IBA Industry News : “MSME पर मंडराया संकट का साया”, बढ़ती लागत, गैस संकट और बाजार दबाव से उद्योगों की सांसें अटकीं, IBA ने मांगा तत्काल राहत पैकेज, “50% तक बढ़े कच्चे माल के दाम” उत्पादन चक्र हुआ बाधित, “ग्राहक नहीं मान रहे बढ़ी कीमत” उद्योगों पर दोहरी मार, “LPG संकट बना बड़ी चुनौती”: श्रमिकों का पलायन तेज

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और लगातार बढ़ती लागतों के बीच गौतम बुद्ध नगर के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं। ऊर्जा, कच्चे माल और संचालन खर्च में तेज उछाल ने उद्योगों की नींव को हिला दिया है। इंडस्ट्रियल बिज़नेस एसोसिएशन (IBA) ने इस स्थिति को “आपदा के समान” बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
“वैश्विक असर, स्थानीय संकट”: लागत बढ़ी तो उद्योग डगमगाए
वैश्विक बाजार में अस्थिरता का सीधा असर अब स्थानीय उद्योगों पर देखने को मिल रहा है।
ऊर्जा संसाधनों, धातुओं और कच्चे माल की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि ने उत्पादन लागत को कई गुना बढ़ा दिया है। ऐसे में MSME इकाइयों के लिए अपने ऑपरेशंस को बनाए रखना बेहद मुश्किल हो गया है।
IBA के उपाध्यक्ष नरेश चौहान ने बताया कि मौजूदा हालात में उद्योगों के लिए “सर्वाइवल” ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
“50% तक बढ़े कच्चे माल के दाम”: उत्पादन चक्र हुआ बाधित
IBA उपाध्यक्ष नरेश चौहान, जो प्लास्टिक उत्पाद निर्माण (Injection Molding) और Mold & Die इंडस्ट्री से जुड़े हैं, ने स्थिति की गंभीरता को विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में कच्चे माल की कीमतों में 50% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इतना ही नहीं, अग्रिम भुगतान करने के बावजूद समय पर कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो रहा, जिससे उत्पादन चक्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
इसका सीधा असर उद्योगों की सप्लाई चेन पर पड़ रहा है, जिससे ऑर्डर समय पर पूरे करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
“LPG संकट बना बड़ी चुनौती”: श्रमिकों का पलायन तेज
ऊर्जा संकट ने MSME सेक्टर की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। LPG गैस की कमी के चलते कई इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है, वहीं श्रमिक और कर्मचारी भी अस्थिरता के कारण पलायन करने लगे हैं।
इसके अलावा, मशीनों के स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने मेंटेनेंस लागत को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
“ग्राहक नहीं मान रहे बढ़ी कीमत”: उद्योगों पर दोहरी मार
नरेश चौहान ने बताया कि जहां एक ओर उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राहक कीमत बढ़ाने को तैयार नहीं हैं।
रेट रिवीजन स्वीकार नहीं किया जा रहा
भुगतान शर्तों में कोई राहत नहीं मिल रही
ऐसे में MSME इकाइयों के लिए आर्थिक संतुलन बनाए रखना लगभग असंभव होता जा रहा है। यह स्थिति उद्योगों को घाटे में संचालन करने के लिए मजबूर कर रही है।
“कालाबाजारी का खेल”: LPG पर नियंत्रण की मांग
IBA ने LPG गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी पर भी गंभीर चिंता जताई है। संस्था का कहना है कि बाजार में अफवाहों का माहौल है, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है।
इस पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की गई है, ताकि उद्योगों को आवश्यक ऊर्जा संसाधन समय पर और उचित कीमत पर मिल सकें।
“IBA की प्रमुख मांगें”: सरकार से राहत की गुहार
इंडस्ट्रियल बिज़नेस एसोसिएशन (IBA) ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं:
LPG एवं PNG गैस की निर्बाध और प्राथमिकता आधारित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए
PNG कनेक्शन के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट और प्रक्रियाओं में MSME को राहत दी जाए
कच्चे माल और धातुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकारी हस्तक्षेप हो
LPG की कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की जाए
MSME उद्योगों के लिए विशेष राहत पैकेज और वित्तीय सहायता दी जाए
उद्योग संगठनों के साथ शीघ्र उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाए
“Vision 2047 पर भी असर”: उद्योग बंद होने का खतरा
IBA अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो बड़े पैमाने पर उद्योग बंद हो सकते हैं। इसका असर केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश और देश की आर्थिक विकास दर पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि MSME सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और यदि यही कमजोर हुआ तो “Vision 2047” जैसे बड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी झटका लग सकता है।
“अब फैसले का वक्त”: सरकार के कदमों पर टिकी उम्मीद
गौतम बुद्ध नगर के उद्यमियों और MSME सेक्टर की निगाहें अब सरकार की ओर टिकी हैं।
उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार इस संकट की गंभीरता को समझते हुए जल्द ही ठोस और प्रभावी निर्णय लेगी।



