Ajnara Homes Society : “5 साल का इंतज़ार खत्म!, अजनारा होम्स में खुशी की घंटियां बजीं, कोर्ट के फैसले ने दिलाई राहत—अब टावर O और N के फ्लैट मालिकों की होगी रजिस्ट्री, प्राधिकरण को 90 दिन की डेडलाइन”, नेफोमा के नेतृत्व में कोर्ट पहुंचा मामला

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की चर्चित हाउसिंग सोसायटी अजनारा होम्स में आखिरकार वह दिन आ गया, जिसका हजारों परिवार पिछले कई वर्षों से इंतजार कर रहे थे। लंबे संघर्ष, मानसिक तनाव और प्रशासनिक उलझनों के बीच अब सोसायटी के टावर O और N के निवासियों को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन टावरों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वह 90 दिनों के भीतर रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कराए।
कोर्ट के इस फैसले के बाद अजनारा होम्स के निवासियों में जबरदस्त खुशी का माहौल है। वर्षों से अपने ही घर की कानूनी पहचान पाने के लिए संघर्ष कर रहे परिवारों ने इस फैसले को “न्याय की जीत” बताया है। कई लोगों ने कहा कि यह केवल रजिस्ट्री का मामला नहीं था, बल्कि उनके सपनों, बचत और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा सवाल था।
घर खरीदा, पैसा दिया… फिर भी नहीं मिली मालिकाना पहचान
अजनारा होम्स के हजारों फ्लैट बायर्स पिछले लगभग पांच वर्षों से रजिस्ट्री न होने की समस्या से जूझ रहे थे। लोगों का कहना था कि उन्होंने बिल्डर को फ्लैट का पूरा भुगतान कर दिया, बैंक की ईएमआई भी भर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके घर की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही थी।
दरअसल, बिल्डर और प्राधिकरण के बीच वित्तीय एवं तकनीकी विवादों के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया अटक गई थी। इसका सीधा नुकसान उन परिवारों को उठाना पड़ रहा था, जिनका इन विवादों से कोई लेना-देना नहीं था।
निवासियों का आरोप था कि—“जो गलती बिल्डर और सिस्टम की है, उसकी सजा बायर्स को क्यों दी जा रही है?”
इसी सवाल को लेकर सोसायटी के निवासियों ने कानूनी लड़ाई का रास्ता चुना।
नेफोमा के नेतृत्व में कोर्ट पहुंचा मामला
अजनारा होम्स के टावर O और N के निवासियों ने नेफोमा (NEFOWA) के मुख्य सलाहकार दीपक दूबे के नेतृत्व में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि जिन बायर्स ने पूरा भुगतान कर दिया है, उन्हें रजिस्ट्री से वंचित नहीं रखा जा सकता।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों को सुना और आखिरकार फ्लैट बायर्स के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्री प्रक्रिया को लंबित रखना उचित नहीं है और प्राधिकरण को तय समय सीमा में इसे पूरा करना होगा।
“बिल्डर की गलती का बोझ खरीदार क्यों उठाए?”
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नेफोमा के मुख्य सलाहकार दीपक दूबे ने कहा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हजारों परिवार इसी प्रकार की समस्याओं से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा—
“यदि बिल्डर प्राधिकरण का पैसा जमा नहीं कर रहा, तो उसके लिए फ्लैट खरीदार कैसे जिम्मेदार हो सकते हैं? बायर ने अपनी जीवनभर की कमाई देकर घर खरीदा है। ऐसे में उन्हें रजिस्ट्री से वंचित रखना अन्याय है।”
उन्होंने यह भी कहा कि प्राधिकरण और बिल्डर के बीच की खींचतान का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि लोग मजबूर होकर अदालत की शरण ले रहे हैं।
कोर्ट बना अंतिम उम्मीद, अखंड ज्योत जलाकर मांगी थी जीत
सोसायटी निवासी आदित्य अग्रवाल ने बताया कि सुनवाई वाले दिन सोसायटी के लोगों ने मंदिर में अखंड ज्योत जलाई थी। लोगों को उम्मीद थी कि अदालत से उन्हें न्याय मिलेगा।
उन्होंने भावुक होकर कहा— “कोर्ट हमारे लिए अंतिम उम्मीद थी। हम वर्षों से परेशान थे। हर बार नई तारीख, नई फाइल और नया बहाना मिलता था। लेकिन अब कोर्ट के आदेश के बाद उम्मीद जगी है कि जल्द ही हमें अपने घर की कानूनी पहचान मिल जाएगी।”
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई सोसायटियों में यही संकट
नेफोमा अध्यक्ष अन्नू खान ने कहा कि अजनारा होम्स अकेली सोसायटी नहीं है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई बड़ी सोसायटियां आज भी रजिस्ट्री संकट से जूझ रही हैं। उन्होंने कहा कि बिल्डर और प्राधिकरण के बीच आर्थिक विवादों का सीधा असर फ्लैट बायर्स पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा—“हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकले, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अपने ही घर के लिए कोर्ट के चक्कर न लगाने पड़ें।”
अब 90 दिन पर टिकी सबकी नजर
कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को 90 दिनों के भीतर रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया है। ऐसे में अब हजारों परिवारों की नजर आने वाले तीन महीनों पर टिकी हुई है। यदि तय समय में प्रक्रिया पूरी होती है, तो यह फैसला ग्रेटर नोएडा वेस्ट के अन्य फ्लैट बायर्स के लिए भी एक बड़ी उम्मीद बन सकता है।
निवासियों में जश्न जैसा माहौल
कोर्ट के आदेश के बाद सोसायटी में खुशी का माहौल देखने को मिला। कई निवासियों ने इसे वर्षों की लड़ाई की जीत बताया। लोगों का कहना है कि अब उन्हें अपने घर को लेकर मानसिक शांति मिलेगी और भविष्य सुरक्षित महसूस होगा।
इस मौके पर सुबोध सिंह, आलोक कुमार, चितरंजन साहू, रूपम सिंह, धीरेन्द्र सिंहा सहित बड़ी संख्या में निवासी मौजूद रहे।



