World Cancer News : युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा कैंसर का खतरा, दुर्लभ कैंसर से जूझ रहे दो युवाओं का फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में सफल इलाज, विश्व कैंसर दिवस पर विशेषज्ञों ने शीघ्र जांच और समय पर इलाज पर दिया जोर

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे।अब कैंसर केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली, पर्यावरणीय कारणों और अनदेखी आदतों के चलते युवाओं में भी कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस गंभीर सच्चाई को JAMA नेटवर्क ओपन में प्रकाशित एक अध्ययन ने भी उजागर किया है, जिसके अनुसार 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर की दर अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
इसी चिंताजनक प्रवृत्ति को लेकर विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा में एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉक्टरों ने युवाओं में बढ़ते कैंसर के मामलों पर चिंता जताते हुए शीघ्र निदान और साक्ष्य-आधारित इलाज की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर अस्पताल परिसर को कैंसर जागरूकता के प्रतीक रंग बैंगनी से रोशन किया गया।
संवाददाता सम्मेलन में डॉक्टरों ने दो ऐसे युवा मरीजों के मामलों की जानकारी साझा की, जो दुर्लभ और जानलेवा कैंसर से पीड़ित थे, लेकिन समय पर इलाज मिलने से आज बेहतर जीवन की ओर लौट चुके हैं।
स्टेज-3 हॉजकिन लिंफोमा से जूझ रहे 20 वर्षीय युवक को नई जिंदगी
20 वर्षीय राहुल को जब फोर्टिस ग्रेटर नोएडा लाया गया, तो वह गर्दन में लगातार सूजन, तेज बुखार और उल्टी की समस्या से परेशान थे। विस्तृत जांच के बाद उनमें स्टेज-3 हॉजकिन लिंफोमा (लिंफेटिक सिस्टम का कैंसर) की पुष्टि हुई। अस्पताल में भर्ती के समय उनकी जीवित रहने की संभावना 30 प्रतिशत से भी कम थी। विशेषज्ञ निगरानी में कीमोथेरेपी शुरू की गई। फॉलो-अप पेट-सीटी स्कैन में कैंसर पूरी तरह खत्म होने के संकेत मिले। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है और नियोजित कीमोथेरेपी जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय पर जांच और इलाज न होता, तो मरीज एक वर्ष से अधिक जीवित नहीं रह पाते।
24 वर्षीय युवक में क्रोनिक माइलॉयड ल्यूकीमिया की पहचान
दूसरा मामला 24 वर्षीय सुमित कुमार का है, जिन्हें लगातार बुखार और पेट में बेचैनी की शिकायत थी। जांच में उनका ब्लड काउंट अत्यधिक बढ़ा हुआ पाया गया। बोन मैरो बायोप्सी में क्रोनिक माइलॉयड ल्यूकीमिया (बोन मैरो का कैंसर) की पुष्टि हुई। भर्ती के समय उनकी जीवित रहने की संभावना भी 30 प्रतिशत से कम थी। डॉक्टरों ने तुरंत टारगेटेड ओरल थेरेपी शुरू की, जिससे ब्लड काउंट सामान्य हो गया और मरीज को आईसीयू की जरूरत नहीं पड़ी। हालत में सुधार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। समय पर इलाज न होने की स्थिति में मरीज छह महीने से अधिक जीवित नहीं रह पाते।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें: विशेषज्ञ
डॉ. प्रभात रंजन, कंसल्टेंट – मेडिकल ऑन्कोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा ने बताया कि हाल के वर्षों में युवाओं में कैंसर, विशेषकर ब्लड कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बुखार, सूजन, थकान जैसे लक्षणों को अक्सर मामूली समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे बीमारी एडवांस स्टेज तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक कीमोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी से अब कई प्रकार के कैंसर का सफल इलाज संभव है, बशर्ते समय पर जांच कराई जाए।
डॉ. अंबेश सिंह, सीनियर कंसल्टेंट – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ने कहा कि युवाओं में एडवांस स्टेज कैंसर के मामले इस बात का संकेत हैं कि शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। मिनिमली इनवेसिव सर्जरी और इंटीग्रेटेड ट्रीटमेंट के चलते आज कई कैंसर उपचारयोग्य हो चुके हैं। नियमित हेल्थ चेकअप और सतर्कता से कई जानें बचाई जा सकती हैं।
एडवांस कैंसर केयर के लिए प्रतिबद्ध फोर्टिस
फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के फेसिलिटी डायरेक्टर सिद्धार्थ निगम ने कहा कि अस्पताल में एडवांस डायग्नॉस्टिक सुविधाओं, मल्टीडिसिप्लिनरी विशेषज्ञ टीम और मरीज-केंद्रित प्रोटोकॉल के जरिए समग्र कैंसर उपचार प्रदान किया जा रहा है। इन दोनों मामलों की सफलता समय पर और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवा का प्रमाण है।
विश्व कैंसर दिवस के मौके पर विशेषज्ञों ने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, क्योंकि समय पर पहचान ही कैंसर से जंग जीतने की सबसे बड़ी कुंजी है।



