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Surajpur Barahi Mella News : “भक्ति की धुन, संस्कृति की खुशबू और आस्था का सैलाब!, सूरजपुर का बाराही मेला-2026 बना श्रद्धा, संगीत और लोक परंपरा का जीवंत उत्सव”, “संगीत और भक्ति का अनोखा संगम”, “सिर्फ मेला नहीं, सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक”, “श्रद्धालुओं और गणमान्यों की रही बड़ी भागीदारी”

सूरजपुर, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में आयोजित होने वाला ऐतिहासिक बाराही मेला-2026 इस बार अपने भव्य आगाज़ के साथ ही चर्चा का केंद्र बन गया है। बृहस्पतिवार रात शिव मंदिर परिसर में भजन संध्या के साथ मेले का शुभारंभ हुआ, जिसने पहले ही दिन यह संकेत दे दिया कि यह आयोजन सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामुदायिक एकता का विराट उत्सव है। जैसे ही भजन संध्या की शुरुआत हुई, पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूब गया। मंदिर प्रांगण में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, झिलमिलाती रोशनी और भक्ति संगीत की गूंज ने ऐसा वातावरण तैयार किया कि हर व्यक्ति खुद को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर महसूस करने लगा।


“भजनों की गूंज से गूंजा पंडाल, कलाकारों ने बांधा समां”
कार्यक्रम की शुरुआत धर्मवीर भाटी एंड पार्टी के कलाकारों द्वारा की गई, जिसमें ओमवीर नागर और श्रीपाल ने अपने मधुर स्वरों में भजनों की प्रस्तुति दी। उनके भजनों ने श्रद्धालुओं को इस कदर मंत्रमुग्ध किया कि पूरा पंडाल तालियों की गूंज से भर उठा। इसके बाद राजवीर शर्मा और ओमवीर बैसला एंड पार्टी के कलाकारों—सुनील शर्मा, प्रेम पंडित और नरेंद्र शर्मा ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और ऊंचाई दी।
भजन गायक सुनील कश्यप द्वारा प्रस्तुत “भगतों के तुमने मोहन सदा काम संवारे…” भजन ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। वहीं ओमवीर बैंसला की प्रस्तुति ने भी सभी का दिल जीत लिया और माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।


“संगीत और भक्ति का अनोखा संगम”
कार्यक्रम में प्रस्तुत भजनों में “राम नाम जपते रहो, काम करते रहो…” जैसे गीतों को विशेष सराहना मिली। इसके अलावा “गुरु बिना मानुस जन्म बेकार…”, “भोले बाबा इस दुनिया को क्या हो गया…” और “हो मन याद सतावे मोहन…” जैसे भजनों ने श्रद्धालुओं के दिलों को गहराई से छू लिया।
संगीत संयोजन में मास्टर रविंद्र चौधरी और केडी गुर्जर ने अपनी शानदार प्रस्तुति से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनके वादन ने भजन संध्या को और भी प्रभावशाली बना दिया।

“सिर्फ मेला नहीं, सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक”
बाराही मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी ने कहा कि यह मेला समाज में एकता, भाईचारे और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देता है। हर साल यह आयोजन लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करता है और नई पीढ़ी को परंपराओं से परिचित कराता है।

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सूरजपुर का बाराही मेला-2026 बना श्रद्धा, संगीत और लोक परंपरा का जीवंत उत्सव”


भव्य आयोजन के लिए पुख्ता तैयारियां”
महासचिव ओमवीर सिंह बैंसला ने बताया कि मेले के सफल आयोजन के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सिंघल ने भी भरोसा दिलाया कि इस बार का मेला पहले से अधिक भव्य और सुव्यवस्थित होगा।


“आने वाले दिनों में और भी रंगारंग कार्यक्रम”
मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने जानकारी दी कि 3 अप्रैल को रात्रिकालीन कार्यक्रम में मनोज कारना एंड पार्टी द्वारा रागिनी कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें कई प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।
इसके अलावा हरियाणा से आए लोक कलाकार पारंपरिक लोक नृत्य और लोकगीतों की प्रस्तुतियों से मेले को और भी आकर्षक बनाएंगे। यह आयोजन स्थानीय संस्कृति और कला को बढ़ावा देने का एक बड़ा मंच बनकर उभर रहा है।

“श्रद्धालुओं और गणमान्यों की रही बड़ी भागीदारी”
मेले के शुभारंभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन की सराहना की और इसे क्षेत्र की पहचान से जोड़ते हुए गर्व महसूस किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक उत्साह का भी प्रतीक बन गया है।

“आस्था, संगीत और संस्कृति का अद्भुत संगम”
सूरजपुर का बाराही मेला-2026 इस बार अपने भव्य आगाज़ के साथ ही यह साबित कर चुका है कि यह आयोजन सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं, आस्था और परंपराओं का जीवंत उत्सव है।
आने वाले दिनों में और भी भव्य कार्यक्रमों के साथ यह मेला क्षेत्र की पहचान को और मजबूत करेगा और हजारों लोगों के लिए यादगार अनुभव बनेगा।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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