंबे समय तक जारी रही, तो ये विरासतें वैश्विक स्तर पर अपनी चमक खो सकती हैं।

आंकड़े बोलते हैं: कितना बड़ा है यह नुकसान?

वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत से कुल हस्तशिल्प निर्यात ₹33,123 करोड़ (US$ 3,918 मिलियन) रहा।

इसमें से अमेरिका को निर्यात का मूल्य ₹12,814.73 करोड़ (US$ 1,518.18 मिलियन) था।

स्पष्ट है कि लगभग हर चौथा भारतीय हस्तशिल्प उत्पाद अमेरिका जाता है। ऐसे में टैरिफ वृद्धि का असर सीधा और गहरा होगा।

संकट से अवसर की ओर: नए बाजारों की ओर बढ़ते कदम

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संकट भारत के लिए “डाइवर्सिफिकेशन का मौका” भी है। अब समय आ गया है कि भारत—

लैटिन अमेरिका (ब्राजील, चिली, मेक्सिको)

यूरोप और CIS देशों

अफ्रीका और खाड़ी देशों

को अपनी प्राथमिकता सूची में शामिल करे।

सरकार यदि Free Trade Agreements (FTAs) पर तेजी से काम करे और ‘Made in India, Sell to the World’ रणनीति अपनाए, तो यह संकट नए अवसरों में बदल सकता है।

कारीगरों के हाथों की ताकत बचाना जरूरी

अमेरिकी टैरिफ वृद्धि ने भारतीय हस्तशिल्प उद्योग की नींव हिला दी है। यह झटका केवल निर्यातकों तक सीमित नहीं, बल्कि उन लाखों कारीगरों, बुनकरों और महिलाओं तक पहुंचा है, जो अपनी कला से भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।

हालांकि, EPCH और उद्योग जगत का मानना है कि यदि सरकार आगे बढ़कर समर्थन दे और नए बाजारों में अवसर खोजे, तो यह संकट भी एक नई दिशा में बदल सकता है।

भारत का हस्तशिल्प उद्योग पहले भी कठिन दौर से उबरा है, और इस बार भी यह “क्रिएटिव इंडिया” की पहचान को दुनिया भर में कायम रखेगा।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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