Breaking News : ऑपरेशन ‘इंद्रलोकपुरम’ जब भूमाफिया के आगे नतमस्तक दिखा सिस्टम — यूपीसीडा, ग्रेनो प्राधिकरण और प्रशासन की खामोशी पर उठे सवाल, अवैध कॉलोनियों की राजधानी बनता ग्रेटर नोएडा, सोशल मीडिया पर खुलेआम बिक रहे प्लॉट, किसकी है ये मिलीभगत?, अवैध कॉलोनियों का समानांतर शहर, योगी सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति कहाँ गई?, कानून की नाक के नीचे फलता-फूलता कारोबार

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले गौतम बुद्ध नगर की पहचान अब हाईटेक शहरों और चमचमाती सड़कों से नहीं, बल्कि अवैध कॉलोनियों के बढ़ते साम्राज्य से हो रही है।
जिले में तीन-तीन विकास प्राधिकरण — नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण, साथ ही यूपीसीडा (U.P. State Industrial Development Authority) और पुलिस कमिश्नरेट होने के बावजूद सिस्टम यहाँ भूमाफियाओं के सामने पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है।
“इंद्रलोकपुरम” — ग्रेटर नोएडा में नया ‘भूमाफिया प्रोजेक्ट’!
इन दिनों सोशल मीडिया और रियल एस्टेट वेबसाइट्स पर एक नाम तेजी से वायरल हो रहा है — “इंद्रलोकपुरम”, जिसे कथित रूप से सेक्टर ज़ीटा-1, ग्रेटर नोएडा के नाम से प्रमोट किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के ब्रोशर में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की अनुमति बताई गई है, जबकि सत्य इससे कोसों दूर है।
जांच में पता चला कि यह कथित कॉलोनी वास्तव में गुलिस्तानपुर गांव की भूमि पर विकसित की जा रही है, जो यूपीसीडा की अधिसूचित औद्योगिक भूमि के बीच स्थित है।
ना इसका नक्शा पास हुआ, ना रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन कराया गया, फिर भी जमीनें धड़ल्ले से बेची जा रही हैं।
ब्रिटिशकालीन अवशेष पर कब्ज़े की चर्चा
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस इलाके में ब्रिटिश शासनकाल की एक पुरानी सर्चलाइट टॉवर संरचना अब भी मौजूद है।
बताया जाता है कि यह क्षेत्र पुरातत्व महत्व की भूमि में आता है, और “इंद्रलोकपुरम” उसी ज़मीन के आसपास काटी जा रही है। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि यह पुरातत्व संपत्ति पर अतिक्रमण का भी मामला बन सकता है।
फिर भी — न प्राधिकरण हिला, न प्रशासन ने कोई नोटिस जारी किया।
सोशल मीडिया पर खुलेआम चल रही ‘प्लॉट सेलिंग’!
“इंद्रलोकपुरम” नामक अवैध कॉलोनी के ब्रोकर्स खुलेआम रियल एस्टेट वेबसाइट्स और फेसबुक ग्रुप्स पर विज्ञापन डाल रहे हैं। वे दावा करते हैं “यह फ्रीहोल्ड जमीन है, सरकारी दखल नहीं होगा, 100 गज से लेकर 200 गज तक के प्लॉट उपलब्ध हैं।”
उनका हौसला इतना बुलंद है कि वे सरकारी योजनाओं की तुलना में अपने अवैध प्रोजेक्ट को “ज्यादा सुरक्षित” बताने से भी नहीं चूकते! जबकि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आए दिन ऐसी कॉलोनियों पर बुलडोज़र चलाता नजर आता है।
अवैध कॉलोनियों का समानांतर शहर
पिछले 15 वर्षों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के आसपास दर्जनों गांवों में अवैध कॉलोनियों का समानांतर शहर बस चुका है। बरौला, सदरपुर, भंगेल, सरफाबाद, इलाहाबास, नया गांव, शाहबेरी, तुस्याना, सुनपुरा, वैदपुरा, सूरजपुर, कासना और अब गुलिस्तानपुर हर जगह भूमाफिया का नेटवर्क फैला हुआ है।
इनमें से अधिकांश कॉलोनियों में सीवर, सड़क, जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाएँ नहीं हैं।
जब लोग शिकायत लेकर प्राधिकरण के पास जाते हैं, तो उन्हें यही जवाब मिलता है “यह अवैध कॉलोनी है, हम जिम्मेदार नहीं हैं।”
नतीजा यह होता है कि जनता अपनी मेहनत की कमाई का घर खोकर सिस्टम की उदासीनता का शिकार बन जाती है।
सरकारी चुप्पी और मिलीभगत पर सवाल
सबसे बड़ा प्रश्न यही है जब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, यूपीसीडा, जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नरेट को इस चल रहे घोटाले की जानकारी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
सूत्रों के मुताबिक, “इंद्रलोकपुरम” प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों के राजनीतिक संरक्षण की चर्चाएँ भी ज़ोरों पर हैं।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि इस कॉलोनी के प्रमोटर पहले भी अन्य अवैध कॉलोनियां काट चुके हैं और हर बार प्रशासन ने आंखें मूंद लीं।
योगी सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति कहाँ गई?
योगी आदित्यनाथ सरकार बार-बार यह दोहराती है कि भ्रष्टाचार और अवैध कब्ज़े पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति लागू है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह नीति गौतमबुद्ध नगर के शो-रूम जिलों — नोएडा और ग्रेटर नोएडा — पर लागू नहीं होती?
जब भूमाफिया सरेआम सोशल मीडिया पर जमीन बेच रहे हों, और प्रशासन चुप्पी साधे बैठा हो, तो यह “मौन सहमति” नहीं तो और क्या है?
जनता के बीच बढ़ता आक्रोश
गुलिस्तानपुर, शाहबेरी और तुस्याना के आसपास के गांवों में लोग अब जन आंदोलन की तैयारी में हैं।
स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इंद्रलोकपुरम कॉलोनी पर कार्रवाई नहीं की, तो वे प्राधिकरण मुख्यालय पर धरना देंगे।
गांववासियों का कहना है “जब गरीब की झोपड़ी तोड़ने बुलडोजर तुरंत आता है, तो भूमाफिया के महलों पर खामोशी क्यों?”
रफ़्तार टुडे की पड़ताल
रफ़्तार टुडे की संयुक्त जांच में यह स्पष्ट हुआ कि “इंद्रलोकपुरम” का न कोई लेआउट अप्रूव्ड है,
न कोई प्राधिकरणीय अनुमति,
और न कोई रेरा रजिस्ट्रेशन।
फिर भी यहां प्लॉट की बुकिंग ली जा रही है, और ब्रोकर्स लाखों रुपये की डील फिक्स कर रहे हैं।
यह सीधे-सीधे भूमि घोटाले का संगठित अपराध प्रतीत होता है।
आगे क्या?
रफ़्तार टुडे इस मामले को लेकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण,
जिला प्रशासन गौतम बुद्ध नगर, पुलिस कमिश्नरेट और
यूपीसीडा से आधिकारिक प्रतिक्रिया लेने का प्रयास करेगा।
सवाल अब जनता का है क्या एक बार फिर कॉलोनाइज़र भाग जाएंगे और जनता की मेहनत की कमाई पर बने घरों पर बुलडोज़र चलेंगे?
“सिस्टम सोया है, भूमाफिया जाग गया है”
नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसे स्मार्ट सिटी के सपने को
“इंद्रलोकपुरम” जैसे प्रोजेक्ट बदनाम कर रहे हैं।
अगर प्रशासन ने अब भी कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले वर्षों में ग्रेटर नोएडा ‘अवैध कॉलोनी हब’ में तब्दील हो जाएगा।



